प्रबंधन और संयुक्त यूनियन के बीच दूसरे दौर की वार्ता सफल, श्रमिकों में खुशी की लहर
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
सेल की गुवा लौह अयस्क खदान में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने को लेकर 15 जून की सुबह पहली पाली से शुरू हुआ गतिरोध आखिरकार देर शाम समाप्त हो गया। लगभग पूरे दिन चले तनाव और आंदोलन के बाद गुवा प्रबंधन तथा संयुक्त यूनियन के बीच दूसरे चरण की महत्वपूर्ण वार्ता सफल रही, जिसके बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद खत्म करने का निर्णय लिया। इस समझौते के बाद प्रबंधन और हजारों श्रमिकों के बीच राहत और खुशी का माहौल देखा जा रहा है।
सुबह करीब 5.30 बजे से ही बायोमेट्रिक हाजिरी का विरोध करते हुए श्रमिकों ने पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई थी। संयुक्त यूनियन के नेतृत्व में श्रमिकों ने स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सहमति के बिना नई व्यवस्था को लागू करना उचित नहीं होगा। दिनभर चली बातचीत के बाद आखिरकार प्रबंधन ने श्रमिकों की भावनाओं को समझते हुए पुरानी हाजिरी व्यवस्था को जारी रखने पर सहमति जताई।

पुरानी व्यवस्था से ही बनेगी हाजिरी
सफल वार्ता के बाद मजदूर नेता रामा पाण्डे ने बताया कि समझौते के तहत श्रमिक पहले की तरह ही अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे। बायोमेट्रिक प्रणाली के स्थान पर पुरानी व्यवस्था को यथावत रखने पर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि,
“आज तीसरी पाली से श्रमिक पहले की तरह हाजिरी बनाकर अपने-अपने कार्यस्थल पर योगदान देंगे और खदानों के उत्पादन को गति प्रदान करेंगे। हमारा उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि बायोमेट्रिक व्यवस्था से जुड़े कुछ अन्य मुद्दे अभी शेष हैं, जिन पर भविष्य में प्रबंधन और यूनियन आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान निकालेंगे।
दिनभर बना रहा तनाव, लेकिन वार्ता से निकला समाधान
बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण गुवा खदान क्षेत्र में दिनभर असमंजस की स्थिति बनी रही। श्रमिकों के आंदोलन और प्रबंधन के साथ लगातार हो रही बातचीत पर सभी की निगाहें टिकी थीं। हालांकि देर शाम हुई बैठक में सकारात्मक माहौल बना और अंततः विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल आया।
श्रमिकों का कहना था कि कई वर्षों से चली आ रही उपस्थिति व्यवस्था को अचानक बदलने से कर्मचारियों के बीच अनेक व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। वहीं प्रबंधन भी नई प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था के रूप में लागू करना चाहता था। दोनों पक्षों ने संवाद के माध्यम से तत्काल समाधान का रास्ता निकालते हुए टकराव की स्थिति समाप्त कर दी।

बैठक में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी और यूनियन प्रतिनिधि
गुवा में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में सेल के कई वरिष्ठ अधिकारी और सभी मान्यता प्राप्त यूनियनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में सीजीएम चंद्रभूषण कुमार, महाप्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, महाप्रबंधक वी. के. सुमन, महाप्रबंधक अर्णव डे, उप महाप्रबंधक श्री चौधरी सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए। संयुक्त यूनियन के प्रतिनिधियों ने भी श्रमिकों का पक्ष मजबूती से रखा, जिसके बाद सहमति का रास्ता प्रशस्त हुआ।
अब किरीबुरू और मेघाहातुबुरु की वार्ता पर टिकी निगाहें
इधर, इसी मुद्दे को लेकर किरीबुरू और मेघाहातुबुरु खदानों के श्रमिकों की संयुक्त यूनियन और दोनों खदानों के शीर्ष अधिकारियों के बीच केटीआई सभागार में तीसरे चरण की महत्वपूर्ण वार्ता देर शाम तक जारी रही। गुवा में सफल समझौते के बाद वहां के श्रमिकों और अधिकारियों के बीच भी सकारात्मक संदेश गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह संभावना जताई जा रही है कि आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से किरीबुरू एवं मेघाहातुबुरु में भी इस विवाद का जल्द समाधान निकाल लिया जाएगा, जिससे खदानों में सामान्य कार्य व्यवस्था पूरी तरह बहाल हो सकेगी।
संवाद की जीत, उत्पादन को मिलेगी रफ्तार
गुवा खदान में हुए इस समझौते को श्रमिक संगठनों और प्रबंधन के बीच संवाद की जीत माना जा रहा है। इससे न केवल श्रमिकों की आशंकाएं दूर हुई हैं, बल्कि उत्पादन प्रभावित होने की संभावना भी टल गई है। तीसरी पाली से श्रमिकों के कार्यस्थलों पर लौटने के साथ ही खदानों में सामान्य गतिविधियां फिर से गति पकड़ेंगी।
बायोमेट्रिक विवाद के शांतिपूर्ण समाधान ने यह संदेश भी दिया है कि श्रमिक हितों और संस्थान के विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम आपसी बातचीत और सहमति ही है।










