एएलसी की अपील और श्रम कानून के सम्मान में यूनियन का फैसला, तीनों खदान इकाइयों की विशेष बैठक में बनी रणनीति
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच झारखंड मज़दूर संघर्ष संघ ने बड़ा निर्णय लिया है। यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे और महामंत्री राजेन्द्र सिंधिया ने संयुक्त रूप से कहा है कि जब तक सीजीआईटी कोर्ट का अंतिम आदेश नहीं आ जाता, तब तक श्रमिक पुरानी उपस्थिति प्रणाली के तहत ही हाजिरी दर्ज करने की मांग पर कायम रहेंगे और किसी भी परिस्थिति में कानून एवं औद्योगिक शांति का उल्लंघन नहीं करेंगे।

एएलसी की मौजूदगी में हुई त्रिपक्षीय वार्ता
किरीबुरू हिलटॉप स्थित केटीआई कॉन्फ्रेंस रूम में सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय) चाईबासा एवं हजारीबाग, सेल प्रबंधन और झारखंड मज़दूर संघर्ष संघ के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई। बैठक में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा।
यूनियन की ओर से महामंत्री राजेन्द्र सिंधिया ने कहा कि वर्ष 1973 से लागू सर्टिफाइड स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत कर्मचारी उपस्थिति दर्ज करते आ रहे हैं और बिना संशोधन के बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करना श्रम कानूनों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि यह मामला पहले से ही सीजीआईटी कोर्ट में विचाराधीन है।
“मामला कोर्ट में है, इसलिए कोई निर्देश नहीं दे सकता”
बैठक के दौरान सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय) ने दोनों पक्षों से औद्योगिक संबंध (आईआर) की स्थिति को सामान्य बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वह कोई निर्णय या निर्देश देने की स्थिति में नहीं हैं। सभी पक्षों को न्यायालय के आदेश का इंतजार करना चाहिए और कानून का सम्मान करना चाहिए।
मेघालया गेस्ट हाउस में तीनों खदान इकाइयों की विशेष बैठक
एएलसी के साथ हुई बैठक के बाद झारखंड मज़दूर संघर्ष संघ की किरीबुरू, मेघाहातुबुरू और गुवा इकाई की एक विशेष बैठक मेघालया गेस्ट हाउस में केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में त्रिपक्षीय वार्ता की समीक्षा की गई और आगे की रणनीति तय की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय) द्वारा किए गए आग्रह, श्रम कानूनों और न्यायालय की गरिमा का सम्मान करते हुए कोर्ट के अगले आदेश तक वर्तमान उपस्थिति प्रणाली को यथावत रखा जाएगा।
“जबरन बायोमेट्रिक लागू हुआ तो श्रमिक टाइम हाउस में ही रहेंगे”
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि प्रबंधन कोर्ट के आदेश से पहले किसी प्रकार का परिवर्तन करता है और जबरन बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का प्रयास करता है, तो यूनियन से जुड़े श्रमिक पुरानी व्यवस्था के अनुसार हाजिरी बनाने के लिए टाइम हाउस में उपस्थित रहेंगे।
यूनियन ने स्पष्ट किया कि ऐसे हालात में श्रमिक कार्यस्थल पर नहीं जाएंगे, लेकिन किसी प्रकार का हंगामा, अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की समस्या भी उत्पन्न नहीं करेंगे। पूरी स्थिति की जानकारी तत्काल सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय) चाईबासा एवं हजारीबाग को दी जाएगी।

“औद्योगिक शांति बनाए रखना हमारी प्राथमिकता”
केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे और महामंत्री राजेन्द्र सिंधिया ने संयुक्त रूप से कहा कि यूनियन न्यायालय और श्रम कानूनों का पूरा सम्मान करती है। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन भी कानून का पालन करे तो खदानों में औद्योगिक शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहेगा।
15 जून की सुनवाई पर टिकी सबकी नजर
यूनियन ने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से जुड़े मामले की अगली सुनवाई 15 जून को सीजीआईटी कोर्ट में होनी है। इसलिए सभी पक्षों को न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए और तब तक किसी भी प्रकार का एकतरफा कदम उठाने से बचना












