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तीन दशक का आतंक खत्म! एक करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा धनबाद से गिरफ्तार, सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी कामयाबी

On: July 28, 2026 11:56 PM
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कोल्हान से धनबाद तक बिछा जाल, गिरिडीह भागने की कोशिश में धरा गया शीर्ष नक्सली

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

तीन दशकों से झारखंड, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल की पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना एक करोड़ रुपये का इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा आखिरकार सुरक्षा बलों के शिकंजे में आ गया है। गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद गोपनीय, सुनियोजित और रणनीतिक अभियान चलाकर धनबाद के मनियाडीह थाना क्षेत्र से पिकअप वाहन से गिरिडीह जाने के दौरान मिसिर बेसरा, उसके करीबी सहयोगी मेहनत उर्फ मोछू, गौरव हंसदा तथा अन्य नक्सली साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल सभी को एक गुप्त स्थान पर रखकर विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा एजेंसियां गहन पूछताछ कर रही हैं।
यदि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि होती है तो इसे झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता माना जाएगा। वर्षों से सुरक्षा बल जिस माओवादी कमांडर की तलाश में जंगल-जंगल भटक रहे थे, वह अब कानून के शिकंजे में है।

30 वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए बना रहा सबसे बड़ा सिरदर्द

मिसिर बेसरा का नाम सुनते ही सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ जाती थीं। तीन दशक से अधिक समय तक उसने झारखंड के सारंडा, कोल्हान, पोड़ाहाट, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, लातेहार, पलामू, चतरा और ओडिशा के सीमावर्ती जंगलों में अपना प्रभाव कायम रखा। वह हर बड़े ऑपरेशन के बाद ठिकाना बदल देता था और सुरक्षा बलों को लगातार चकमा देता रहा।
कोल्हान के घने जंगल उसकी सबसे सुरक्षित शरणस्थली माने जाते थे। यही कारण था कि उसके खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए गए, लेकिन हर बार वह बच निकलने में सफल रहा।

धनबाद के रास्ते गिरिडीह भागने की थी तैयारी

सूत्रों के अनुसार, पिछले कई महीनों से कोल्हान में सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण माओवादी नेटवर्क पूरी तरह कमजोर पड़ चुका था। बड़ी संख्या में नक्सलियों के मारे जाने, गिरफ्तार होने और आत्मसमर्पण करने के बाद मिसिर बेसरा लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था।
खुफिया एजेंसियों को सटीक सूचना मिली कि वह अपने भरोसेमंद सहयोगियों के साथ धनबाद के रास्ते गिरिडीह की ओर निकलने वाला है। सूचना मिलते ही केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रणनीति तैयार की। पूरे इलाके में निगरानी बढ़ाई गई और आखिरकार एक सटीक कार्रवाई में उसे उसके साथियों सहित गिरफ्तार कर लिया गया।

कौन है मिसिर बेसरा?

मिसिर बेसरा प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व का सदस्य है। वह संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और केंद्रीय मिलिट्री कमीशन का वर्तमान प्रमुख तथा सैन्य रणनीति तैयार करने वाले प्रमुख नेताओं में उसकी गिनती होती रही है।
झारखंड में सक्रिय माओवादी नेतृत्व में उसका नाम सबसे ऊपर लिया जाता था। संगठन के विस्तार, हथियारों की आपूर्ति, प्रशिक्षण, लेवी वसूली और सुरक्षा बलों पर हमलों की रणनीति बनाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती रही है।

दर्जनों खूनी वारदातों का मास्टरमाइंड

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मिसिर बेसरा पर कई राज्यों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
* सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमले।
* आईईडी विस्फोट।
* पुलिस जवानों की हत्या।
* हथियार लूट की घटनाएं।
* सरकारी विकास कार्यों में बाधा।
* ठेकेदारों और कारोबारियों से लेवी वसूली।
* पुलिस कैंपों पर हमले की साजिश।
उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या दर्जनों में बताई जाती है।

सारंडा/कोल्हान बना था उसका सबसे मजबूत गढ़

एक समय ऐसा था जब सारंडा/कोल्हान के घने जंगलों में मिसिर बेसरा का प्रभाव सबसे अधिक माना जाता था। जंगल के अंदर उसका नेटवर्क इतना मजबूत था कि सुरक्षा बलों की गतिविधियों की जानकारी उसे पहले ही मिल जाती थी।
ग्रामीणों के बीच भय का माहौल था। विकास योजनाएं प्रभावित होती थीं और कई इलाकों में सरकारी कामकाज तक ठप हो जाता था।

सारंडा/कोल्हान अभियान ने तोड़ दी माओवादी ताकत

पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने सारंडा/कोल्हान क्षेत्र में लगातार बड़े अभियान चलाए। जंगलों में स्थापित अस्थायी ठिकानों को ध्वस्त किया गया। बड़ी मात्रा में विस्फोटक, हथियार और दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद हुई।
इन अभियानों के कारण माओवादी संगठन का नेटवर्क लगातार कमजोर होता गया। कई इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि कई गिरफ्तार हुए, दर्जनों मारे गए। इसी दबाव का असर मिसिर बेसरा पर भी पड़ा और वह लगातार ठिकाना बदलने को मजबूर हो गया।

15 दिन पहले चाईबासा के मुरूम्बुरा में मिला था इनपुट

खुफिया सूत्रों के अनुसार लगभग 15 दिन पहले मिसिर बेसरा की लोकेशन चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र स्थित मुरूम्बुरा गांव के पास पहाड़ी इलाके में मिली थी। उसके साथ 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली वीरेंद्र हांसदा तथा मेहनत उर्फ मोछू भी मौजूद थे।
इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में निगरानी और तेज कर दी। माना जा रहा है कि लगातार दबाव के कारण उसने जंगल छोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही उसकी गतिविधियों पर नजर रखी हुई थी।

जब बेटे ने की थी पिता से आत्मसमर्पण की अपील

मिसिर बेसरा के जीवन का एक भावुक पहलू भी सामने आया था। कुछ समय पहले उसका बेटा सारंडा पहुंचा था और उसने सार्वजनिक रूप से अपने पिता से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की थी।
उसने कहा था कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना ही बेहतर भविष्य का रास्ता है। सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने भी उस समय इसे सकारात्मक पहल माना था और उम्मीद जताई थी कि मिसिर बेसरा आत्मसमर्पण करेगा।
हालांकि उसने उस अपील पर ध्यान नहीं दिया और वर्षों तक जंगलों में सक्रिय रहा। अब अंततः वह गिरफ्तारी के बाद कानून की गिरफ्त में है।

एक करोड़ का इनाम क्यों रखा गया था?

मिसिर बेसरा की गतिविधियों, संगठन में उसकी भूमिका और कई राज्यों में वांछित होने के कारण उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था। वह देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल था।
उसकी गिरफ्तारी लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता में शामिल थी।

पूरे नेटवर्क का खुल सकता है राज

सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी। माना जा रहा है कि—
* माओवादी संगठन के शेष नेटवर्क,
* हथियारों के ठिकाने,
* विस्फोटकों के भंडार,
* लेवी वसूली के तंत्र,
* सहयोगियों और संपर्क सूत्रों
से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

झारखंड में माओवादी आंदोलन लगभग खत्म!

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि होती है तो यह झारखंड में माओवादी आंदोलन के लिए सबसे बड़ा झटका अर्थात खत्म होगा। वह केवल एक कमांडर नहीं बल्कि रणनीतिक योजनाकार माना जाता था।
उसकी गिरफ्तारी से संगठन लगभग खत्म हो जाएगा।

सुरक्षा बलों की वर्षों की मेहनत लाई रंग

झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), कोबरा बटालियन और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पिछले कई वर्षों से लगातार संयुक्त अभियान चला रही थीं। आधुनिक तकनीक, सटीक खुफिया सूचना और बेहतर समन्वय के कारण माओवादी संगठन लगातार कमजोर होता गया।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी इसी लंबी रणनीति का परिणाम मानी जा रही है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

हालांकि अब तक सुरक्षा एजेंसियों की ओर से गिरफ्तारी की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार मिसिर बेसरा और उसके सहयोगी सुरक्षा बलों की गिरफ्त में हैं तथा उनसे गहन पूछताछ जारी है। माना जा रहा है कि पूछताछ पूरी होने के बाद एजेंसियां पूरे अभियान का आधिकारिक खुलासा कर सकती हैं।

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