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25 लाख का इनामी नक्सली अजय महतो गिरफ्तार:

On: July 18, 2026 11:13 PM
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पारसनाथ से सारंडा तक लाल आतंक का अंत, 100 से ज्यादा मामलों का आरोपी पुलिस के शिकंजे में

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का सक्रिय सदस्य और 25 लाख रुपये का इनामी हार्डकोर नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। वर्षों तक पारसनाथ पहाड़ी से लेकर सारंडा के घने जंगलों तक आतंक का पर्याय बने अजय महतो को पुलिस ने हरलाडीह में छापेमारी कर गिरफ्तार किया। उसके साथ दो अन्य नक्सलियों को भी दबोचा गया है।

करीब दो दशक तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने अजय महतो पर हत्या, पुलिस पर हमला, आईईडी विस्फोट, रंगदारी, लेवी वसूली, यूएपीए, आर्म्स एक्ट और देशद्रोह सहित 100 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी को झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जा रहा है।

हरलाडीह में गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई

पुलिस सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को गुप्त सूचना मिली थी कि हरलाडीह गांव में करमू मांझी के घर कुछ लोग ठहरे हुए हैं। इनमें एक व्यक्ति वासुदेव नाम से रह रहा था। खुफिया एजेंसियों ने पुष्टि की कि वासुदेव कोई और नहीं बल्कि 25 लाख का इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर है।

सूचना मिलते ही पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर छापेमारी की। कार्रवाई इतनी सटीक और गोपनीय थी कि अजय महतो को भागने का मौका तक नहीं मिला। उसके साथ दो अन्य माओवादी भी गिरफ्तार किए गए।

पारसनाथ पहाड़ी का सबसे बड़ा नक्सली चेहरा

गिरफ्तार अजय महतो गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड का रहने वाला है। पारसनाथ पहाड़ी के तराई क्षेत्र में पला-बढ़ा अजय इलाके के चप्पे-चप्पे से परिचित था। यही वजह रही कि उसने वर्षों तक पारसनाथ के जंगलों को नक्सली गतिविधियों का सुरक्षित ठिकाना बनाए रखा।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसे पकड़ना आसान नहीं था। इलाके की भौगोलिक जानकारी और स्थानीय नेटवर्क के कारण वह लगातार पुलिस को चकमा देता रहा।

सारंडा में भी आतंक का पर्याय बना टाइगर

सिर्फ पारसनाथ ही नहीं, अजय महतो ने पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगलों में भी लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों का संचालन किया। देश के सबसे घने जंगलों में शामिल सारंडा में उसने आईईडी बिछाने, सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला करने और हथियारों की सप्लाई का पूरा नेटवर्क तैयार किया।

वह सुरक्षा बलों की हर गतिविधि पर नजर रखता था और रणनीति बनाकर जवानों को निशाना बनाता था। यही कारण है कि सारंडा क्षेत्र में हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं में उसका नाम सामने आया।

आईईडी विशेषज्ञ के रूप में थी पहचान

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक अजय महतो संगठन का सबसे प्रशिक्षित आईईडी विशेषज्ञ था। जंगलों, पहाड़ियों और कच्ची सड़कों में विस्फोटक लगाने की उसकी रणनीति बेहद खतरनाक मानी जाती थी।

कई बार जवान सर्च अभियान के दौरान उसके लगाए आईईडी की चपेट में आए। अनेक जवान घायल हुए जबकि कई ने शहादत दी। यही वजह थी कि माओवादी संगठन में उसकी अलग पहचान थी।

100 से अधिक मामलों में था वांछित

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अजय महतो के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, पुलिस पर हमला, विस्फोट, लेवी वसूली, रंगदारी, यूएपीए, आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत 100 से अधिक मामले दर्ज हैं।

झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा की पुलिस भी उसकी तलाश में लगी हुई थी।

2020 में देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मिली थी मंजूरी

वर्ष 2020 में राज्य सरकार ने अजय महतो समेत कई हार्डकोर नक्सलियों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।

उसी वर्ष गोईलकेरा के कुईड़ा चौक पर पुलिस मुखबिरी के आरोप में ग्रामीण राजकिशोर गोप की हत्या और वन विभाग कार्यालय को आईईडी से उड़ाने तथा सरकारी वाहनों में आग लगाने की घटनाओं में भी उसकी भूमिका सामने आई।

2021 में लगातार किए बड़े हमले

वर्ष 2021 में अजय महतो ने कई बड़े नक्सली हमलों की साजिश रची।

* फरवरी में जगेश्वर बिहार क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान सीआरपीएफ जवान घायल हुए।

* मार्च में टोकलो थाना क्षेत्र के लांजी जंगल में आईईडी विस्फोट में झारखंड जगुआर के तीन जवान शहीद हो गए जबकि कई अन्य घायल हुए।

* जून में रेगेंडाहातु जंगल में कोबरा बटालियन के साथ मुठभेड़ में भी उसने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

2022 में भी जारी रहा खूनी खेल

वर्ष 2022 में टोंटो और गोईलकेरा क्षेत्र में कई मुठभेड़ हुईं।

* लोवाबेड़ा के पास हुई मुठभेड़ में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए।

* रेंगड़ा क्षेत्र में सर्च अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट में कोबरा बटालियन के निरीक्षक प्रभाकर साहनी घायल हो गए।

2023 बना सबसे खूनी साल

2023 अजय महतो के लिए सबसे सक्रिय और खूनी वर्ष माना जाता है।

* जनवरी में तुम्बाहाका जंगल में दो दिनों तक चली मुठभेड़ के दौरान आईईडी विस्फोट में कोबरा बटालियन के नौ जवान घायल हुए।

* फरवरी में मेरालगढ़ा क्षेत्र में तीन जवान घायल हुए।

* मार्च में विस्फोटक भंडार लूटने की घटना में भी उसका नाम सामने आया।

* अगस्त 2023 में टोंटो के तुम्बाहाका पहाड़ी पर हुई मुठभेड़ में झारखंड जगुआर के सब-इंस्पेक्टर अमित तिवारी और आरक्षी गौतम कुमार शहीद हो गए।

* अक्टूबर में हाथीबुरू क्षेत्र में स्पाइक होल विस्फोट में सीआरपीएफ अधिकारी घायल हुए।

2024 में भी नहीं थमी हिंसा

* फरवरी 2024 में पुलिस मुखबिरी के आरोप में दो ग्रामीणों की हत्या कर दी गई।

* सितंबर में तिरिलपोसी जंगल में आईईडी विस्फोट में कोबरा बटालियन का बम निरोधक जवान गंभीर रूप से घायल हुआ।

2025 में लगातार हुए आईईडी हमले

* मार्च 2025 में बाबूडेरा, तिरिलपोसी और मारंगपोंगा जंगलों में आईईडी विस्फोट हुए जिनमें कई सीआरपीएफ जवान घायल हुए जबकि एसआई सुनील कुमार मंडल शहीद हो गए।

* अप्रैल में राधापोड़ा जंगल में झारखंड जगुआर के जवान सुनील धान शहीद हुए।

* रेड़ा-समठा जंगल में एक और विस्फोट में सीआरपीएफ जवान घायल हुआ।

* मई में तिरिलपोसी जंगल में मुठभेड़ के बाद हुए विस्फोट में कोबरा बटालियन का डॉग हैंडलर घायल हुआ जबकि एक ग्रामीण की जान चली गई।

* अक्टूबर में समठा वन क्षेत्र में आईईडी विस्फोट में कोबरा बटालियन का प्रशिक्षित डॉग शहीद हो गया।

2026 में भी सक्रिय था नेटवर्क

* मार्च 2026 में मारंगपोंगा और किनबीर जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ हुई।

* इसके बाद आईईडी विस्फोट में कोबरा 209 बटालियन के सहायक कमांडेंट अजय मल्लिक और हवलदार संजय कुमार घायल हो गए।

* इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसके खिलाफ अभियान और तेज कर दिया।

मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी

अजय महतो को माओवादी संगठन के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा का बेहद करीबी माना जाता था।

वह संगठन के लिए हथियार, विस्फोटक, कैडर संचालन, लेवी वसूली और नए सदस्यों की भर्ती जैसे अहम कार्य संभालता था।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक संगठन की कई रणनीतिक बैठकों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी।

पूछताछ से खुल सकते हैं कई बड़े राज

पुलिस फिलहाल अजय महतो से गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही है।

जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क, हथियारों के भंडार, आईईडी मॉड्यूल, लेवी वसूली तंत्र और संगठन के सक्रिय कैडरों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

संभावना है कि पूछताछ में कई और बड़े माओवादी नेताओं और नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

नक्सल विरोधी अभियान को मिली बड़ी सफलता

झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों का मानना है कि अजय महतो की गिरफ्तारी माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है।

पारसनाथ, सारंडा, कोल्हान, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और पश्चिमी सिंहभूम में सक्रिय माओवादी नेटवर्क अब कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार अभियान, आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया तंत्र और सुरक्षा बलों के समन्वय ने नक्सल संगठन की कमर तोड़ दी है।

झारखंड में नक्सलवाद के अंत की ओर बड़ा कदम

एक समय था जब अजय महतो का नाम सुनते ही ग्रामीणों में दहशत फैल जाती थी। पारसनाथ की पहाड़ियों से लेकर सारंडा के जंगलों तक उसका आतंक कायम था। लेकिन अब उसकी गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि झारखंड में नक्सलवाद अपने सबसे कमजोर दौर में पहुंच चुका है।

25 लाख के इनामी इस हार्डकोर माओवादी का गिरफ्तार होना केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों के लंबे संघर्ष, रणनीतिक अभियान और लगातार दबाव का परिणाम है। अब पुलिस को उम्मीद है कि अजय महतो से मिली जानकारी के आधार पर माओवादी संगठन के बचे हुए नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकेगा।

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