सारंडा-कोल्हान के कई इनामी उग्रवादियों के सरेंडर की चर्चा, पुलिस मुख्यालय में बढ़ी हलचल
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच राजधानी रांची स्थित झारखंड पुलिस मुख्यालय में 21 मई को होने वाले बड़े आत्मसमर्पण कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। पुलिस मुख्यालय परिसर में मंच निर्माण, टेंट लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। पूरे पुलिस महकमे में इस कार्यक्रम को लेकर भारी हलचल देखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, 20 से अधिक नक्सली अत्याधुनिक AK-47 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट सकते हैं। बताया जा रहा है कि आत्मसमर्पण करने वालों में कई इनामी और लंबे समय से सक्रिय उग्रवादी भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि अब तक पुलिस की ओर से आधिकारिक रूप से नक्सलियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट से जुड़े बड़े नाम आने की चर्चा
सूत्रों के हवाले से खबर है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट जंगल क्षेत्र में सक्रिय कुछ बड़े नक्सली कमांडर भी शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह झारखंड पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए नक्सल उन्मूलन अभियान में बड़ी सफलता मानी जाएगी।
पिछले कुछ महीनों में पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और आसपास के जंगलों में सुरक्षाबलों ने लगातार अभियान चलाकर नक्सलियों के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। जंगलों में चल रहे कॉम्बिंग ऑपरेशन, हथियार बरामदगी और लगातार बढ़ते दबाव के कारण कई नक्सली संगठन कमजोर पड़े हैं।
नक्सलवाद के खिलाफ बड़ा संदेश
यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को नई मजबूती देगा। लगातार अभियान और विकास योजनाओं के कारण अब कई नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं तथा उग्रवादी मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सारंडा और कोल्हान क्षेत्र के सक्रिय कमांडर आत्मसमर्पण करते हैं तो इसका असर पूरे नक्सली नेटवर्क पर पड़ सकता है। इससे जंगल क्षेत्रों में शांति बहाली और विकास कार्यों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
नामों को लेकर बना सस्पेंस
हालांकि अब तक आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। यही वजह है कि पुलिस महकमे से लेकर कोल्हान क्षेत्र तक इस कार्यक्रम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर कौन-कौन से बड़े नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने जा रहे हैं।













