जलमीनार चालू, लेकिन वार्ड 7 से 10 तक नहीं पहुंच रहा पानी; मरम्मत के नाम पर वसूली के आरोप, अब आंदोलन की चेतावनी
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम के बड़ाजामदा में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने सैकड़ों परिवारों का जीवन संकट में डाल दिया है। फुटबॉल मैदान और काली मंदिर एरिया के आसपास रहने वाले लोग पिछले लगभग चार महीनों से जलमीनार से होने वाली पानी सप्लाई से पूरी तरह वंचित हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जलापूर्ति योजना सिर्फ दिखावे की बनकर रह गई है। वार्ड नंबर 7, 8, 9 और 10 के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा, जबकि अन्य इलाकों में नियमित रूप से सप्लाई दी जा रही है। इससे प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश है।

15 मार्च को दिया था आवेदन, फिर भी नहीं जागा प्रशासन
इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने बीते 15 मार्च को मुखिया पार्वती देवी को लिखित आवेदन सौंपकर तत्काल समाधान की मांग की थी। आवेदन में स्पष्ट कहा गया था कि जलमीनार से इन वार्डों में पानी की सप्लाई बंद है और लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं। बावजूद इसके आज तक न तो कोई स्थायी मरम्मत हुई और न ही जलापूर्ति बहाल हो सकी।
ग्रामीणों का कहना है कि आवेदन देने के बाद सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब लोगों का गुस्सा फूटने लगा है।
“कभी पाइप फटा, कभी वाल्व खराब” — बहानों से उबल रहे लोग
बड़ाजामदा निवासी मदन गुप्ता ने पंचायत व्यवस्था और जलापूर्ति तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार नया बहाना बनाकर लोगों को टरकाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कभी कहा जाता है पाइप फट गया है, तो कभी वाल्व खराब होने की बात कही जाती है।
मदन गुप्ता ने कहा कि जिस पाइप के फटे होने की बात कही जा रही थी, उसे महीनों पहले ही बालाजी कंपनी द्वारा ठीक कराया जा चुका है। इसके बावजूद आज तक पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई। इससे साफ है कि कहीं न कहीं भारी लापरवाही या खेल चल रहा है।
मरम्मत के नाम पर वसूली, फिर भी सूखे पड़े नल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर लोगों से पैसे भी वसूले गए। मदन गुप्ता ने बताया कि उन्होंने खुद मरम्मत के लिए 5 हजार रुपए दिए थे। इसके बावजूद पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जब जनता से पैसा लिया गया, तो उसका उपयोग कहां हुआ? यदि मरम्मत हो चुकी है तो फिर सप्लाई बंद क्यों है? इस पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ता जा रहा है।

गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
भीषण गर्मी के बीच बड़ाजामदा के प्रभावित इलाकों में हालात बेहद खराब हो चुके हैं। महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी ढोना पड़ रहा है। कई परिवार निजी साधनों से पानी खरीदने को मजबूर हैं। गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के लिए यह संकट अब आर्थिक बोझ भी बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार हर घर जल पहुंचाने के दावे कर रही है, तब बड़ाजामदा के लोग चार महीने से सूखे नल देखकर प्रशासनिक दावों पर सवाल उठा रहे हैं।
“अब सड़क पर उतरेंगे” — आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द जलापूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। लोगों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को बार-बार सूचना देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों पर कार्रवाई करने और बंद पड़ी जलापूर्ति व्यवस्था को जल्द शुरू कराने की मांग की है। बड़ाजामदा में बढ़ता जल संकट अब जनआक्रोश का रूप लेता जा रहा है।














