चार पीढ़ियों से श्मशान होने का दावा, दूसरे पक्ष ने दिखाए रजिस्ट्री कागजात
गुवा संवाददाता।
बड़ाजामदा फुटबॉल मैदान के समीप स्थित जमीन को लेकर शुक्रवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शिकायत लेकर बड़ाजामदा थाना पहुंच गए। विवादित जमीन को लेकर एक ओर हो आदिवासी समाज ने इसे वर्षों पुराना श्मशान घाट बताया, वहीं दूसरे पक्ष ने इसे अपनी पुश्तैनी रैयती जमीन बताते हुए वैध दस्तावेज होने का दावा किया।

बुलडोजर पहुंचते ही भड़का विवाद
जानकारी के अनुसार विवाद तब शुरू हुआ जब एक पक्ष द्वारा जमीन की साफ-सफाई के लिए बुलडोजर चलाया जा रहा था। इसी दौरान स्थानीय ग्रामीणों और हो आदिवासी समाज के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि उक्त भूमि पर उनके पूर्वजों का अंतिम संस्कार और दफनाने का कार्य चार पीढ़ियों से होता आ रहा है। ऐसे में श्मशान घाट की जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप था कि जमीन को निजी संपत्ति बताकर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। महिलाओं समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य रुकवा दिया। कुछ समय के लिए स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।
“यह हमारी पुश्तैनी जमीन है” — मनोज वर्मा
दूसरे पक्ष के मनोज वर्मा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विवादित भूमि कुल एक एकड़ 19 डिसमिल है और यह उनके पूर्वजों की पुश्तैनी जमीन है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1976 में जमीन की विधिवत रजिस्ट्री कराई गई थी और तब से लगातार मालगुजारी टैक्स जमा किया जा रहा है।
मनोज वर्मा के अनुसार उनके पास जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री कागजात और राजस्व रिकॉर्ड मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जमीन की बंदोबस्ती के लिए मापी कराई गई थी और इसके बाद बाउंड्री वॉल निर्माण की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि हो आदिवासी समाज के कुछ लोगों ने बड़ाजामदा मुखिया दिगंबर चातोम्बा की अध्यक्षता में ग्रामसभा कर उनकी जमीन को सामुदायिक भूमि घोषित करने का प्रयास किया है।

“जमीन नहीं छोड़ेंगे, कोर्ट तक जाएंगे”
मनोज वर्मा ने साफ कहा कि वे किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं और यदि जरूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना था कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने और राजस्व अभिलेखों के आधार पर निर्णय लेने की मांग की।
थाना पहुंचा मामला, पुलिस ने दी शांति बनाए रखने की सलाह
विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्ष बड़ाजामदा थाना पहुंचे, जहां पुलिस ने दोनों की बातें सुनीं। थाना पुलिस ने प्रथम दृष्टया मामले को राजस्व विभाग से जुड़ा विवाद बताते हुए दोनों पक्षों को अंचल अधिकारी के समक्ष लिखित आवेदन देने की सलाह दी।
पुलिस ने स्पष्ट कहा कि जमीन का अंतिम निर्णय राजस्व विभाग और संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही होगा। साथ ही दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने, किसी प्रकार की मारपीट या कानून हाथ में नहीं लेने की चेतावनी दी गई।
फुटबॉल मैदान के आसपास बढ़ा तनाव
स्थानीय लोगों का कहना है कि फुटबॉल मैदान के आसपास की जमीन को लेकर पहले भी कई बार विवाद की स्थिति बन चुकी है। क्षेत्र में तेजी से जमीन की कीमत बढ़ने और कब्जे के आरोपों के कारण अक्सर तनाव की स्थिति पैदा होती रहती है।
ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द जमीन की मापी, रिकॉर्ड सत्यापन और कानूनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या से बचा जा सके।

प्रशासनिक जांच पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल मामला शांत जरूर हो गया है, लेकिन जमीन को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं। अब पूरे मामले में प्रशासन और राजस्व विभाग की जांच पर सभी की नजर टिकी हुई है। यदि समय रहते निष्पक्ष समाधान नहीं निकाला गया तो यह विवाद आगे और बड़ा रूप ले सकता है।













