बालिबा कैंप से खुला मोर्चा, मिसिर बेसरा को सरेंडर या अंजाम भुगतने का अल्टीमेटम
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
नक्सल प्रभावित सारंडा के घने जंगलों में अब निर्णायक टकराव की आहट साफ सुनाई देने लगी है। 18 अप्रैल को सीआरपीएफ के स्पेशल डायरेक्टर जनरल (SDG) दीपक कुमार ने हेलिकॉप्टर से सीधे बालिबा कैंप पहुंचकर नक्सलियों के खिलाफ खुला ऐलान कर दिया—“एक माह के भीतर सारंडा को नक्सल मुक्त कर देंगे।”
यह बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि आने वाले बड़े ऑपरेशन की रणनीतिक भूमिका है, जो अब अंतिम चरण में प्रवेश करती दिख रही है।

हेलिकॉप्टर से पहुंचे SDG, अधिकारियों के साथ हाई-लेवल मंथन
दोपहर में हेलिकॉप्टर से पहुंचे SDG दीपक कुमार का स्वागत बालिबा स्थित सीआरपीएफ 193 बटालियन कैंप में किया गया। इस दौरान कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें आईजी साकेत कुमार, एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे, डीआईजी रांची सतीश लिंडा, सीआरपीएफ डीआईजी विनोद कार्तिक, कमांडेंट ओम जी शुक्ला, द्वितीय कमान अधिकारी (अभियान) उमेश कुमार, एसपी अमित रेनू और मनोहरपुर डीएसपी जयदीप लकड़ा शामिल थे।
करीब दो घंटे तक कैंप में चली इस बैठक में आगामी ऑपरेशन की रणनीति, फोर्स की तैनाती और नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की गई।
मिसिर बेसरा पर सीधा वार—“सरेंडर करो, नहीं तो मारे जाओगे”
मीडिया से बातचीत के दौरान SDG दीपक कुमार ने सीधे तौर पर नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा—
“मिसिर बेसरा एक करोड़ का इनामी नक्सली है और अपनी टीम के साथ सारंडा में सक्रिय है। हम चाहते हैं कि वह अपने साथियों और हथियारों के साथ सरेंडर कर दे। वह हमारे देश का लड़का है, हम नहीं चाहते कि वह मारा जाए।”
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि अगर सरेंडर नहीं होता है तो एक महीने के भीतर मुठभेड़ में उसका खात्मा तय है।
यह बयान नक्सलियों के लिए सीधी चुनौती है—या तो हथियार डालो या फिर निर्णायक कार्रवाई के लिए तैयार रहो।
“ऑपरेशन अब और तेज होगा”—रणनीति में बदलाव के संकेत
SDG ने संकेत दिए कि अब तक चल रहे ऑपरेशन को और अधिक आक्रामक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा—
* नक्सलियों की ओर से सरेंडर का कोई संकेत नहीं आया है
* सुरक्षा बल अब “इंतजार” की स्थिति में नहीं हैं
* आने वाले दिनों में ऑपरेशन की गति और तीव्रता दोनों बढ़ाई जाएगी
इससे साफ है कि सारंडा में अब “सर्च एंड डेस्ट्रॉय” मोड में कार्रवाई होने जा रही है।
हालिया मुठभेड़ों का जिक्र, बढ़ा जवानों का मनोबल
SDG दीपक कुमार ने हाल ही में झारखंड में हुई मुठभेड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि चार नक्सलियों को मार गिराना बड़ी सफलता थी। इनमें शहदेव महतो और नताशा जैसे सक्रिय नक्सली शामिल थे। साथ ही चार हथियारों की बरामदगी भी सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि रही।
उन्होंने कहा कि इन सफलताओं ने जवानों का मनोबल बढ़ाया है और अब इसी जोश के साथ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जवानों का हौसला बढ़ाने पहुंचे, जमीनी हालात का लिया जायजा
बालिबा कैंप पहुंचने का मुख्य उद्देश्य सिर्फ रणनीति बनाना नहीं, बल्कि जवानों का मनोबल बढ़ाना भी था। SDG ने जवानों से सीधा संवाद किया और उन्हें आगामी ऑपरेशन के लिए तैयार रहने को कहा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सारंडा ऑपरेशन अब निर्णायक मोड़ पर है और इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
मुठभेड़ का ताजा जख्म—15 अप्रैल को बेसरा का बच निकलना
उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल को बालिबा के पास ही जंगल में पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान:
* मिसिर बेसरा का दस्ता घिर चुका था
* लेकिन घने जंगल का फायदा उठाकर वह भाग निकला
* मुठभेड़ में पांच जवान घायल हो गए
यह घटना सुरक्षा बलों के लिए चुनौती जरूर बनी, लेकिन अब यह साफ है कि उसका बदला लेने और मिशन को पूरा करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

हेलीपैड पर स्वास्थ्य संकट, सात जवानों को एयरलिफ्ट किया गया
इस दौरान एक मानवीय पहलू भी सामने आया। हेलीपैड पर कोबरा 205 बटालियन का एक जवान अचानक मूर्छित होकर गिर पड़ा। इसके अलावा कुल सात बीमार जवानों को तत्काल उसी हेलिकॉप्टर से रांची भेजा गया।
यह घटना दिखाती है कि जंगल में ऑपरेशन जितना खतरनाक है, उतना ही कठिन भी—जहां जवान हर मोर्चे पर संघर्ष कर रहे हैं।
सारंडा में निर्णायक जंग का काउंटडाउन शुरू
SDG दीपक कुमार के इस दौरे और बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि:
* सारंडा में नक्सलियों के खिलाफ अब अंतिम चरण की लड़ाई शुरू हो चुकी है
* मिसिर बेसरा और उसका नेटवर्क सुरक्षा बलों के निशाने पर है
अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या नक्सली सरेंडर का रास्ता चुनते हैं या फिर सारंडा के जंगल एक और बड़े मुठभेड़ के गवाह बनेंगे।
संदेश साफ है—अब नहीं बख्शे जाएंगे नक्सली
सारंडा के जंगलों से उठी यह चेतावनी पूरे नक्सल नेटवर्क के लिए है—
“सरेंडर करो या खत्म हो जाओ।”
और इस बार सुरक्षा बलों का इरादा साफ है—
नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया।













