रोजगार, समान वेतन और बहाली में स्थानीय प्राथमिकता को लेकर प्रबंधन से सीधी टक्कर
जनरल ऑफिस के सामने दर्जनों युवाओं का जुटान, प्रबंधन पर दबाव
रिपोर्ट: शैलेश सिंह/संदीप गुप्ता
सारंडा क्षेत्र के गुवा में शुक्रवार शाम करीब पांच बजे उस वक्त माहौल गरमा गया, जब 18 गांवों के बेरोजगार युवक-युवतियां रोजगार की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए।
सेल प्रबंधन के जनरल ऑफिस के समक्ष आयोजित इस जोरदार प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, ठेका मजदूर और बेरोजगार युवा शामिल हुए।
यह प्रदर्शन सारंडा पीढ़ मानकी लागुड़ा देवगम की अध्यक्षता में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन और विभिन्न गांवों के मुंडा-मानकी के संयुक्त नेतृत्व में किया गया।

प्रदर्शन के बाद प्रबंधन के साथ अहम बैठक
प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने सेल प्रबंधन के अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा।
बैठक में बेरोजगार युवाओं और मजदूरों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया, जो लंबे समय से क्षेत्र में असंतोष का कारण बने हुए हैं।
रोजगार से लेकर वेतन तक—ये हैं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों और यूनियन प्रतिनिधियों ने प्रबंधन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं:
* 18 गांवों के स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए
* गुवा सेल में कार्यरत ठेका मजदूरों को “समान कार्य के लिए समान वेतन” लागू किया जाए
* ठेका मजदूरों की बहाली प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए
* बाहरी क्षेत्रों—किरीबुरू, बड़ाजामदा, नोवामुंडी, झिंकपानी आदि—से हुए नियुक्तियों को निरस्त कर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए
* रिट्रेंचमेंट (छंटनी) के बकाया भुगतान को अविलंब किया जाए
प्रबंधन ने मांगा समय, सोमवार को त्रिपक्षीय वार्ता का आश्वासन
ग्रामीणों की मांगों को सुनने के बाद सेल प्रबंधन ने सभी बिंदुओं पर विचार के लिए दो दिनों का समय मांगा।
प्रबंधन की ओर से आश्वासन दिया गया कि सोमवार को 18 गांवों के मुंडा-मानकी को आमंत्रित कर एक त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।
इसके साथ ही प्रबंधन ने यह भी कहा कि:
* बहाली प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने पर विचार किया जाएगा
* बाहरी लोगों की नियुक्ति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी
* समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने की दिशा में पहल की जाएगी
“अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस निर्णय चाहिए” – यूनियन की चेतावनी
बैठक के बाद झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन और मुंडा-मानकी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा कि यदि सोमवार तक मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया, तो 21 अप्रैल को चाईबासा स्थित एएलसी (Assistant Labour Commissioner) कार्यालय में त्रिपक्षीय बैठक की जाएगी।
इसके बाद भी समाधान नहीं निकला, तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी।
स्थानीय नेतृत्व की मजबूत उपस्थिति
इस आंदोलन में क्षेत्रीय नेतृत्व की मजबूत भागीदारी देखने को मिली।
मौके पर सारंडा पीढ़ मानकी लागुड़ा देवगम, जोजोगुटू गांव के मुंडा कानुराम देवगम, गुवासाई के मुंडा मंगल पूर्ति, ठाकुरा गांव के समाजसेवी प्रशांत चाम्पिया, बबलू चाम्पिया, यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे, महामंत्री अंतरयामी महाकुड़, राजेश यादव, संजू गोच्छाईत, रोहित पांडे, रितेश पाणिग्राही सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और मजदूर उपस्थित रहे।
आंदोलन का रुख हो सकता है और उग्र
गुवा क्षेत्र में लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल जैसे आंदोलनों से यह स्पष्ट हो गया है कि स्थानीय लोग अब अपने अधिकारों को लेकर किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
यदि प्रबंधन ने जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है, जिससे खनन कार्य और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।











