रिपोर्ट शैलेश सिंह
ऑनलाइन दवा बिक्री और कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा भारी डिस्काउंट के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एण्ड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर बुधवार 20 मई को आयोजित देशव्यापी केमिस्ट्स बंद का व्यापक असर पश्चिम सिंहभूम जिले में देखने को मिला। जिले के अधिकांश दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे आम मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सुबह से ही चाईबासा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, नोवामुंडी, जगन्नाथपुर, गुवा और आसपास के क्षेत्रों की दवा दुकानें बंद रहने के कारण मरीज दवा के लिए भटकते रहे। कई मरीज और उनके परिजन दवा दुकानों के बाहर पहुंचकर निराश होकर वापस लौट गए। खासकर बुजुर्ग, गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों और बच्चों के परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

जरूरी दवाओं के लिए भटके मरीज
दवा दुकानों के बंद रहने से अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को डॉक्टर की पर्ची मिलने के बाद भी दवाइयां नहीं मिल सकीं। कई लोगों ने इमरजेंसी दवाओं के लिए इधर-उधर तलाश की, लेकिन अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद मिलने से लोगों में नाराजगी भी देखी गई।
ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ आंदोलन
पश्चिम सिंहभूम केमिस्ट्स एण्ड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने बंद को सफल बताते हुए कहा कि यह आंदोलन दवा व्यवसाय और आम जनता की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। संगठन ने केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री से संबंधित जीएसआर 817 दिनांक 28 अगस्त 2018 को वापस लेने की मांग दोहराई।
संगठन का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अनियंत्रित दवा बिक्री से गलत दवा वितरण और नकली दवाओं का खतरा बढ़ रहा है। इसके साथ ही कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा भारी छूट देकर छोटे दवा दुकानदारों को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है।
नकली दवाओं पर जताई चिंता
दवा व्यवसायियों ने कोविड काल के दौरान जारी जीएसआर 220 दिनांक 26 मार्च 2020 को भी वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि नियमों में ढील के कारण नकली और संदिग्ध दवाओं का कारोबार बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए खतरा है।
इस आंदोलन का नेतृत्व जे.एस. शिंदे और राजीव सिंघल कर रहे हैं। वहीं जिले में आंदोलन को सफल बनाने में सतीश कुमार ठाकेर, रमेश खिरवाल और रितेश मुण्ड्रा सक्रिय












