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बायोमेट्रिक हाजिरी पर मजदूरों का बिगुल, बोले- “हाजिरी कटेगी तो कटे, नहीं झुकेंगे”

On: June 14, 2026 12:27 PM
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15 जून से सेल प्रबंधन की नई व्यवस्था के खिलाफ संयुक्त मोर्चा का ऐलान, टाइम ऑफिस बंद हुआ तो श्रमिक खुद बनाएंगे रजिस्टर, न्यायालय के फैसले तक नहीं मानेंगे बायोमेट्रिक नियम

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

सेल प्रबंधन द्वारा 15 जून से सभी खदानों में एक साथ बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू करने के फैसले के खिलाफ मजदूर संगठनों ने खुला मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सामुदायिक भवन, मेघाहातुबुरु में आयोजित विशेष बैठक में विभिन्न श्रमिक संगठनों ने एक सुर में घोषणा की कि न्यायालय का अंतिम आदेश आने तक कोई भी श्रमिक बायोमेट्रिक मशीन पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करेगा, चाहे प्रबंधन उसे अनुपस्थित घोषित कर दे या वेतन काटने जैसी कार्रवाई ही क्यों न कर दे।
संयुक्त मोर्चा की बैठक की अध्यक्षता दीपक राम ने की। बैठक में एटक, इंटक (चौबे एवं दुबे गुट), झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, भारतीय मजदूर संघ, झारखंड माइंस मजदूर यूनियन, एचएमएस, सीटू, ऑल झारखंड माइंस वर्कर्स यूनियन सहित कई श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे।

“मामला न्यायालय में, फिर इतनी जल्दबाजी क्यों?”

बैठक में यूनियन नेताओं ने कहा कि बायोमेट्रिक हाजिरी से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन है और 15 जून को ही इस पर सुनवाई भी निर्धारित है। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा इसे जबरन लागू करने की तैयारी श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी है।
नेताओं ने कहा कि जब तक न्यायालय का स्पष्ट आदेश नहीं आ जाता, तब तक पुरानी व्यवस्था के तहत टाइम ऑफिस में कार्ड पंचिंग और रजिस्टर के माध्यम से ही हाजिरी बनाई जाएगी।

“टाइम ऑफिस बंद किया तो वहीं बैठे रहेंगे मजदूर”

बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रबंधन ने 15 जून से सभी टाइम ऑफिस बंद करने और टाइम कीपरों को जनरल ऑफिस में रहने का मौखिक निर्देश दिया है। मेघाहातुबुरु खदान क्षेत्र में चार टाइम ऑफिस हैं, जहां तीनों पालियों के श्रमिक अपनी सुविधा के अनुसार हाजिरी बनाते हैं।
संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि टाइम ऑफिस बंद किए गए तो श्रमिक वहीं एकत्रित होकर अपने स्तर से रजिस्टर पर उपस्थिति दर्ज करेंगे, लेकिन किसी भी कीमत पर बायोमेट्रिक मशीन का उपयोग नहीं करेंगे।

“प्रबंधन की मनमानी नहीं चलेगी”

यूनियन नेताओं का कहना था कि श्रमिकों से संवाद किए बिना, उनकी राय जाने बिना और संभावित लाभ-हानि की जानकारी दिए बिना नई व्यवस्था थोपना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने आज तक किसी भी यूनियन से इस विषय पर औपचारिक बातचीत नहीं की। बायोमेट्रिक प्रणाली को लेकर श्रमिकों के कई सवाल हैं, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं दिया गया।

39 महीने का एरियर लंबित, लेकिन नए नियम लागू करने की जल्दबाजी

बैठक में प्रबंधन पर यह भी आरोप लगाया गया कि श्रमिकों की मूलभूत समस्याओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। 39 महीने का एरियर, पर्क्स, अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, बेहतर चिकित्सा सुविधा और अन्य लंबित मांगें वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, लेकिन प्रबंधन नए-नए आदेश लागू करने में लगा हुआ है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि उत्पादन की रीढ़ माने जाने वाले एमई ऑपरेटर और अन्य श्रमिकों की कई सुविधाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं। अब बायोमेट्रिक व्यवस्था के जरिए उन पर अतिरिक्त दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

“अनुपस्थित घोषित करने की धमकी से नहीं डरेंगे”

बैठक में यह भी कहा गया कि प्रबंधन की ओर से संदेश दिया जा रहा है कि जो कर्मचारी बायोमेट्रिक हाजिरी नहीं बनाएंगे, उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा। साथ ही प्रत्येक टाइम ऑफिस के पास तीन-तीन ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, जो पूरे घटनाक्रम पर नजर रखेंगे।
संयुक्त मोर्चा ने इसे भय का माहौल बनाने की कोशिश बताते हुए कहा कि श्रमिक किसी दबाव में नहीं आएंगे और पूरी एकजुटता के साथ अपना लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराएंगे।

छुट्टी का आवेदन कैसे होगा? श्रमिकों के सवालों का जवाब नहीं

यूनियन नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि टाइम ऑफिस बंद कर दिए जाएंगे तो श्रमिक छुट्टी के लिए आवेदन कैसे करेंगे? बायोमेट्रिक मशीन मेन गेट पर लगाने की पुरानी मांग का भी कोई समाधान नहीं किया गया है।
उनका कहना था कि बिना तैयारी और बिना संवाद के व्यवस्था लागू करने से श्रमिकों के बीच भ्रम और असंतोष बढ़ रहा है।

15 जून की रणनीति तय, सुबह 5:30 बजे पहुंचेंगे टाइम ऑफिस

संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दीपक राम ने कहा कि सभी यूनियनों के श्रमिक 15 जून को प्रथम पाली में सुबह 5:30 बजे अपने-अपने टाइम ऑफिस पहुंचेंगे। वे बायोमेट्रिक प्रणाली का शांतिपूर्ण विरोध करेंगे और पुरानी व्यवस्था के तहत ही उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करेंगे।
उन्होंने कहा,
“चाहे प्रबंधन हमारी हाजिरी काट दे, लेकिन हम बायोमेट्रिक मशीन पर हाजिरी नहीं बनाएंगे। हम सब मिलकर प्रबंधन की मनमानी और एकतरफा फैसलों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे।”
बैठक में संतोष कुमार पांडा, बीर सिंह मुंडा, इंतखाब आलम, गुंजन कुमार, अनिल टोपनो, बीरबल गुड़िया, अमरनाथ यादव, आलम अंसारी, एस. होरो, अबरार अहमद, कामता प्रसाद, जगजीत सिंह गिल, धनी राम लकड़ा, अर्जुन सिंह पूर्ति, नईम आलम, दयानंद कुमार सहित बड़ी संख्या में विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

अब सबकी निगाहें 15 जून पर

मेघाहातुबुरु की खदानों में बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर श्रमिकों और प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। एक ओर प्रबंधन नई व्यवस्था लागू करने पर अडिग दिखाई दे रहा है, तो दूसरी ओर संयुक्त मोर्चा न्यायालय के फैसले तक पुराने नियमों पर कायम रहने की घोषणा कर चुका है। ऐसे में 15 जून का दिन खदान क्षेत्र की श्रमिक राजनीति और औद्योगिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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