आरा समेत कई जिलों में 220 वोल्ट की जगह 80–100 वोल्ट की आपूर्ति से धान की रोपाई प्रभावित, मोटर-समर्सेबल बंद, पंखे-कूलर-एसी बेअसर, डेयरी और छोटे कारोबार संकट में; पिरो क्षेत्र के लोगों ने बिजली व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल, तत्काल सुधार की मांग तेज।
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
बिहार के आरा समेत राज्य के कई जिलों में इन दिनों भीषण गर्मी, उमस और खेती के मौसम के बीच बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। लगातार बिजली कटौती और 220 वोल्ट की जगह महज 80 से 100 वोल्ट तक बिजली आपूर्ति होने से आम जनता, किसान, व्यापारी, छात्र और छोटे उद्योग संचालक भारी संकट का सामना कर रहे हैं। खासकर भोजपुर जिले के पिरो अनुमंडल क्षेत्र में पिछले कई दिनों से बिजली की यह समस्या लगातार बनी हुई है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश और निराशा देखी जा रही है।

खेती के मौसम में किसानों पर दोहरी मार
इन दिनों धान की रोपाई का सबसे महत्वपूर्ण समय चल रहा है। मानसून और वर्षा रूठी हुई है। खेतों में पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए किसानों को बिजली से चलने वाले मोटर और समर्सेबल पंपों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन लगातार लो वोल्टेज के कारण मोटर चालू ही नहीं हो पा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि यदि समय पर खेतों में पानी नहीं पहुंचा तो धान की रोपाई प्रभावित होगी, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। एक ओर मौसम की मार और दूसरी ओर बिजली विभाग की लापरवाही ने किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है।
80-100 वोल्ट की आपूर्ति बनी सबसे बड़ी समस्या
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली रहने के बावजूद उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। जहां सामान्य रूप से 220 वोल्ट बिजली मिलनी चाहिए, वहां कई गांवों में मात्र 80 से 100 वोल्ट तक ही आपूर्ति हो रही है।
इतने कम वोल्टेज में न मोटर चल रहे हैं, न पंखे, न कूलर और न ही एसी। यहां तक कि कई घरों में एलईडी बल्ब तक ठीक से नहीं जल पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसी बिजली का होना और न होना बराबर है।
व्यापारियों की रोजी-रोटी पर संकट
बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर भी पड़ा है। डेयरी संचालकों का दूध खराब हो रहा है, आइसक्रीम विक्रेताओं का सामान पिघल रहा है और कोल्ड ड्रिंक बेचने वाले दुकानदार ग्राहकों को ठंडा पेय उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
फ्रिज और डीप फ्रीजर पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने के कारण काम नहीं कर रहे हैं। इससे व्यापारियों को रोजाना हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि बिजली विभाग समय पर बिल वसूलने में तो सख्ती दिखाता है, लेकिन बेहतर बिजली आपूर्ति देने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
भीषण गर्मी में लोगों का जीना हुआ मुश्किल
बिहार में इन दिनों उमस और भीषण गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। बिजली कटौती और लो वोल्टेज के कारण पंखे, कूलर और एसी बंद पड़े हैं।
बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं। रातभर बिजली की आंख-मिचौली के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो रही है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं।
पानी के लिए भी मचा हाहाकार
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश घरों में पानी की व्यवस्था समर्सेबल और मोटर पंप से होती है। लेकिन कम वोल्टेज के कारण मोटर नहीं चलने से पेयजल संकट भी गहराने लगा है।
लोगों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी जुटाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
छात्रों और छोटे उद्योगों पर भी असर
बिजली संकट का असर छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं मिलने और पंखे बंद रहने से पढ़ाई बाधित हो रही है।
वहीं वेल्डिंग, आटा चक्की, फर्नीचर, मशीन रिपेयरिंग और अन्य छोटे उद्योग भी लो वोल्टेज के कारण प्रभावित हो रहे हैं। मशीनें सही ढंग से काम नहीं कर पा रही हैं, जिससे उत्पादन और आय दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा—आर.के. सिंह के समय बेहतर थी व्यवस्था
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब तक क्षेत्र में बिजली व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर थी।
लोगों का आरोप है कि उनके चुनाव हारने और केंद्रीय मंत्री पद से हटने के बाद बिजली व्यवस्था लगातार बिगड़ती चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि पहले इतनी लंबी कटौती और इतना अधिक लो वोल्टेज देखने को नहीं मिलता था।
सरकार और बिजली विभाग से उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार बिजली व्यवस्था सुधारने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।
लोगों का सवाल है कि यदि पर्याप्त बिजली उत्पादन और आपूर्ति का दावा किया जा रहा है, तो फिर ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार लो वोल्टेज और बिजली कटौती क्यों हो रही है? आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?
जनता की प्रमुख मांगें
* ग्रामीण क्षेत्रों में 220 वोल्ट की नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
* अनावश्यक बिजली कटौती पर तत्काल रोक लगाई जाए।
* खराब ट्रांसफॉर्मर और जर्जर बिजली लाइनें शीघ्र बदली जाएं।
* खेती के मौसम में किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाए।
* बिजली विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
* उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए।
जनाक्रोश बढ़ा, समाधान की मांग तेज
लगातार बिजली संकट से परेशान लोगों में अब आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
भीषण गर्मी, खेती का महत्वपूर्ण समय, पानी की समस्या और व्यापार में हो रहे नुकसान ने आम लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। अब सभी की निगाहें सरकार और बिजली विभाग पर टिकी हैं कि आखिर इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकलता है।














