नागरिक सुविधा समिति ने डीआरएम चक्रधरपुर को सौंपा दोहरा ज्ञापन, कहा— करोड़ों कमाने वाला रेलवे मनोहरपुर को आखिर कब देगा उसका हक?
रिपोर्ट शैलेश सिंह।
मनोहरपुर की जनता का सब्र अब जवाब देने लगा है। वर्षों से उपेक्षा और मूलभूत रेल सुविधाओं की कमी से जूझ रहे इस लौहांचल क्षेत्र के लोगों ने अब खुलकर रेलवे प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। नागरिक सुविधा समिति, मनोहरपुर के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुशील बारला के नेतृत्व में चक्रधरपुर रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को दो अहम मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। पहला ज्ञापन मनोहरपुर स्टेशन पर अतिरिक्त ट्रेनों के ठहराव और समयबद्ध परिचालन को लेकर था, जबकि दूसरा बहुप्रतीक्षित रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज अथवा अंडरपास निर्माण की मांग से जुड़ा था।
प्रतिनिधिमंडल में सेवानिवृत्त शिक्षक अश्विनी बधेल, निसार अहमद, सीमा मुण्डारी, बलदेव जाते और मनोज नायक जैसे सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। इन सभी ने एक स्वर में रेलवे प्रशासन से पूछा— आखिर मनोहरपुर जैसे बड़े और राजस्व देने वाले स्टेशन को उसकी जरूरत के मुताबिक सुविधाएं कब मिलेंगी?

लौहांचल का केंद्र, लेकिन सुविधाओं से वंचित
ज्ञापन में साफ कहा गया कि मनोहरपुर स्टेशन सिर्फ एक साधारण रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि पूरे लौहांचल का प्रमुख यात्रा केंद्र है। चिरिया, गुवा, किरीबुरू, जामदा, बड़बिल और आसपास के हजारों लोग इसी स्टेशन से रांची, जमशेदपुर, कोलकाता, दिल्ली, पुरी और दक्षिण भारत के शहरों की यात्रा करते हैं।
यहां से प्रतिदिन हजारों छात्र, मजदूर, व्यापारी, किसान और सरकारी कामकाज से जुड़े लोग यात्रा करते हैं। जिला मुख्यालय चाईबासा, अनुमंडल कार्यालय, न्यायालय और विश्वविद्यालयी कार्यों के लिए भी मनोहरपुर स्टेशन क्षेत्रीय जीवनरेखा बना हुआ है।
लेकिन विडंबना यह है कि इतनी बड़ी आबादी की जरूरतों के बावजूद यहां पर्याप्त एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं है।
छोटे स्टेशन को ठहराव, मनोहरपुर को इंतजार — आखिर क्यों?
प्रतिनिधिमंडल ने रेलवे की दोहरी नीति पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि जराईकेला जैसे छोटे स्टेशन पर टाटा-एरनाकुलम एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन रुकती है, लेकिन मनोहरपुर जैसे बड़े स्टेशन को इस सुविधा से वंचित रखा गया है।
यह सवाल अब सिर्फ रेल सुविधा का नहीं बल्कि रेलवे की प्राथमिकता और क्षेत्रीय न्याय का बन गया है।

इन ट्रेनों के ठहराव की उठी मांग
समिति ने निम्नलिखित ट्रेनों के मनोहरपुर में ठहराव की मांग की है—
* टाटा-यशवंतपुर एक्सप्रेस (18111/18112)
* हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस (12834/12833)
* टाटा-एरनाकुलम एक्सप्रेस (18189/18190)
* हावड़ा-पुणे आजाद हिंद एक्सप्रेस (12130/12129)
ग्रामीणों का कहना है कि इन ट्रेनों का ठहराव होने से मनोहरपुर और आसपास के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
लेट ट्रेनें बनीं मुसीबत
सिर्फ ठहराव ही नहीं, जो ट्रेनें अभी रुकती हैं, वे भी समय पर नहीं आतीं। इससे यात्रियों को भारी परेशानी होती है। देर रात स्टेशन पर इंतजार करना, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिम भरा बन चुका है।
रेलवे प्रशासन की यह लापरवाही जनता के धैर्य की परीक्षा ले रही है।
जगदलपुर एक्सप्रेस को टाटानगर तक बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जगदलपुर एक्सप्रेस (18108 डाउन) राउरकेला स्टेशन पर सुबह 6:15 बजे काफी देर तक खड़ी रहती है। ऐसे में इसे मनोहरपुर, गाईलकेरा, सोनुआ और चक्रधरपुर होते हुए टाटानगर तक विस्तार दिया जाए।
यह कदम क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और यात्रियों को बेहतर विकल्प देगा।
समय पर ट्रेन संचालन की मांग भी तेज
समिति ने कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के समयबद्ध संचालन की मांग की है—
* राउरकेला-टाटानगर (68044)
* चक्रधरपुर-राउरकेला (68025)
* पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस (18477)
* आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस (13288)
* हावड़ा-जूनागढ़ इस्पात एक्सप्रेस (12871)
* हावड़ा-कांटाभाजी इस्पात एक्सप्रेस (22861)
लोगों का कहना है कि ट्रेनें लेट होने से नौकरीपेशा, छात्र और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
रेलवे फाटक बना मनोहरपुर की सबसे बड़ी मुसीबत
ट्रेनों के ठहराव से भी बड़ी समस्या मनोहरपुर रेलवे फाटक है। समिति ने रेल मंत्री के नाम अलग ज्ञापन सौंपकर यहां ओवरब्रिज या अंडरपास निर्माण की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि मनोहरपुर शहर दो हिस्सों में बंटा हुआ है और दोनों हिस्सों को जोड़ने वाला मुख्य माध्यम यही रेलवे फाटक है।
प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय, थाना, अस्पताल, बैंक, पीएचईडी, स्कूल, पीडब्ल्यूडी सहित अधिकांश सरकारी और गैर-सरकारी संस्थान इसी मार्ग के दोनों ओर स्थित हैं।
24 घंटे में 18 घंटे बंद रहता है फाटक
यह आंकड़ा सबसे चौंकाने वाला है। समिति के अनुसार रेलवे फाटक दिनभर में औसतन 18 घंटे बंद रहता है। यानी लोगों को सिर्फ 6 घंटे ही सहज आवाजाही का मौका मिलता है।
जरा सोचिए— मरीज अस्पताल कैसे पहुंचेगा? छात्र स्कूल कैसे जाएंगे? कर्मचारी समय पर दफ्तर कैसे पहुंचेंगे?
यह समस्या अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जनजीवन को बाधित करने वाली गंभीर स्थिति बन चुकी है।
हर 10 मिनट में लगती है लंबी कतार
फाटक बंद होने पर दोनों ओर छोटी-बड़ी गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती है। स्कूली बसें, एंबुलेंस, मालवाहक वाहन, किसान ट्रैक्टर और आम लोग घंटों फंसे रहते हैं।
आपातकालीन सेवाओं के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा अहम मार्ग
मनोहरपुर रेलवे फाटक सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग-320G का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मार्ग किरीबुरू, गुवा, जामदा और चिरिया जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को रांची से जोड़ता है।
इसके बावजूद यहां ओवरब्रिज नहीं होना रेलवे और सरकार की प्राथमिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
राजस्व करोड़ों में, सुविधा शून्य
सबसे बड़ा सवाल यही है— मनोहरपुर आयरन ओर साइडिंग से दक्षिण पूर्व रेलवे को हर साल करोड़ों का राजस्व मिलता है, फिर भी यहां बुनियादी ढांचा क्यों नहीं सुधारा गया?
जब छोटे स्टेशनों घाघरा, जराईकेला और भालुलता में अंडरपास बन सकते हैं, तो मनोहरपुर को यह अधिकार क्यों नहीं?
सर्वे भी हो चुका, फिर देरी क्यों?
वर्ष 2024 के रेलवे सर्वे के अनुसार इस फाटक पर ट्रैफिक व्हीकल यूनिट 3,49,838 दर्ज किया गया। प्रतिदिन लगभग 1500 से 2000 वाहन यहां से गुजरते हैं।
यह आंकड़े खुद बताते हैं कि यहां ओवरब्रिज की जरूरत कितनी जरूरी है। फिर भी कार्रवाई न होना रेलवे की उदासीनता को उजागर करता है।

जनता ने दी चेतावनी
नागरिक सुविधा समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
लोगों का कहना है कि मनोहरपुर सिर्फ राजस्व देने के लिए नहीं है। यहां की जनता भी सुविधाओं पर बराबर हक रखती है।
अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन इन जायज मांगों को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर एक बार फिर मनोहरपुर की जनता को सिर्फ आश्वासन ही मिलेगा।













