केरला पब्लिक स्कूल बर्मामाइंस के बाहर अड्डेबाजी, मारपीट और बदसलूकी से अभिभावकों में भारी आक्रोश
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
जमशेदपुर के बर्मामाइंस स्थित केरला पब्लिक स्कूल के बाहर छुट्टी के समय असामाजिक तत्वों की बढ़ती गतिविधियों ने छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल परिसर के बाहर रोजाना बाहरी युवकों का जमावड़ा लगना अब अभिभावकों और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का बड़ा विषय बन गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल की छुट्टी के समय दर्जनों बाहरी युवक स्कूल गेट और आसपास के इलाकों में घंटों डेरा जमाए रहते हैं। आरोप है कि ये युवक स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करते हैं। कई बार छात्राओं के साथ भी बदसलूकी और फब्तियां कसने की शिकायत सामने आई है, जिससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

स्कूल के बाहर बन रहा अपराधियों का अड्डा
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल के बाहर इस तरह की अड्डेबाजी लगातार बढ़ती जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? जब स्कूल शिक्षा का मंदिर है, तो उसके बाहर गुंडागर्दी का यह खुला खेल प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करता है।
अभिभावकों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाया गया तो कोई बड़ी और गंभीर वारदात से इनकार नहीं किया जा सकता। बच्चों के मन में डर का माहौल है और कई छात्र भय के कारण स्कूल आने-जाने में असहज महसूस कर रहे हैं।
पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
इस गंभीर मामले को लेकर मुकेश सिंह आदि ने थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में मांग की गई है कि स्कूल छुट्टी के समय पुलिस गश्ती दल की तैनाती सुनिश्चित की जाए और बाहरी युवकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मुकेश सिंह ने स्पष्ट कहा कि अगर प्रशासन अब भी नहीं चेता तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है। उन्होंने यह भी मांग की कि स्कूल के बाहर हो रही अड्डेबाजी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
गृह मंत्रालय और मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस शिकायत की प्रतिलिपि केंद्रीय गृह मंत्री और झारखंड के मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है। इससे साफ है कि अभिभावकों और समाज के लोगों में इस मुद्दे को लेकर गहरा आक्रोश है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि बर्मामाइंस पुलिस इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेती है और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।














