रेल प्रशासन पर मानसिक शोषण का आरोप, पुरानी ट्रांसफर नीति बहाल करने की मांग तेज
रिपोर्ट: संदीप गुप्ता
South Eastern Railway Men’s Congress के बैनर तले चक्रधरपुर मंडल में रनिंग स्टाफ के बीच नई ट्रांसफर नीति को लेकर भारी असंतोष उभरकर सामने आया है। मंडल प्रशासन द्वारा जारी नई स्थानांतरण नीति (JPO) के खिलाफ जुरुली और डीपीएस समेत ब्रांच लाइन में कार्यरत कर्मचारियों ने खुलकर नाराजगी जताई है और पुरानी नीति बहाल करने की मांग उठाई है।

नई नीति ने बढ़ाई कर्मचारियों की चिंता
रनिंग कर्मचारियों का कहना है कि नई ट्रांसफर नीति उनके हितों के खिलाफ है और इससे उन्हें अपनी इच्छित लॉबी में स्थानांतरण के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा। कर्मचारियों के अनुसार, यह नीति विशेष रूप से ब्रांच लाइन में कार्यरत कर्मचारियों को अधिक प्रभावित करेगी।
नई व्यवस्था के तहत ब्रांच लाइन में दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद ही कर्मचारी चक्रधरपुर, सिनी, मूरी और झारसुगुड़ा लॉबी में स्थानांतरण के पात्र होंगे। लेकिन इन स्थानांतरणों की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में असमंजस और तनाव की स्थिति बनी हुई है।
तीन साल का लॉकिंग पीरियड बना नई परेशानी
कर्मचारियों ने बताया कि इन लॉबियों में स्थानांतरण के बाद भी तीन वर्षों का लॉकिंग पीरियड अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बाद ही वे अपनी इच्छित लॉबी के लिए पात्र बन सकेंगे। लेकिन वहां भी कोई निश्चित समय सीमा नहीं होने से कर्मचारियों को यह व्यवस्था पूरी तरह अन्यायपूर्ण लग रही है।
‘मानसिक शोषण’ का आरोप
डीपीएस, जुरुली और अन्य ब्रांच लाइन में कार्यरत कर्मचारियों ने इसे मानसिक शोषण करार दिया है। उनका कहना है कि पहले से ही वे दूरदराज क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। नई नीति उनकी समस्याओं को और बढ़ा देगी।
जुरुली बैठक में उमड़ा कर्मचारियों का गुस्सा
आज जुरुली में आयोजित South Eastern Railway Men’s Congress की रनिंग शाखा की बैठक में 200 से अधिक रनिंग कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में सभी कर्मचारियों ने एक स्वर में नई JPO को पूरी तरह खारिज कर दिया।
बैठक में कर्मचारियों ने पुरानी JPO के आधार पर स्थानांतरण और पोस्टिंग व्यवस्था फिर से लागू करने की मांग की।
एस. आर. मिश्रा ने उठाई पुरानी नीति बहाली की मांग
बैठक में संगठन के वरिष्ठ नेता एस. आर. मिश्रा ने कहा कि रेल प्रशासन को रनिंग स्टाफ के हितों को ध्यान में रखते हुए पुरानी ट्रांसफर नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी कर बनाई गई यह नई नीति भविष्य में बड़े आंदोलन का कारण बन सकती है।

आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारियों ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे को मंडल स्तर से लेकर रेलवे बोर्ड तक उठाया जाएगा।
नई ट्रांसफर नीति को लेकर बढ़ता यह असंतोष अब चक्रधरपुर रेल मंडल के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में रेल संचालन पर भी इसका असर पड़ सकता है।













