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दुबिल माइंस आंदोलन चौथे दिन भी जारी, वार्ता बेनतीजा; प्रबंधन बोला—रोजगार नहीं दे सकते

On: June 29, 2026 8:11 PM
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चार सूत्री मांगों पर अड़े ग्रामीण, उत्पादन और लौह अयस्क ढुलाई चौथे दिन भी ठप; “हक लिए बिना नहीं हटेंगे”

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

ग्राम सभा दुबिल के बैनर तले “हातु-आबुआ राज, ग्राम स्वराज अभियान” के तहत सेल की चिड़िया-दुबिल माइंस के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन सोमवार 29 जून को चौथे दिन भी उग्र तेवर में जारी रहा। लगातार कठिन हालात, बारिश और जंगल में डटे रहने के बावजूद ग्रामीण आंदोलन स्थल से हटने को तैयार नहीं हैं। खदान का उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई चौथे दिन भी पूरी तरह ठप रही।
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी चार सूत्री मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।

शाम की वार्ता में आमने-सामने हुए ग्रामीण और प्रबंधन

आंदोलन के चौथे दिन शाम करीब 5:30 बजे सेल प्रबंधन की ओर से सहायक महाप्रबंधक रवि रंजन, अन्य अधिकारी तथा ठेका कंपनी एन के मिनिरल्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि आंदोलन स्थल पहुंचे। कई घंटों तक चली बातचीत में प्रबंधन और ग्रामीण आमने-सामने बैठे, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
सेल अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से साफ कहा कि फिलहाल किसी को रोजगार देना संभव नहीं है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि वर्ष 2022 से अब तक किसी को रोजगार नहीं दिया गया है और आगे हैंड माइनिंग की भी कोई योजना नहीं है।
प्रबंधन ने ग्रामीणों को चेताया कि यदि आंदोलन इसी तरह जारी रहा तो खदान बंद हो सकती है, जिससे पूरे क्षेत्र के विकास और लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा।

सिर्फ पानी की समस्या पर आश्वासन

वार्ता के दौरान प्रबंधन की ओर से केवल सीएसआर योजना के तहत पानी से जुड़ी समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया। लेकिन रोजगार, मुआवजा और जमीन विवाद जैसे मुख्य मुद्दों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
इससे आंदोलनकारियों में असंतोष और बढ़ गया।

ठेका कंपनी का तर्क—“खर्च बढ़ेगा तो काम क्यों करेंगे?”

वार्ता के दौरान ठेका कंपनी के प्रतिनिधि ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिस लागत पर कंपनी ने काम लिया है, उससे अधिक खर्च होने लगेगा तो कंपनी के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा।
यह बयान आंदोलनकारियों को नागवार गुजरा। ग्रामीणों ने इसे उनके अधिकारों की अनदेखी बताया।

“जब मांगें पूरी नहीं, तो आंदोलन भी नहीं रुकेगा”

बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा कि जब उनकी कोई भी मांग पूरी नहीं की जा रही, तो आंदोलन भी अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि अब यह संघर्ष सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि जमीन, सम्मान और भविष्य बचाने का है।

महिलाएं, बुजुर्ग और युवा मोर्चे पर

आंदोलन में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी भागीदारी बनी हुई है। प्लास्टिक के अस्थायी तंबू के नीचे रहकर, जंगल में खाना बनाकर और लगातार बारिश के बीच रात गुजारते हुए भी ग्रामीणों का हौसला नहीं टूटा है।
यह संघर्ष अब पूरे गांव की सामूहिक लड़ाई बन चुका है।

चार मांगों पर कायम ग्रामसभा

ग्रामसभा ने अपनी चार प्रमुख मांगों को फिर दोहराया—
• दुबिल गांव के 200 बेरोजगार युवाओं को खतियान आधारित प्राथमिकता के साथ रोजगार दिया जाए।
• अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों को नौकरी मिले।
• सरना, कब्रिस्तान और rैयती जमीन पर गाड़े गए अवैध पिलर हटाए जाएं।
• गांव में चार नए चापाकल और आठ जलमीनार लगाए जाएं।

“अब भरोसा नहीं, सिर्फ अधिकार चाहिए”

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिले, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदली। अब गांव ने तय कर लिया है कि बिना हक लिए वापस नहीं लौटेंगे।
दुबिल की पहाड़ियों में गूंजते नारे अब आंदोलन की पहचान बन चुके हैं—
“हातु-आबुआ राज, हमारा गांव हमारा राज!”
और यह आवाज अब सेल प्रबंधन और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

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