ट्रैक्टर जब्त, हाईवा को खुली छूट; आखिर किसके इशारे पर चल रहा बालू का काला कारोबार?
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
गोइलकेरा में बालू के कारोबार को लेकर अब सियासत गरमा गई है। प्रशासन की कार्रवाई और उसके तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर जहां स्थानीय गरीब ट्रैक्टर चालकों पर लगातार शिकंजा कसते हुए उनके ट्रैक्टर जब्त किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बालू से लदे भारी-भरकम हाईवा खुलेआम सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इस दोहरे रवैये ने पूरे इलाके में आक्रोश की आग भड़का दी है।
लोगों का कहना है कि यह सिर्फ बालू ढुलाई का मामला नहीं, बल्कि “प्रशासनिक संरक्षण” और “बालू माफियाओं की सांठगांठ” का बड़ा खेल है।

गरीबों पर डंडा, रसूखदारों पर मेहरबानी!
गोइलकेरा में इन दिनों जो तस्वीर सामने आ रही है, उसने कानून की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनजीटी के नियमों का हवाला देकर स्थानीय ट्रैक्टर चालकों को रोका जा रहा है। उनके वाहन जब्त कर खनन विभाग के हवाले किए जा रहे हैं। इससे छोटे कारोबारियों और मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्हीं सड़कों पर हाईवा धड़ल्ले से बालू लेकर गुजर रहे हैं, और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
रात में हाईवा पकड़ाए, ग्रामीणों ने खोली पोल
मंगलवार की रात करीब 9:59 बजे ग्रामीणों ने बालू से लदे दो हाईवा को पकड़ लिया। ग्रामीणों का सीधा सवाल था— जब ट्रैक्टरों को बालू ढुलाई की अनुमति नहीं है, तो आखिर हाईवा किस कानून के तहत चल रहे हैं?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और प्रशासन जानबूझकर आंख मूंदे बैठा है।
थाना प्रभारी पहुंचे, “चालान” दिखाकर छुड़ाया
मामले की जानकारी मिलते ही गोइलकेरा थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने उनसे कागजात और नियमों की जानकारी मांगी। थाना प्रभारी ने कहा कि हाईवा “चालान” पर चल रहे हैं और इसके बाद दोनों वाहनों को मौके से छुड़ा लिया गया।
यहीं से विवाद और गहरा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर चालान वैध था तो फिर उसमें दर्ज मात्रा और वास्तविक लोड की जांच क्यों नहीं की गई?
300 CFT के चालान में हजारों CFT का खेल?
सूत्रों के अनुसार बालू का स्टॉक दलकी गांव में रखा गया है, जबकि हाईवा सेरेंगदा घाट से गोइलकेरा थाना के सामने से गुजर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि हाईवा में क्षमता से कहीं अधिक बालू लोड रहता है, लेकिन चालान महज 300 CFT का काटा जाता है। एक चालान से कई ट्रिप किया जाता है।
यानी ऊपर से कागज वैध, लेकिन अंदर पूरा खेल अवैध।
अगर यह आरोप सही है, तो यह सिर्फ नियम उल्लंघन नहीं बल्कि सरकारी राजस्व की खुली लूट है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन को इन हाईवा की जानकारी नहीं थी? अगर थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो क्या यह संरक्षण का मामला है?
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस छोटे ट्रैक्टर चालकों पर तो कार्रवाई करती है, लेकिन बड़े वाहन और बालू माफिया के सामने नरम पड़ जाती है।
ग्रामीणों में उबाल, सड़क जाम की चेतावनी
इस कथित भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क जाम कर आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि अब यह लड़ाई सिर्फ बालू की नहीं, बल्कि न्याय और बराबरी की है।
कानून सबके लिए बराबर या सिर्फ गरीबों के लिए?
गोइलकेरा की यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई है— क्या कानून सिर्फ गरीब ट्रैक्टर चालकों पर लागू होता है? क्या हाईवा और रसूखदारों के लिए अलग नियम हैं?
अगर प्रशासन वास्तव में पारदर्शी है, तो हाईवा के चालान, लोडिंग क्षमता और स्टॉक की जांच सार्वजनिक करनी चाहिए।
फिलहाल गोइलकेरा में बालू को लेकर सुलग रही यह चिंगारी कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।














