वेटिंग लिस्ट में आगे आने के लिए अभ्यर्थियों के फॉर्म किए विड्रॉ, साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच से खोला हाईटेक खेल
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
राजस्थान में सरकारी भर्ती प्रक्रिया में हाईटेक छेड़छाड़ का सनसनीखेज मामला सामने आया है। Rajasthan Public Service Commission (RPSC) के रिक्रूटमेंट पोर्टल में सेंधमारी कर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप में साइबर थाना पुलिस ने Steel Authority of India Limited (सेल) की मेघाहातुबुरु खदान में कार्यरत एक माइनिंग इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कोडिंग और फर्जी डिजिटल पहचान का सहारा लेकर भर्ती पोर्टल से छेड़छाड़ की थी।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान Rahul Kumar Meena (27) के रूप में हुई है, जो राजस्थान के दौसा जिले का निवासी है और वर्तमान में सेल की मेघाहातुबुरु खदान में माइनिंग इंजीनियर के पद पर कार्यरत था।

वेटिंग लिस्ट में ऊपर आने के लिए रची डिजिटल साजिश
एडिशनल एसपी Himanshu Jangid के अनुसार, आरोपी राजस्थान लौटना चाहता था और इसी उद्देश्य से उसने RPSC की असिस्टेंट माइनिंग इंजीनियर भर्ती-2024 में चयन सुनिश्चित करने के लिए यह साजिश रची।
जांच में सामने आया कि उसका नाम प्रोविजनल वेटिंग लिस्ट में था। आरोपी ने फर्जी SSO ID और जीमेल आईडी बनाकर AI टूल्स की मदद से OTR (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) सिस्टम को बायपास करने की कोडिंग तैयार की। इसके बाद उसने अपने से आगे चल रहे अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र विड्रॉ कर दिए, ताकि उसका नंबर ऊपर आ सके।
संदेह से बचने के लिए अपनाई चालाक रणनीति
पुलिस के अनुसार, राहुल वेटिंग लिस्ट में दूसरे नंबर पर था। यदि वह केवल पहले नंबर वाले अभ्यर्थी का आवेदन रद्द करता, तो शक सीधे उसी पर जाता। इसलिए उसने चालाकी दिखाते हुए क्रमांक 1, 4 और 6 पर चल रहे तीन अभ्यर्थियों के आवेदन फर्जी लिंक बनाकर वापस कर दिए।
जब संबंधित अभ्यर्थियों के मोबाइल पर आवेदन वापस होने के मैसेज पहुंचे तो हड़कंप मच गया। यहीं से पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
RPSC प्रोग्रामर की शिकायत से खुला पूरा खेल
मामले का खुलासा तब हुआ जब Raghuveer Gurjar, जो RPSC में एनालिस्ट-कम-प्रोग्रामर हैं, ने अजमेर साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में बताया गया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने भर्ती पोर्टल में अनधिकृत प्रवेश कर रिकॉर्ड में हेराफेरी की है और अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत डेटा से छेड़छाड़ कर चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित किया है।
BHU से पढ़ाई, SAIL में नौकरी, फिर साइबर अपराध
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने Banaras Hindu University (BHU) से माइनिंग इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। इसके बाद उसका चयन सेल में हुआ और वह मेघाहातुबुरु खदान में कार्यरत था।
बताया जा रहा है कि आरोपी हाल ही में छुट्टी लेकर दौसा आया हुआ था। इसी दौरान उसने इस पूरे साइबर ऑपरेशन को अंजाम दिया।
VPN और दूसरे के वाई-फाई से छिपाई पहचान
अपनी पहचान छिपाने के लिए आरोपी ने कई बार VPN का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, उसने अपने नेटवर्क की बजाय दूसरे लोगों के वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग किया ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।
लेकिन राजस्थान पुलिस मुख्यालय के साइबर विशेषज्ञों और अजमेर पुलिस की संयुक्त तकनीकी जांच में उसके डिवाइस और IP एड्रेस की पहचान कर ली गई। इसके बाद हेड कांस्टेबल रामदयाल और कांस्टेबल सोनू की मदद से उसे दौसा कोतवाली क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच जारी, अकेला या गैंग?
पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेजा गया। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस हाईटेक साजिश में राहुल अकेला था या उसके साथ कोई और भी शामिल था।
यह मामला सरकारी भर्ती प्रक्रिया में साइबर सुरक्षा की गंभीरता और AI आधारित अपराधों के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भर्ती एजेंसियों को अपने डिजिटल सिस्टम को और अधिक मजबूत करना होगा, ताकि ऐसी सेंधमारी को रोका जा सके।














