साउथ ब्लॉक और सेंट्रल ब्लॉक खनन शुरू कराने की चुनौती सबसे बड़ी, खत्म हो रहे अयस्क भंडार के बीच नई उम्मीद लेकर पहुंच रहे हैं नए चेयरमैन
रिपोर्ट शैलेश सिंह।
Steel Authority of India Limited (सेल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अशोक कुमार पंडा आज 26 जून को किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और बोलनी खदानों के दौरे के क्रम में मेघाहातुबुरु स्थित मेघालया गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर पूरे क्षेत्र में युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं। गेस्ट हाउस से लेकर आसपास के इलाकों में साफ-सफाई, तोरण द्वार निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
उनके आगमन से पहले सेल के कार्यपालक निदेशक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मेघालया गेस्ट हाउस पहुंच चुके हैं। चेयरमैन बनने के बाद यह उनका पहला खनन क्षेत्रीय दौरा माना जा रहा है, इसलिए यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विकट दौर से गुजर रही किरीबुरू-मेघाहातुबुरु खदानें
सेल की किरीबुरू और मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदानें पिछले कुछ वर्षों से गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। दोनों खदानों में मौजूदा अयस्क भंडार लगभग समाप्ति की कगार पर है, जिसका सीधा असर उत्पादन और माल ढुलाई पर पड़ा है। विशेष रूप से मेघाहातुबुरु खदान की स्थिति अधिक चिंताजनक बताई जा रही है।
इन परिस्थितियों में प्रबंधन ने किरीबुरू के साउथ ब्लॉक और मेघाहातुबुरु के सेंट्रल ब्लॉक में नए खनन कार्य प्रारंभ करने की योजना बनाई है। इसके लिए लगभग सभी सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अब केवल पेड़ कटाई से संबंधित अंतिम अनुमति सारंडा वन प्रमंडल के डीएफओ स्तर पर लंबित है।

वन विभाग की मंजूरी बनी सबसे बड़ी बाधा
प्रबंधन सूत्रों का मानना है कि जैसे ही वन विभाग से अनुमति मिलेगी, दोनों नए ब्लॉकों में खनन गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। इससे न केवल दोनों खदानों की उम्र बढ़ेगी बल्कि उत्पादन क्षमता में भी भारी वृद्धि होगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
यह मामला अब सेल प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। गुवा खदान में इसी तरह की समस्या सामने आई थी, लेकिन वहां समाधान निकल चुका है। अब निगाहें किरीबुरू और मेघाहातुबुरु पर टिकी हैं।
कौन हैं डॉ. अशोक कुमार पंडा?
Ashok Kumar Panda ने 9 मई 2026 को सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला। इससे पहले वह कंपनी में निदेशक (वित्त) के पद पर कार्यरत थे और लगभग नौ महीने तक निदेशक (वाणिज्यिक) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।
उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.ई. करने के बाद 1992 में सेल में मैनेजमेंट ट्रेनी (तकनीकी) के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। तीन दशकों से अधिक की सेवा के दौरान उन्होंने कंपनी के विभिन्न संयंत्रों और इकाइयों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
रणनीतिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं पंडा
निदेशक (वित्त) के रूप में उन्होंने उत्पादन बढ़ाने, तकनीकी सुधार, मानव संसाधन विकास और वित्तीय नीतियों को मजबूत करने की दिशा में कई अहम फैसले लिए। वहीं निदेशक (वाणिज्यिक) रहते हुए उन्होंने बाजार विस्तार, ब्रांडिंग, इन्वेंट्री नियंत्रण और नेट सेल्स रियलाइजेशन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
उनकी पहचान एक जन-उन्मुख और परिणाम देने वाले नेता के रूप में है। टीम निर्माण और प्रदर्शन सुधार में उनकी क्षमता को कंपनी के भीतर व्यापक सम्मान प्राप्त है।

35 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य, खदानों की सुरक्षा सबसे अहम
सीएमडी का पद संभालने के बाद डॉ. पंडा ने साफ कहा था कि सेल अब 35 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता की ओर तेजी से बढ़ रही है। इसके लिए घरेलू खनन को मजबूत करना और विदेशी संपत्तियों की खोज कर कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा, उत्पादन विस्तार और वैल्यू एडेड उत्पादों पर फोकस उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
दौरे से जगी नई उम्मीदें
डॉ. पंडा का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब किरीबुरू और मेघाहातुबुरु की खदानें अपने अस्तित्व और भविष्य को लेकर अहम मोड़ पर खड़ी हैं। स्थानीय मजदूरों, कर्मचारियों और व्यापारियों की नजरें इस दौरे पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि उनके दौरे के बाद लंबित फाइलों को गति मिलेगी और खदानों के विस्तार का रास्ता साफ होगा।
यह दौरा केवल निरीक्षण भर नहीं, बल्कि सेल की इन ऐतिहासिक खदानों के भविष्य का निर्णायक अध्याय साबित हो सकता है।














