भ्रष्टाचार नक्सल खदान
अपराध राजनीति खेल समस्या स्वास्थ्य कार्यक्रम शिक्षा दुर्घटना सांस्कृतिक मनोरंजन मौसम कृषि ज्योतिष काम

बायोमेट्रिक पर सेल प्रबंधन और संयुक्त मोर्चा की अहम बैठक, यूनियनों ने कहा— कोर्ट के फैसले तक जबरन लागू नहीं हो सिस्टम

On: June 25, 2026 8:32 PM
Follow Us:
---Advertisement---

श्रम कानून, सुरक्षा और वेज एक्ट को लेकर उठे गंभीर सवाल; यूनियनों ने प्रबंधन से कहा— कानूनी प्रक्रिया के बिना नहीं चलेगी मनमानी

रिपोर्ट शैलेश सिंह।

सेल प्रबंधन किरीबुरू और संयुक्त मोर्चा के बीच बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर 24 जून को शाम 5 बजे किरीबुरू जनरल ऑफिस प्रांगण में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी प्रमुख ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। घंटों चली इस बैठक में बायोमेट्रिक प्रणाली की खामियों, श्रम कानूनों के उल्लंघन और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर तीखी बहस हुई।
संयुक्त मोर्चा ने साफ शब्दों में कहा कि मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में जब तक न्यायालय का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक खदानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू नहीं की जानी चाहिए। यूनियनों ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान उपस्थिति प्रणाली अभी तक प्रमाणन अधिकारी से authenticated नहीं है, इसलिए इसे लागू करना कानूनी रूप से भी उचित नहीं है।

“पहले प्रमाणित करो, फिर लागू करो” — यूनियन का दो टूक संदेश

यूनियन नेताओं ने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली सिर्फ हाजिरी दर्ज करने का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। यदि इसमें कोई तकनीकी या कानूनी खामी रह जाती है, तो इसका सीधा असर मजदूरों के अधिकारों पर पड़ेगा।
यूनियन ने आरोप लगाया कि किरीबुरू खदान में लगाया गया बायोमेट्रिक सिस्टम अभी तक Certified Standing Order और श्रम कानूनों के अनुरूप नहीं है। इसमें इस्तेमाल किया गया सॉफ्टवेयर वेज एक्ट और स्टैंडिंग ऑर्डर की मूल भावना को प्रभावित कर रहा है। खासकर इसमें जो 15 मिनट का ग्रेस पीरियड रखा गया है, वह न तो मौजूदा Payment of Wages Act में है और न ही नए वेज कोड में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान है।

श्रम कानून के किस धारा के तहत थोपा जा रहा सिस्टम?

यूनियन नेताओं ने प्रबंधन से सवाल किया कि आखिर किस कानूनी प्रावधान के तहत इस प्रणाली को कर्मचारियों पर जबरन थोपा जा रहा है? उनका कहना था कि यदि सॉफ्टवेयर की कोडिंग में सुधार नहीं हुआ तो यह भविष्य में बड़े श्रम विवाद का कारण बन सकता है।
चाईबासा के सुलह अधिकारी द्वारा दिए गए सुझाव का भी बैठक में उल्लेख हुआ। सुलह अधिकारी ने दोनों पक्षों को स्पष्ट कहा था कि जब तक मामला कोर्ट में विचाराधीन है, तब तक पुरानी उपस्थिति व्यवस्था लागू रखी जाए ताकि किसी तरह की IR Problem (Industrial Relation Problem) उत्पन्न न हो।

15 जून का फैसला बना था संकट की जड़

संयुक्त मोर्चा ने कहा कि उन्होंने सुलह अधिकारी की सलाह का सम्मान किया, लेकिन इसके बावजूद सेल झारखंड खान समूह ने 15 जून से जबरन बायोमेट्रिक लागू करने की कोशिश की। इसका परिणाम यह हुआ कि झारखंड खान समूह की चारों खदानों में अघोषित हड़ताल जैसी स्थिति बन गई, जिससे उत्पादन और उत्पादकता दोनों प्रभावित हुए।
बढ़ते तनाव को देखते हुए अंततः सेल प्रबंधन को मौखिक रूप से अपना सर्कुलर वापस लेना पड़ा।

यूनियन का साफ रुख— विरोध सिस्टम से नहीं, गैरकानूनी प्रक्रिया से है

संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट किया कि वे बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के विरोधी नहीं हैं। उनका विरोध सिर्फ इस बात को लेकर है कि इसे कानूनी प्रक्रिया, प्रमाणन और श्रम कानूनों के तहत लागू किया जाए। बिना वैधानिक मंजूरी के इसे लागू करना मजदूर हितों के साथ खिलवाड़ होगा।
बैठक में एटक से जगमोहन सामद, इंटक से नितिन कुमार, सीटू से मिथिलेश कुमार, एचएमएस से सतीश सिंह, बीएमएस से प्रमोद महानता, झामुमो से महेश्वर पात्र और जेएमएसएस से राजेन्द्र सिंधिया सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

किरीबुरू की खदानों में बायोमेट्रिक का मुद्दा अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि कानूनी और श्रमिक अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। अब निगाहें कोर्ट के फैसले और प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

Join WhatsApp

Join Now

और पढ़ें

खदान अधिकारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर सक्रिय हुई स्टील एक्जीक्यूटिव्स फेडरेशन ऑफ इंडिया

SAIL प्रबंधन पर कर्मचारियों के हक़ पर ‘डाका’ का आरोप, BMS का अल्टीमेटम—बकाया दो, नहीं तो लेबर कमिश्नर के दरवाज़े पर होगी लड़ाई

चिड़िया खदान में ‘रोजगार की लड़ाई’ या ‘ठेके की राजनीति’? आखिर किसके इशारे पर सुलग रहा है सारंडा का आंदोलन!

मेघाहातुबुरु खदान में नए एचआर अधिकारी का स्वागत, झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने जताई उम्मीदें

32 वर्षों की सेवा के बाद जयपाल हस्सा पुर्त्ती सेवानिवृत्त, मेघाहातुबुरू माइंस में भावभीनी विदाई

बायोमेट्रिक हाजिरी पर भड़का संयुक्त मोर्चा: “मजदूरों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

Leave a Comment