गुवा संवाददाता:
गुवा सेल खदान क्षेत्र में कर्मियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए प्रस्तावित बायोमेट्रिक प्रणाली पर फिलहाल रोक लग गई है। इस मामले में पूर्व में हुए संयुक्त यूनियनों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सेल प्रबंधन ने बायोमेट्रिक हाजिरी को अनिवार्य करने संबंधी अपने आदेश को अस्थायी तौर पर वापस ले लिया था। इसके बाद प्रबंधन ने इस विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता की।

पुराने विवाद का समाधान तलाशने में जुटा था प्रबंधन
बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर पहले से ही श्रमिकों और प्रबंधन के बीच विवाद चल रहा था। यूनियनों का कहना था कि यह मामला वर्तमान में संबंधित न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए न्यायालय के अंतिम निर्णय से पहले इसे लागू करना उचित नहीं होगा। इसी कारण पहले आंदोलन हुआ था और उस समय प्रबंधन को अपना आदेश अस्थायी रूप से वापस लेना पड़ा था।
वार्ता के बाद निकला निष्कर्ष
बाद में सेल प्रबंधन ने विभिन्न यूनियनों—झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक), सप्लाई मजदूर संघ और झारखंड मजदूर मोर्चा आदि—के पदाधिकारियों के साथ पुनः वार्ता की। लंबी बातचीत और कानूनी पहलुओं पर विचार के बाद यह निष्कर्ष सामने आया कि संबंधित न्यायालय के निर्णय आने तक गुवा सेल में बायोमेट्रिक प्रणाली लागू नहीं की जाएगी।
यूनियन कार्यालय में मजदूरों को दी गई जानकारी
इस निर्णय के बाद बुधवार देर शाम झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के यूनियन कार्यालय में संयुक्त यूनियनों एवं मजदूरों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में यूनियन पदाधिकारियों ने श्रमिकों को प्रबंधन के साथ हुई वार्ता और निकले निष्कर्ष की जानकारी दी।
नेताओं ने कहा कि फिलहाल यह मजदूर हित में लिया गया निर्णय है और जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक किसी भी कर्मी पर बायोमेट्रिक हाजिरी का दबाव नहीं रहेगा।

एकता बनाए रखने की अपील
बैठक में यूनियन नेताओं ने मजदूरों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि श्रमिक हितों से जुड़े हर मुद्दे पर सामूहिक रूप से आवाज उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से ही मजदूरों के अधिकार सुरक्षित रह सकते हैं।
बैठक में अंतर्यामी महाकुड़, सिकंदर पान, विश्वजीत तांती, राजेश कोड़ा, पंचम जॉर्ज सोय, बबलू चाम्पिया और रितेश पाणिग्राही समेत बड़ी संख्या में मजदूर उपस्थित थे।














