एयरटेल तकनीशियनों को गुवा खदान में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने से बढ़ा संकट, थाना प्रभारी की पहल भी बेअसर।
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू। सेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर सेल की नगरी किरीबुरू और मेघाहातुबुरु में पिछले करीब 50 घंटे से एयरटेल की मोबाइल संचार सेवा पूरी तरह ठप है, जिससे सेल कर्मियों, अधिकारियों, प्रशासनिक विभागों, व्यापारियों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, जिस खराबी को दूर कर संचार सेवा बहाल की जा सकती थी, उसी के लिए एयरटेल के तकनीशियनों को गुवा खदान के अंदर प्रवेश देने के मामले में घंटों तक कथित तौर पर दौड़ाया जाता रहा।
सबसे गंभीर बात यह है कि तकनीशियन कोई सामान्य व्यक्ति नहीं, बल्कि खराब पड़े मोबाइल टावर की मरम्मत करने वाले अधिकृत तकनीशियन थे। इसके बावजूद उन्हें समय पर गेट पास नहीं मिलने के कारण हजारों लोगों को संचार सुविधा से वंचित रहना पड़ा।

मुख्य टावर में खराबी, कई इलाकों की संचार व्यवस्था प्रभावित
एयरटेल के तकनीशियन विपिन कुमार और अजीत कुमार ने बताया कि गुवा खदान के अंदर स्थित मुख्य मोबाइल टावर से ही किरीबुरू, मेघाहातुबुरु सहित आसपास के क्षेत्रों में लगे अन्य टावरों के माध्यम से मोबाइल संचार सेवा संचालित होती है। मुख्य टावर में तकनीकी खराबी आने के कारण इसका सीधा असर किरीबुरू और मेघाहातुबुरु की संचार व्यवस्था पर पड़ा है।
मोबाइल नेटवर्क ठप रहने के कारण लोगों को फोन करने, जरूरी कॉल रिसीव करने, इंटरनेट चलाने और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के इस्तेमाल में भारी परेशानी हो रही है। खासकर सेल कर्मियों, अधिकारियों, दुकानदारों, विद्यार्थियों और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
24 अगस्त को मिला था गेट पास, बारिश ने रोका काम
तकनीशियनों ने बताया कि 24 अगस्त की शाम करीब 5 बजे उन्हें गुवा खदान के अंदर जाने के लिए गेट पास मिला था। इसके बाद वे मौके पर पहुंचे और टावर में आई खराबी को ठीक करने का काम शुरू भी किया गया। लेकिन इसी दौरान भारी बारिश शुरू हो गई और अंधेरा होने लगा। टावर पर काम करना सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण होने के कारण कर्मचारियों को नीचे उतार लिया गया और काम रोकना पड़ा।
इसके बाद मंगलवार सुबह तकनीशियनों ने दोबारा गेट पास की मांग की, ताकि दिन के उजाले में टावर पर चढ़कर खराबी को ठीक किया जा सके।
सुबह से शाम तक गेट पास के लिए दौड़ते रहे तकनीशियन
तकनीशियनों के अनुसार, सुबह से लेकर शाम करीब 4.30 बजे तक वे गेट पास के लिए संबंधित सेल अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें समय पर प्रवेश की अनुमति नहीं मिल सकी।
यह स्थिति तब थी जब किरीबुरू और मेघाहातुबुरु की जनता लगातार संचार सेवा ठप होने से परेशान थी और मुख्य टावर में आई खराबी को ठीक करना अत्यंत जरूरी था।
किरीबुरू थाना प्रभारी ने भी किया हस्तक्षेप
मामले की गंभीरता को देखते हुए किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार ने गुवा थाना प्रभारी से संपर्क कर समस्या का समाधान कराने का आग्रह किया। इसके बाद गुवा थाना प्रभारी ने भी संबंधित सेल अधिकारियों से संपर्क कर एयरटेल तकनीशियनों को गेट पास जारी करने का आग्रह किया।
इसके बावजूद शाम करीब 4.30 बजे तक तकनीशियनों को गेट पास नहीं मिलने की बात सामने आई। इससे सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पुलिस प्रशासन की ओर से भी समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, तब भी तकनीशियनों को समय पर प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं मिली?
50 घंटे की परेशानी के बाद रामा पाण्डे ने संभाला मोर्चा
लगातार बढ़ती परेशानी के बीच सिंहभूम हलचल के वरिष्ठ पत्रकार शैलेश सिंह ने झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे को फोन कर पूरी स्थिति से अवगत कराया।

मामले की जानकारी मिलते ही रामा पाण्डे ने तत्काल गुवा जनरल ऑफिस पहुंचकर संबंधित माइंस मैनेजर से मुलाकात की। उन्होंने संचार व्यवस्था की गंभीरता और हजारों लोगों की परेशानी को देखते हुए एयरटेल तकनीशियनों को तत्काल खदान के अंदर प्रवेश देने की मांग रखी।
इसके बाद तकनीशियनों को मौके पर बुलाया गया और गेट पास की व्यवस्था कराई गई। साथ ही वाहन की व्यवस्था कराकर दोनों तकनीशियनों को मुख्य मोबाइल टावर तक भेजा गया, ताकि खराबी को जल्द से जल्द ठीक किया जा सके।
सवालों के घेरे में सेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली
इस पूरे घटनाक्रम ने सेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब मुख्य मोबाइल टावर में खराबी के कारण सेल नगरी किरीबुरू और मेघाहातुबुरु के हजारों लोग करीब 50 घंटे से संचार सुविधा से परेशान थे, तब खराबी दूर करने पहुंचे तकनीशियनों को समय पर प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
क्या खदान के अंदर किसी तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए आने वाले अधिकृत तकनीशियनों के लिए गेट पास जारी करने की कोई स्पष्ट और त्वरित व्यवस्था नहीं है? यदि व्यवस्था है, तो उसका पालन समय पर क्यों नहीं हुआ?
अब जल्द सेवा बहाल होने की उम्मीद
रामा पाण्डे के हस्तक्षेप के बाद तकनीशियनों को गेट पास मिलने और वाहन की व्यवस्था होने के बाद दोनों को टावर तक भेज दिया गया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि तकनीशियन मुख्य टावर में आई तकनीकी खराबी को जल्द दूर कर देंगे और इसके बाद किरीबुरू तथा मेघाहातुबुरु के हजारों लोगों को एक बार फिर एयरटेल की मोबाइल और इंटरनेट सेवा उपलब्ध हो सकेगी।
हालांकि, करीब 50 घंटे तक संचार व्यवस्था ठप रहने और तकनीशियनों को समय पर प्रवेश नहीं मिलने की घटना ने सेल प्रबंधन की व्यवस्था और आम नागरिकों के प्रति उसकी जवाबदेही को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।












