मूसलाधार बारिश ने खोल दी जलनिकासी व्यवस्था की पोल
रिपोर्ट शैलेश सिंह
25 अगस्त की रात किरीबुरू-मेघाहातुबुरु शहर में हुई मूसलाधार वर्षा ने एक बार फिर सेल टाउनशिप की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। कुछ घंटों की तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में नालियां ओवरफ्लो हो गईं और बारिश का पानी दर्जनों सेल कर्मियों/लोगों के घरों में घुस गया।
किरीबुरू टाउनशिप, प्रॉस्पेक्टिंग, मुर्गापाड़ा सहित कई क्षेत्रों में सेल कर्मियों और सेल आवासों में रहने वाले निजी लोगों के घर पानी से घिर गए। देखते ही देखते घरों के अंदर पानी जमा होने लगा और हजारों रुपये के कीमती घरेलू सामान पानी में डूब गए।

बेड, सोफा से लेकर डाइनिंग फर्नीचर तक खराब
घरों में घुसे पानी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। पानी की चपेट में आने से बेड, सोफा, डाइनिंग टेबल, कुर्सियां, घरेलू उपकरण और अन्य जरूरी सामान भीगकर खराब हो गए। कई परिवारों के लिए रात का समय सामान बचाने और घर से पानी निकालने में ही गुजर गया।
बारिश थमने के बाद लोगों ने घरों में जमा पानी निकालने और भीगे सामान को सुरक्षित करने की कोशिश की, लेकिन तब तक कई कीमती सामान खराब हो चुके थे।

चिल्ड्रन पार्क कॉलोनी में सेलकर्मी शिव शंकर प्रसाद का आवास बना मुसीबत का घर
सबसे खराब स्थिति मेघाहातुबुरु के एक सेल कर्मी शिव शंकर प्रसाद के किरीबुरू चिल्ड्रन पार्क कॉलोनी स्थित सेल आवास की रही। तेज बारिश के बाद आवास का किचेन, बेडरूम, डाइनिंग हॉल, बाथरूम और आंगन तक पानी से भर गया।
घर में अचानक पानी घुसने से परिवार के सामने रात में ही बड़ी परेशानी खड़ी हो गई। घर के सदस्यों को पूरी रात जागकर बितानी पड़ी। पानी से घरेलू सामानों को बचाने के लिए परिवार के लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

प्रॉस्पेक्टिंग में राजकुमार गुप्ता के घर का भी बुरा हाल
इसी तरह प्रॉस्पेक्टिंग क्षेत्र में रहने वाले राजकुमार गुप्ता के आवास में भी बारिश का पानी घुस गया। घर के कई हिस्से जलमग्न हो गए और घरेलू सामान पानी में भीगकर खराब हो गए।
किचेन से लेकर रहने के कमरों तक पानी पहुंचने के कारण परिवार के लोगों की परेशानी बढ़ गई। रातभर पानी के बीच परिवार को जागकर समय बिताना पड़ा।
सवाल: पहाड़ पर पानी घरों में कैसे पहुंचा?
किरीबुरू सारंडा क्षेत्र की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित शहर है। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब शहर ऊंचाई पर बसा है, तब भी बारिश का पानी घरों के अंदर तक आखिर क्यों पहुंच रहा है?
स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह शहर की बदहाल और जाम ड्रेनेज व्यवस्था है। मुख्य नालियों की लंबे समय से समुचित सफाई नहीं होने के कारण तेज बारिश के दौरान पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो जाती है।
मिट्टी और कचरे से अटी पड़ी हैं कई मुख्य नालियां
शहर की कई मुख्य नालियां लंबे समय से मिट्टी, गाद और कचरे से भरी पड़ी हैं। सामान्य बारिश के दौरान किसी तरह पानी निकल जाता है, लेकिन जैसे ही तेज बारिश होती है, नालियों की क्षमता जवाब दे देती है।
पानी का बहाव रुकने के बाद नालियां ओवरफ्लो करने लगती हैं और देखते ही देखते बारिश तथा नाली का पानी आसपास के आवासीय क्षेत्रों की ओर बढ़ जाता है।
सफाई के अभाव में नाली बनी घरों के लिए खतरा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नालियों की नियमित सफाई और गाद की निकासी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि बारिश से पहले मुख्य नालियों की पूरी तरह सफाई करा दी जाती तो पानी की निकासी बेहतर हो सकती थी और कई घरों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने से रोकी जा सकती थी।
हर वर्ष बारिश के दौरान सामने आने वाली इस समस्या के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होना लोगों की नाराजगी का बड़ा कारण बन रहा है।
घर में पानी, बाहर भी पानी—रातभर जागते रहे लोग
25 अगस्त की रात कई परिवारों के लिए सामान्य बरसाती रात नहीं, बल्कि मुसीबत की रात बन गई। घर में पानी घुसने के बाद लोग अपने बच्चों, जरूरी दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू वस्तुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने में जुट गए।
कई लोगों ने रातभर जागकर पानी का स्तर देखते हुए समय बिताया। लोगों को डर था कि यदि बारिश और तेज हुई तो घर के अंदर पानी और अधिक बढ़ सकता है।
लाखों की सुविधाएं, लेकिन ड्रेनेज ने सब बेकार किया
सेल टाउनशिप में रहने वाले लोगों को बेहतर आवासीय सुविधा मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन जब बारिश के दौरान घरों में पानी घुसने लगे तो तमाम सुविधाएं बेमानी साबित हो जाती हैं।
लोगों का कहना है कि घरों में लाखों रुपये के सामान और फर्नीचर मौजूद हैं। ऐसे में हर वर्ष जलभराव की आशंका के बीच रहना किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है।
केवल बारिश को दोष देकर नहीं बच सकता प्रबंधन
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार भारी बारिश को जलभराव की वजह बताकर समस्या से पल्ला झाड़ना उचित नहीं है। यदि जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त रहे और नालियों की समय-समय पर सफाई होती रहे तो बारिश के पानी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
लोगों का सवाल है कि जब शहर में भारी बारिश की संभावना हर वर्ष रहती है तो बारिश से पहले नालियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था की व्यापक समीक्षा क्यों नहीं की जाती?
अब तत्काल बड़े स्तर पर नाली सफाई की जरूरत
स्थानीय लोगों ने सेल प्रबंधन से शहर की सभी प्रमुख नालियों की तत्काल सफाई कराने, जाम हिस्सों को खोलने, मिट्टी-गाद एवं कचरे को हटाने तथा जहां आवश्यक हो वहां नालियों की क्षमता बढ़ाने की मांग की है।
साथ ही लोगों का कहना है कि केवल मुख्य नालियों की सफाई पर्याप्त नहीं होगी। जलभराव वाले सभी आवासीय क्षेत्रों का सर्वे कर पानी के प्राकृतिक बहाव और निकासी का स्थायी रास्ता तैयार करना जरूरी है।
छोटी लापरवाही, हर साल बड़ा नुकसान
25 अगस्त की बारिश ने यह साफ कर दिया कि जलनिकासी व्यवस्था में छोटी-सी लापरवाही भी लोगों के लिए बड़ा नुकसान खड़ा कर सकती है। घरों में पानी घुसने से लोगों के कीमती सामान खराब हुए और परिवारों को पूरी रात परेशानी झेलनी पड़ी।
अब जरूरत है कि बारिश खत्म होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की कार्रवाई शुरू की जाए।

बारिश फिर होगी, सवाल है—क्या व्यवस्था सुधरेगी?
किरीबुरू-मेघाहातुबुरु जैसे पहाड़ी क्षेत्र में भारी बारिश कोई असामान्य घटना नहीं है। इसलिए हर बार बारिश के बाद जलभराव की तस्वीर सामने आना व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।
25 अगस्त की रात का जलभराव प्रबंधन के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते नालियों की सफाई, जलनिकासी मार्गों का सुधार और संवेदनशील इलाकों में स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो अगली तेज बारिश में नुकसान और अधिक गंभीर हो सकता है।
अब सवाल सिर्फ इतना है कि अगली बारिश से पहले किरीबुरू की ड्रेनेज व्यवस्था सुधरेगी या फिर लोगों को दोबारा अपने ही घरों में पानी के बीच रात गुजारने को मजबूर होना पड़ेगा?











