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नई खनन नीति से ग्रामीण विकास पर संकट! ठेकेदारों ने दी सामूहिक कार्य बहिष्कार की चेतावनी

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सुनील सिरका का आरोप—दुगुने जुर्माने और ईंट-मिट्टी पर 10 गुना राजस्व वसूली से छोटे संवेदक होंगे तबाह

पत्थर खदानों की लीज बंद, बालू के वैध चालान का संकट; सरकार से नियमावली में तत्काल संशोधन की मांग

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

चाईबासा। झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग की नई खनन नियमावली को लेकर ग्रामीण संवेदकों में असंतोष गहराने लगा है। ग्रामीण संवेदक संघ के अध्यक्ष सुनील सिरका ने झारखंड लघु खनिज समनुदान द्वितीय संशोधन नियमावली, 2026 के तहत जारी अधिसूचना संख्या 2506 का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार का यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकास योजनाओं के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से सड़क, पुलिया, स्कूल और पंचायत भवन जैसे बुनियादी निर्माण कार्यों में लगे छोटे एवं मंझोले ठेकेदारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।

सुनील सिरका ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने संवेदकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नियमावली में आवश्यक संशोधन नहीं किया, तो पश्चिमी सिंहभूम जिला ग्रामीण संवेदक संघ सामूहिक रूप से सरकारी निर्माण कार्यों का बहिष्कार करेगा। साथ ही जिला मुख्यालय से लेकर राज्य मुख्यालय तक आंदोलन किया जाएगा।

राहत के बजाय ठेकेदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप

सुनील सिरका ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी निभाने वाले संवेदकों को राहत देने के बजाय नई आर्थिक चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया गया है। उनके अनुसार, खनिज परिवहन और उपयोग से संबंधित नियमों का पालन करने के लिए वैध चालान जरूरी है, लेकिन कई क्षेत्रों में निर्माण सामग्री की उपलब्धता और वैध आपूर्ति व्यवस्था ही बड़ी समस्या बनी हुई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पत्थर खदानों की लीज बंद है और बालू घाटों से वैध चालान उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, तो संवेदक निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री का इंतजाम कैसे करें? सरकार को पहले खनिजों की पर्याप्त उपलब्धता, भंडारण और वैध आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके बाद ही चालान संबंधी अनिवार्यताओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

दुगुने जुर्माने से दिवालिया होने का खतरा

संघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अवैध अथवा बिना चालान खनिज के उपयोग पर खनिज मूल्य और रॉयल्टी के दोगुने जुर्माने के साथ जिला खनिज फाउंडेशन (DMF), मैनेजमेंट फीस और सेस जोड़ने का प्रावधान छोटे एवं मंझोले संवेदकों की आर्थिक स्थिति बिगाड़ सकता है।

उनका कहना है कि ग्रामीण निर्माण कार्यों में संवेदकों का लाभ पहले ही सीमित रहता है। ऐसे में यदि निर्माण सामग्री से संबंधित चालान या आपूर्ति की समस्या के कारण भारी जुर्माना लगाया जाता है, तो ठेकेदारों के लिए परियोजनाओं को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकार से इस प्रावधान की समीक्षा कर इसे व्यावहारिक और न्यायसंगत बनाने की मांग की।

ईंट-मिट्टी पर 10 गुना राजस्व वसूली का विरोध

सुनील सिरका ने ग्रामीण क्षेत्रों में ईंट और मिट्टी से संबंधित राजस्व वसूली के प्रावधान पर भी गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ईंट और मिट्टी ग्रामीण निर्माण की बुनियादी सामग्री हैं। इन पर 10 गुना राजस्व वसूली का नियम लागू होने से स्थानीय कुटीर उद्योगों के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी ग्रामीण आवास योजनाओं की लागत भी प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने मांग की कि ऐसे प्रावधानों को लागू करने से पहले ग्रामीण अर्थव्यवस्था और निर्माण लागत पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाए। उनके अनुसार, नई व्यवस्था को केवल नए टेंडरों पर लागू किया जाना चाहिए, जबकि पहले से स्वीकृत और चल रही ग्रामीण विकास परियोजनाओं को भारी जुर्माने के प्रावधानों से बाहर रखा जाना चाहिए, ताकि पुराने कार्यों को बीच में रोकने की नौबत न आए।

ऑनलाइन चालान की जटिलता दूर करने की मांग

संघ अध्यक्ष ने दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य करने वाले संवेदकों के सामने आने वाली ऑनलाइन चालान संबंधी परेशानियों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि जहां इंटरनेट, परिवहन और वैध खनिज आपूर्ति की सुविधाएं सीमित हैं, वहां ऑनलाइन व्यवस्था की जटिलताएं कामकाज को और कठिन बना देती हैं।

उन्होंने सरकार से एक सरल, सुलभ और त्वरित वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने की मांग की, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण सामग्री की वैध खरीद और उपयोग सुनिश्चित हो सके तथा विकास योजनाएं बाधित न हों।

मांगें नहीं मानीं तो ठप हो सकते हैं सरकारी निर्माण कार्य

सुनील सिरका ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने संवेदकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया और नियमावली में आवश्यक बदलाव नहीं किए, तो पश्चिमी सिंहभूम ग्रामीण संवेदक संघ सामूहिक कार्य बहिष्कार का निर्णय ले सकता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे सरकारी निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि संघ अपनी मांगों को लेकर जिला स्तर से राज्य मुख्यालय तक आंदोलन करेगा। अब देखना होगा कि सरकार ग्रामीण संवेदकों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है और खनिज नियमों के अनुपालन के साथ ग्रामीण विकास कार्यों को सुचारु बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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