वर्षों से काम करने वाले श्रमिक आज भी अकुशल श्रेणी में! 26 दिन के रोजगार की जगह मिल रहा 20-22 दिन काम, सुरक्षा उपकरणों की कमी पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू। सेल की किरीबुरू एवं मेघाहातुबुरु खदानों और जनरल अस्पताल में कार्यरत सफाईकर्मियों तथा ठेका श्रमिकों की समस्याओं को लेकर झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे ने सेल प्रबंधन, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित ठेकेदारों पर श्रमिकों के शोषण का गंभीर आरोप लगाते हुए दुर्गापूजा के बाद बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
रामा पाण्डे संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ किरीबुरू स्थित करूवा बस्ती पहुंचे, जहां उन्होंने सफाईकर्मियों और ठेका श्रमिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान श्रमिकों ने रोजगार, मजदूरी, कार्य दिवस और सुरक्षा संसाधनों से जुड़ी परेशानियां सामने रखीं।

‘वर्षों से सेवा, फिर भी अकुशल श्रेणी में क्यों?’
रामा पाण्डे ने कहा कि कई वर्षों से सफाई और अन्य कार्यों में अपनी सेवाएं देने वाले श्रमिकों को आज भी अकुशल श्रेणी में रखा गया है। उनका आरोप है कि लंबे अनुभव और कार्य की प्रकृति को देखते हुए पात्र श्रमिकों को अर्द्धकुशल श्रेणी में रखकर नियमानुसार मजदूरी दी जानी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब श्रमिक वर्षों से लगातार जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो उनकी श्रेणी और मजदूरी का उचित निर्धारण क्यों नहीं किया जा रहा है? संघ ने इस मामले में संबंधित प्रबंधन से श्रमिकों की कार्य-प्रकृति, अनुभव और लागू मजदूरी नियमों के अनुसार समीक्षा करने की मांग की है।
आंधी, तूफान और कड़ाके की ठंड में भी सेवा, लेकिन सुरक्षा संसाधनों की कमी!
संघ अध्यक्ष ने सफाईकर्मियों को आवश्यक संसाधन और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये श्रमिक हर मौसम में कठिन परिस्थितियों के बीच शहर की साफ-सफाई और अस्पताल से जुड़े कार्यों को अंजाम देते हैं।
इसके बावजूद यदि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और जरूरी कार्य-संसाधन नहीं मिलते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। संघ ने श्रमिकों को काम की प्रकृति के अनुरूप आवश्यक सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।

26 दिन का रोजगार कहां गया? 20-22 दिन काम देकर कैसे चलेगा परिवार!
रामा पाण्डे ने आरोप लगाया कि कुछ सफाईकर्मियों और ठेका श्रमिकों को पूरे 26 दिन काम देने के बजाय केवल 20 से 22 दिन ही रोजगार दिया जाता है। इससे उनकी मासिक आय प्रभावित होती है और परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में सीमित मजदूरी पर निर्भर श्रमिकों के सामने बच्चों की पढ़ाई, राशन, इलाज और घर के अन्य खर्च पूरे करने की चुनौती रहती है। ऐसे में रोजगार के दिनों में कटौती उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर करती है।
वर्क ऑर्डर में मजदूर अधिक, लेकिन रोजगार के दिन कम?
संघ अध्यक्ष ने ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ मामलों में वर्क ऑर्डर में निर्धारित मजदूरों की संख्या से अधिक श्रमिक रखे जाते हैं और उपलब्ध श्रम-दिवसों को आपस में बांट दिया जाता है। इससे श्रमिकों को पूरे महीने रोजगार नहीं मिल पाता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में दूसरे श्रमिकों को काम पर रखने के बदले उनसे पैसे लिए जाने की शिकायतें हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संघ ने मांग की है कि संबंधित वर्क ऑर्डर, श्रमिकों की वास्तविक संख्या, उपस्थिति रजिस्टर, वेतन भुगतान और रोजगार के दिनों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
‘एक लाख वेतन पाने वाले का भी उधार, मजदूर परिवार कैसे चलाए?’
रामा पाण्डे ने श्रमिकों की आर्थिक स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक स्थायी सेल कर्मचारी को 26 दिन काम करने के बाद करीब एक लाख रुपये वेतन मिलने पर भी दुकानों में उधार रखना पड़ता है, तो अकुशल श्रेणी में 20 दिन काम करने वाले ठेका श्रमिक की आर्थिक स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना, बच्चों को पढ़ाना और बीमारी के समय इलाज कराना ठेका श्रमिकों के लिए बेहद कठिन हो जाता है। उनके मुताबिक, श्रमिकों की समस्याओं को केवल कागजी आंकड़ों से नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझकर देखना चाहिए।

दुर्गापूजा के बाद किरीबुरू-मेघाहातुबुरु में बड़े आंदोलन की तैयारी
रामा पाण्डे ने स्पष्ट किया कि यदि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो दुर्गापूजा के बाद सेल की किरीबुरू और मेघाहातुबुरु खदानों से जुड़े मुद्दों पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन से पहले संघ के पदाधिकारी लगातार तीन दिनों तक क्षेत्र की प्रत्येक बस्ती, टोला और हाटिंग में जाकर ठेका श्रमिकों तथा उनके परिवारों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान उनकी समस्याओं को विस्तार से समझा जाएगा और मांगों को संगठित रूप दिया जाएगा।
संघ का कहना है कि आंदोलन की तैयारी का उद्देश्य श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं को सामने लाना और उनके समाधान के लिए प्रबंधन पर दबाव बनाना है।
करूवा बस्ती से उठी आवाज, अब प्रबंधन के जवाब का इंतजार
करूवा बस्ती में श्रमिकों से मुलाकात के बाद अब निगाहें सेल प्रबंधन, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित ठेकेदारों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। मजदूरी की श्रेणी, रोजगार के दिनों, सुरक्षा उपकरणों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
यदि श्रमिकों की शिकायतों की जांच कर समयबद्ध समाधान नहीं किया गया, तो दुर्गापूजा के बाद प्रस्तावित आंदोलन किरीबुरू-मेघाहातुबुरु क्षेत्र में श्रमिक मुद्दों को लेकर नई हलचल पैदा कर सकता है।
ये पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद
श्रमिकों से मुलाकात के दौरान झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे, मेघाहातुबुरु इकाई के महासचिव अफताब आलम, किरीबुरू इकाई के महासचिव राजेन्द्र सिंद्रीया सहित इंतखाब आलम, सुनील पासवान, कामता प्रसाद, जगजीत सिंह गिल, दयानंद कुमार, राज नारायण शर्मा समेत दर्जनों पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद थे।
अब सवाल यह है कि वर्षों से काम कर रहे सफाईकर्मियों और ठेका श्रमिकों की मांगों पर प्रबंधन कब तक ठोस पहल करता है और क्या दुर्गापूजा के बाद प्रस्तावित आंदोलन से पहले समस्याओं का समाधान हो पाएगा?









