रोजगार, CSR और बुनियादी सुविधाओं के सात मुद्दों पर बनी थी सहमति; अब तक 10 युवाओं को ही मिला रोजगार, बाकी मांगें अधूरी
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरू। पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत छोटानागरा पंचायत के दुबिल गांव में रोजगार, सीएसआर (CSR) और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की स्थिति बनती दिख रही है। दुबिल ग्रामसभा ने चिरिया लौह अयस्क खदान प्रबंधन को पत्र लिखकर सात दिनों के भीतर पूर्व में बनी सहमतियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामसभा का कहना है कि सात प्रमुख बिंदुओं पर मौखिक सहमति बनने के बावजूद अब तक अधिकांश मांगें अधूरी हैं। यदि निर्धारित समय में सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो ग्रामीण सेल की चिरिया खदान के मुख्य द्वार पर पारंपरिक हथियारों के साथ चक्का जाम करने को तैयार हैं।

16 दिनों तक चला था शांतिपूर्ण आंदोलन
ग्रामसभा के पत्र के अनुसार, दुबिल गांव के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर 26 जून 2026 से 11 जुलाई 2026 तक चिरिया खदान के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण आंदोलन किया गया था। इस दौरान ग्रामीणों ने रोजगार और सीएसआर से संबंधित मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की थी। बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप से आंदोलन समाप्त कराने की पहल हुई।
11 जुलाई की बैठक में बनी थी सहमति
ग्रामसभा के मुताबिक, 11 जुलाई 2026 को मनोहरपुर में एसडीपीओ की मौजूदगी में स्थानीय प्रशासन, सेल प्रबंधन, ठेकेदार एनके मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड तथा मनोहरपुर प्रखंड के संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें ग्रामसभा के प्रतिनिधियों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता की गई थी। ग्रामसभा का दावा है कि बैठक में सात प्रमुख बिंदुओं पर मौखिक सहमति बनी थी, लेकिन लिखित आश्वासन नहीं दिया गया।
रोजगार से लेकर शिक्षा तक सात प्रमुख मांगें
ग्रामसभा ने अपने पत्र में बैठक के दौरान तय किए गए सात प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया है। इनमें स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने से लेकर शिक्षा, पेयजल और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा तक के मुद्दे शामिल हैं।
1. 200 में से 20 युवाओं को तत्काल रोजगार: ग्रामसभा के अनुसार, 200 बेरोजगार युवाओं में से 20 को तत्काल रोजगार देने पर सहमति बनी थी। पत्र में दावा किया गया है कि अब तक केवल 10 युवाओं को रोजगार मिल पाया है।
2. सीएसआर के तहत चार शिक्षकों की बहाली: ग्रामीणों के मुताबिक, सीएसआर के अंतर्गत चार शिक्षकों को बहाल करने पर सहमति बनी थी। ग्रामसभा का आरोप है कि इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।
3. अनुपस्थित शिक्षकों की समस्या का समाधान: ग्रामसभा ने आरोप लगाया है कि सीएसआर के तहत कार्यरत कुछ शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित नहीं रहते। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे शिक्षकों के स्थान पर नियमित रूप से पढ़ाने वाले शिक्षकों की व्यवस्था करने पर सहमति बनी थी।
4. आठ चापाकलों में जलमीनार और चार डीप बोरिंग: दुबिल गांव के आठ चापाकलों में जलमीनार की व्यवस्था तथा चार नए डीप बोरिंग कराने पर सहमति बनी थी। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की समस्या दूर करने के लिए इस मांग पर जल्द अमल जरूरी है।
5. नोट-स्लिप सप्लाई में तीन महीने के भीतर रोजगार: सीएसआर के तहत नोट-स्लिप सप्लाई के कार्य में तीन महीने के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामसभा के अनुसार, इस दिशा में भी अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
6. बच्चों के लिए डीएवी स्कूल तक बस सुविधा: दुबिल गांव के बच्चों को डीएवी स्कूल में निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करने के लिए बस मुहैया कराने पर सहमति बनी थी। ग्रामीणों का कहना है कि परिवहन सुविधा के अभाव में बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है।
7. धार्मिक स्थलों और रैयती जमीन पर बने गड्ढों की भराई: ग्रामसभा ने धार्मिक स्थलों एवं रैयती जमीन पर अवैध तरीके से खोदे गए गड्ढों को तत्काल भरने की मांग की है। पत्र के अनुसार, इन गड्ढों को भरने पर भी सहमति बनी थी।
10 युवाओं को रोजगार, बाकी मांगों पर इंतजार
ग्रामसभा ने अपने पत्र में कहा है कि रोजगार के मामले में अब तक 10 युवाओं को काम मिला है, जबकि बाकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि बैठक में बनी सहमति के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने से उनमें नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामसभा ने खान महाप्रबंधक से आग्रह किया है कि सात दिनों के भीतर शेष मांगों पर सकारात्मक पहल की जाए, ताकि क्षेत्र में रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो सके।
सात दिन की मोहलत, फिर चक्का जाम की चेतावनी
ग्रामसभा ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित सात दिनों के भीतर शेष मांगों पर ठोस पहल नहीं की गई, तो दुबिल गांव के नेतृत्व में ग्रामीण चिरिया खदान के मुख्य द्वार पर पारंपरिक हथियारों के साथ चक्का जाम करने के लिए तैयार हैं। पत्र में इस स्थिति के लिए सेल प्रबंधन और एनके मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदार ठहराने की बात कही गई है।
प्रशासन और प्रबंधन की भूमिका अहम
दुबिल ग्रामसभा का यह पत्र स्थानीय स्तर पर रोजगार, शिक्षा, पेयजल और ग्रामीण सुविधाओं से जुड़े सवालों को फिर सामने लाता है। अब देखना होगा कि सेल प्रबंधन, संबंधित ठेका कंपनी और प्रशासन सात दिनों की समय-सीमा के भीतर ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। समय रहते समाधान की पहल नहीं हुई, तो क्षेत्र में फिर से आंदोलन शुरू होने की आशंका है।









