“गो ग्रीन, लिव क्लीन” का दिया गया संदेश
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
केन्द्रीय विद्यालय मेघाहातुबुरु, रांची रीजन द्वारा “प्लास्टिक फ्री कैंपस – ग्रीन स्कूल” अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। “गो ग्रीन, लिव क्लीन” के संदेश के साथ छोटे-छोटे बदलावों से बड़े परिवर्तन लाने पर जोर दिया गया है।

कक्षा में ‘ग्रीन मॉनिटर’: बच्चे बनेंगे बदलाव के वाहक
विद्यालय प्रशासन ने हर कक्षा में “ग्रीन मॉनिटर” नियुक्त करने की योजना बनाई है।
* ये छात्र अपने साथियों को रोजाना पर्यावरण के प्रति जागरूक करेंगे
* प्लास्टिक के उपयोग को रोकने और स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएंगे
इस पहल का उद्देश्य बच्चों में बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
ईको-किट लाना अनिवार्य: प्लास्टिक पर सख्त रोक
विद्यालय ने छात्रों के लिए “ईको-किट” अपनाने की अपील की है, जिसमें शामिल हैं—
* स्टील की पानी की बोतल
* कपड़े या जूट का बैग
* स्टील या अन्य सुरक्षित टिफिन बॉक्स
* किसी भी प्रकार के प्लास्टिक सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध
यह कदम प्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
5R नियम से बनेगा हरित भविष्य
विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए “5R नियम” को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है—
Refuse (इंकार करें): प्लास्टिक का उपयोग न करें
Reduce (कम करें): कम उपयोग करें, कम कचरा उत्पन्न करें
Reuse (पुनः उपयोग): वस्तुओं का बार-बार उपयोग करें
Repurpose/Repair (नया रूप दें): पुरानी चीजों को नया जीवन दें
Recycle (पुनर्चक्रण): कचरे को अलग कर रीसायकल करें
अभिभावकों और समाज से सहयोग की अपील
विद्यालय प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों से सहयोग मांगा है।
घर पर भी ईको-फ्रेंडली आदतों को अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि बच्चे स्कूल के साथ-साथ घर में भी पर्यावरण के प्रति सजग रहें।

प्राचार्य डॉ. आशीष कुमार की अपील
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. आशीष कुमार ने अभिभावकों से विशेष अपील करते हुए कहा—
“अगले सत्र से अपने बच्चों को प्लास्टिक बोतल, टिफिन बॉक्स या अन्य प्लास्टिक सामग्री के बजाय स्टील या अन्य सुरक्षित विकल्पों के साथ स्कूल भेजें। टिफिन को जूट या कपड़े के बैग में रखें। यह छोटा कदम बच्चों के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है।”
प्लास्टिक से बढ़ता खतरा: सेहत पर गंभीर असर
विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है—
* प्लास्टिक से निकलने वाले हानिकारक रसायन (BPA आदि) हार्मोन असंतुलन पैदा करते हैं
* कैंसर, अस्थमा और त्वचा रोगों का खतरा बढ़ता है
* गर्म भोजन या पानी में प्लास्टिक का उपयोग शरीर में विषैले तत्व पहुंचाता है
* बच्चों के विकास और इम्यून सिस्टम पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है
स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ता कदम
केन्द्रीय विद्यालय मेघाहातुबुरु का यह अभियान न केवल स्कूल परिसर को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल है, बल्कि समाज को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का संदेश देता है।
“आइए, मिलकर बनाएं—प्लास्टिक फ्री मेघाहातुबुरु”
विद्यालय का यह संदेश स्पष्ट है कि यदि सभी मिलकर छोटे-छोटे प्रयास करें, तो एक स्वच्छ, स्वस्थ और हरित भविष्य संभव है।












