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महिला महाविद्यालय की छात्राओं का फूटा गुस्सा, संकाय स्थानांतरण के फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

On: May 11, 2026 4:01 PM
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“महिला शिक्षा और सुरक्षा से समझौता नहीं” — छात्राओं ने प्राचार्य के माध्यम से कुलपति को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत महाविद्यालयों को संकायवार स्थानांतरित करने के झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के फैसले के खिलाफ सोमवार को महिला महाविद्यालय की छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। छात्राओं ने कॉलेज परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए इस निर्णय को महिला शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसरों पर सीधा हमला बताया।
छात्राओं ने सरकार द्वारा जारी पत्रांक-05/प०-08/202389 के तहत लिए गए फैसले का विरोध करते हुए प्राचार्या के माध्यम से कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति को ज्ञापन सौंपा और मांग की कि महिला महाविद्यालय के किसी भी संकाय का स्थानांतरण तत्काल रोका जाए।

“महिला कॉलेज की मूल भावना को खत्म करने की साजिश”

प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने कहा कि महिला महाविद्यालय की स्थापना विशेष रूप से महिलाओं को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण और समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। ऐसे में संकायों का अन्य महाविद्यालयों में स्थानांतरण महिला कॉलेज की मूल अवधारणा और गरिमा को कमजोर करने वाला कदम है।
छात्राओं का कहना था कि यदि विभिन्न संकायों को दूसरे कॉलेजों में भेजा गया तो महिला छात्राओं को असुरक्षा, असुविधा और भेदभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित होगी।

“हो विभाग को लेकर सरकार की चुप्पी चिंताजनक”

विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने विशेष रूप से महाविद्यालय के हो विभाग को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से प्रत्येक सेमेस्टर में बड़ी संख्या में छात्राएं इस विभाग में अध्ययन कर रही हैं, लेकिन सरकारी अधिसूचना में इस महत्वपूर्ण विभाग को सुचारू रूप से संचालित रखने को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी भाषा और संस्कृति से जुड़े विभागों की अनदेखी कर सरकार क्षेत्रीय अस्मिता को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

“मांगें नहीं मानी गईं तो होगा व्यापक आंदोलन”

प्रदर्शनकारी छात्राओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
छात्राओं ने कहा—
“महिला शिक्षा और सुरक्षा के सवाल पर हम किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगी। सरकार को महिला महाविद्यालय की गरिमा और छात्राओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।”
छात्राओं ने संभाली आंदोलन की कमान
आज के आंदोलन का नेतृत्व कॉलेज की छात्राएं माधुरी हेम्ब्रम, संगीता जेराई, अनिता आल्डा और नीलम जामुदा ने किया। वहीं मौके पर जिला स्तर के छात्र प्रतिनिधि सगुन हाँसदा और जतिन दास सहित अन्य छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे।
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने एक स्वर में कहा कि महिला कॉलेज की पहचान और अस्तित्व बचाने के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं। इसकी जानकारी सत्येन महतो (छात्र प्रतिनिधि) ने दी।

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