स्थानीय ग्रामीणों और विस्थापितों की मांगों को बताया जायज, वार्ता से समाधान निकालने की अपील
गुवा संवाददाता।
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने शनिवार को गुवा रेलवे मार्केट स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सेल प्रबंधन को मुंडा-मानकी के साथ सीधी और सकारात्मक वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उन्हें बांटकर राजनीति करनी चाहिए।
रामा पांडे ने कहा कि सारंडा क्षेत्र में स्थानीय ग्रामीणों और खदान प्रभावित लोगों के बीच लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सेल प्रबंधन समस्याओं के समाधान के बजाय मुंडा-मानकी व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुवा सेल प्रबंधन मुंडा-मानकी को दो हिस्सों में बांटकर अपना हित साधने का प्रयास कर रहा है, जिससे ग्रामीणों के बीच भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा हो रही है।

“एकजुट होकर रखें अपनी बात”
प्रेस वार्ता के दौरान रामा पांडे ने सभी मुंडा-मानकी संघों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अलग-अलग गुटों में बंटकर लड़ाई लड़ने से स्थानीय लोगों की आवाज कमजोर होगी। यदि सभी पारंपरिक ग्राम प्रधान और ग्रामीण संगठन एक मंच पर आकर अपनी मांगों को मजबूती से रखें, तो सेल प्रबंधन को समाधान निकालने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि स्थानीय रोजगार, विस्थापितों के अधिकार, खदान प्रभावित गांवों की समस्याएं और युवाओं को काम देने की मांग पूरी तरह जायज है। इन मांगों को नजरअंदाज करना क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय होगा।
“स्थानीयों के हक की लड़ाई जारी रहेगी”
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि उनका संगठन हमेशा से स्थानीय ग्रामीणों, विस्थापितों और मजदूरों के हितों की लड़ाई लड़ता आया है। आगे भी यदि जरूरत पड़ी तो संगठन ग्रामीणों और मुंडा-मानकी के समर्थन में आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा कि खदानों से सबसे अधिक प्रभावित स्थानीय लोग ही होते हैं। धूल, प्रदूषण, विस्थापन और संसाधनों के दोहन का असर गांवों पर पड़ता है, इसलिए रोजगार और सुविधाओं में भी स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
“राजनीति नहीं, समाधान चाहिए”
रामा पांडे ने सेल प्रबंधन से अपील करते हुए कहा कि वह राजनीति और गुटबाजी का खेल बंद करे तथा संवाद और सहमति के जरिए समस्याओं का समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि बातचीत ही किसी भी विवाद का स्थायी समाधान हो सकता है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि स्थानीय लोगों की समस्याओं को लगातार अनदेखा किया गया तो आने वाले दिनों में असंतोष और आंदोलन और अधिक तेज हो सकता है। सारंडा क्षेत्र के ग्रामीण अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो चुके हैं और वे अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार














