जीरो प्वाइंट पर बिना क्रशिंग आयरन ओर का पहाड़, टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
गुवा संवाददाता।
गुवा सेल खदान क्षेत्र में आयरन ओर से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने खुद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग कर दी है।

जीरो प्वाइंट पर हकीकत देख चौंके मधु कोड़ा
मधु कोड़ा ने गुवा खदान क्षेत्र के जीरो प्वाइंट का दौरा कर आयरन ओर की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। उन्हें पहले से सूचना मिली थी कि आयरन ओर क्रशिंग से जुड़े टेंडर में गड़बड़ी की जा रही है।
स्थल निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। बड़ी मात्रा में आयरन ओर बिना क्रशिंग के ही जमा पाया गया। यह ढेर इतना विशाल था कि वह किसी छोटे पहाड़ जैसा नजर आ रहा था।
बिना क्रशिंग के ही पास हो रहा बिल?
मधु कोड़ा ने स्पष्ट आरोप लगाया कि ठेकेदार द्वारा आयरन ओर का क्रशिंग किए बिना ही बिल पास करा लिया गया है। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह न सिर्फ तकनीकी अनियमितता बल्कि सीधे-सीधे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला बनता है।
उनका कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया से खदान प्रबंधन और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
“यह भ्रष्टाचार की बू दे रहा मामला”
निरीक्षण के बाद मधु कोड़ा ने कहा कि यह मामला प्रथम दृष्टया बेहद गंभीर प्रतीत होता है और इसमें भ्रष्टाचार की आशंका साफ दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के इस तरह दुरुपयोग से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है और यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
केंद्र सरकार तक पहुंचेगी शिकायत
मधु कोड़ा ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मामले को लेकर चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह केंद्रीय इस्पात मंत्री, इस्पात मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच किसी स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
मधु कोड़ा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, भ्रष्टाचार या मिलीभगत सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकारी खदानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
स्थानीय स्तर पर बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद गुवा क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म हो गया है। स्थानीय लोगों और मजदूरों के बीच यह मुद्दा तेजी से फैल रहा है।
लोगों का मानना है कि अगर सही तरीके से जांच होती है, तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही, वे उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार मामले को दबाया नहीं जाएगा और दोषियों तक कार्रवाई जरूर पहुंचेगी।
पारदर्शिता की मांग तेज
गुवा खदान क्षेत्र में लंबे समय से टेंडर और कार्य निष्पादन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि खनन क्षेत्र में सख्त निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत है।
यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच होती है, तो यह न केवल गुवा बल्कि पूरे खनन क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन सकता है।













