500 स्थानीय युवकों को रोजगार देने की मांग पर अड़े ग्रामीण, उत्पादन पूरी तरह ठप
गुवा संवाददाता।
गुवा सेल खदान क्षेत्र में सोमवार सुबह 4 बजे से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन देर शाम तक जारी रहा। 12 गांव के मुंडा-मानकी संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री Madhu Koda कर रहे हैं। आंदोलन के कारण गुवा खदान क्षेत्र में लौह अयस्क उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। खदान, क्रशर प्लांट तथा प्रथम एवं द्वितीय पाली का कार्य ठप रहा, जिससे सेल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है।
सुबह से ही हजारों की संख्या में ग्रामीण, मजदूर और मुंडा-मानकी प्रतिनिधि सड़क पर उतर आए और खदान क्षेत्र की आवाजाही बाधित कर दी। आंदोलनकारियों ने भारी वाहनों का परिचालन रोक दिया, जिसके कारण खदान क्षेत्र में उत्पादन और परिवहन व्यवस्था चरमरा गई।

मधु कोड़ा पहुंचे आंदोलन स्थल, तीन दौर की वार्ता बेनतीजा
दोपहर करीब 12 बजे पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा आंदोलन स्थल पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद आंदोलनकारियों और सेल प्रबंधन के बीच लगातार तीन दौर की वार्ता हुई। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में चली लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
वार्ता के दौरान मुंडा-मानकी प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि स्थानीय 500 युवकों को तत्काल ठेका मजदूर के रूप में रोजगार दिया जाए। इसके अलावा पहले से हटाए गए 72 मजदूरों को भी पुनः काम पर रखा जाए। दूसरी ओर सेल प्रबंधन सीमित संख्या में रोजगार देने के प्रस्ताव पर अड़ा रहा। इसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता विफल हो गई।
वार्ता असफल होने के बाद आंदोलनकारियों ने प्रबंधन के प्रस्ताव को खारिज करते हुए आंदोलन को और तेज करने की घोषणा कर दी। आंदोलन स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित निर्णय चाहिए।
“स्थानीयों के हक के लिए लड़ाई जारी रहेगी” : मधु कोड़ा
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुवा और आसपास के गांवों के लोग वर्षों से खदानों का बोझ झेल रहे हैं, लेकिन रोजगार के नाम पर स्थानीय युवाओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यहां की जमीन, जंगल और संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का है।
मधु कोड़ा ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह जायज है और जब तक स्थानीय युवाओं को रोजगार, विस्थापितों को अधिकार और हटाए गए मजदूरों की बहाली पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन बार-बार वार्ता के नाम पर सिर्फ समय बिताने का काम कर रहा है।
पहले भी मिला था आश्वासन, नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले 20 अप्रैल 2026 को भी चक्का जाम आंदोलन किया गया था। उस समय प्रशासन और सेल प्रबंधन ने मांगों पर सकारात्मक पहल का भरोसा देकर आंदोलन स्थगित कराया था। बाद में 5 मई 2026 को हुई वार्ता भी निष्फल रही।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई बार लिखित और मौखिक आश्वासन दिए गए, लेकिन रोजगार और मजदूरों की बहाली को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण इस बार ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

उत्पादन प्रभावित, प्रबंधन पर बढ़ा दबाव
अनिश्चितकालीन चक्का जाम के कारण गुवा खदान क्षेत्र में लौह अयस्क उत्पादन और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। खदान से जुड़े कई कार्य रुक गए हैं। आंदोलन लंबा खिंचने की स्थिति में सेल को भारी आर्थिक नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं प्रशासन लगातार आंदोलनकारियों और प्रबंधन के बीच समाधान निकालने की कोशिश में जुटा हुआ है, लेकिन देर शाम तक कोई सहमति नहीं बन सकी। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मांगों पर लिखित समझौता नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।











