हर सुनवाई में अगली तारीख की मांग, न जवाब दाखिल हुआ न दस्तावेज : यूनियन अधिवक्ता ने कोर्ट से उचित कार्रवाई की मांग की
Complaint केस की नोटिस का भी नहीं दिया जवाब, हाईकोर्ट से केस खारिज होने की प्रतिलिपि CGIT में दाखिल करने का निर्देश
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से जुड़े मामले में शुक्रवार को CGIT धनबाद कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सेल प्रबंधन की ओर से अधिवक्ता उपस्थित हुए, लेकिन केस से संबंधित आवश्यक दस्तावेज एवं जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
बताया गया कि मामले की पिछली कई सुनवाइयों में सेल प्रबंधन की ओर से अगली तारीख की मांग की जाती रही है। इसके बावजूद अब तक केस से संबंधित आवश्यक evidence, proof एवं supporting documents कोर्ट में दाखिल नहीं किए गए हैं। वहीं, बायोमेट्रिक केस से संबंधित Complaint Case में कोर्ट द्वारा जारी नोटिस का जवाब भी प्रबंधन की ओर से दाखिल नहीं किया गया है।

दस्तावेज जमा करने की बात कहकर कोर्ट परिसर से चले गए अधिवक्ता
सुनवाई के दौरान प्रबंधन के अधिवक्ता ने दस्तावेज जमा करने की बात कही, लेकिन दस्तावेज दाखिल किए बिना ही कोर्ट परिसर से चले गए। इस पर यूनियन की ओर से अधिवक्ता श्री सोमेन्द्र नाथ घोष ने कोर्ट के समक्ष प्रबंधन की कार्यशैली पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कोर्ट में कहा कि प्रबंधन प्रत्येक सुनवाई में अगली तारीख की मांग करता है, लेकिन न तो अपना जवाब दाखिल कर रहा है और न ही आवश्यक साक्ष्य एवं दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार मामले को लंबित रखने से स्पष्ट है कि केस में विलंब प्रबंधन की ओर से किया जा रहा है। उन्होंने कोर्ट से मामले में उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया।
Complaint केस पर नोटिस का भी जवाब नहीं
बायोमेट्रिक उपस्थिति मामले से संबंधित Complaint Case को समाप्त कराने के लिए सेल प्रबंधन द्वारा CGIT कोर्ट की अनुमति के बिना रांची हाईकोर्ट का रुख किए जाने का भी मामला सुनवाई के दौरान उठाया गया। यूनियन के अनुसार, रांची हाईकोर्ट ने उक्त मामले को खारिज कर दिया है।
यूनियन की ओर से मांग की गई कि रांची हाईकोर्ट के आदेश की प्रतिलिपि भी CGIT धनबाद कोर्ट में दाखिल की जाए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड पर स्पष्ट हो सके।
अगली सुनवाई अक्टूबर में संभावित
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ किरीबुरू के महासचिव राजेन्द्र सिंद्रीया ने बताया कि मामले में अगली सुनवाई अक्टूबर माह में होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन द्वारा लगातार दस्तावेज और जवाब दाखिल नहीं किए जाने से मामले की सुनवाई में विलंब हो रहा है। अब कोर्ट मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की स्थिति में होगा।
राजेन्द्र सिंद्रीया ने कहा कि मजदूरों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में यूनियन न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपना पक्ष मजबूती से रख रही है और उम्मीद है कि कोर्ट मामले में शीघ्र उचित निर्णय की दिशा में आगे बढ़ेगा।












