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सेल के खिलाफ फूटा जनआक्रोश! 72 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीण, रोजगार और पर्यावरण पर आर-पार की लड़ाई

On: April 15, 2026 3:35 PM
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रांजाबुरु खदान परियोजना के बाहर उबाल, “हक नहीं तो काम भी नहीं” का अल्टीमेटम

सेल गुवा जनरल ऑफिस के सामने भूख हड़ताल शुरू

रिपोर्ट शैलेश सिंह/संदीप गुप्ता 

पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा क्षेत्र में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की रांजाबुरु खदान परियोजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। दर्जनों ग्रामीण—जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं—सेल गुवा जनरल ऑफिस के सामने 72 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। यह आंदोलन 15 अप्रैल से शुरू हुआ है और इलाके में इसे लेकर माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है।

रोजगार से वंचित, अब सड़क पर उतरे ग्रामीण

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि खनन कार्यों से करोड़ों की कमाई करने वाली सेल प्रबंधन स्थानीय लोगों को रोजगार देने में लगातार अनदेखी कर रही है। बेरोजगार युवकों को प्राथमिकता देने की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, जमीन पर कुछ नहीं उतरा।

पहले धरना, फिर थाली-कटोरा… अब भूख हड़ताल

ग्रामीणों ने बताया कि यह आंदोलन अचानक नहीं, बल्कि लगातार उपेक्षा का नतीजा है।
* 13 फरवरी को मुंडा-मानकी की अध्यक्षता में धरना-प्रदर्शन किया गया
* 27 फरवरी को थाली-कटोरा बजाकर विरोध जताया गया
लेकिन 39 दिन बीत जाने के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे नाराज होकर अब ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है।

खदान का जहर खेतों तक, किसान बेहाल

आंदोलन सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने खनन से हो रहे पर्यावरणीय विनाश को भी बड़ा मुद्दा बनाया है।
उनका आरोप है कि खदानों से निकलने वाली धूल, मिट्टी और लाल पानी सीधे खेतों में पहुंच रहा है, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर होती जा रही है। इससे किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।

कारो नदी भी प्रदूषण की चपेट में

ग्रामीणों ने बताया कि खनन गतिविधियों का असर कारो नदी पर भी पड़ रहा है। यह नदी गांव के लोगों के लिए पीने और घरेलू उपयोग का मुख्य स्रोत है। लेकिन अब इसमें प्रदूषण बढ़ने से बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने इसे “जीवन रेखा पर संकट” करार दिया है।

ग्राम सभा से निकला आंदोलन का फैसला

इस आंदोलन की नींव 7 अप्रैल को काशियापेचा गांव में आयोजित ग्राम सभा में रखी गई थी। वहां सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 15 अप्रैल से 72 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। उसी फैसले के तहत अब यह आंदोलन धरातल पर उतर चुका है।

20 अप्रैल से चक्का जाम की चेतावनी

आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर 72 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो 20 अप्रैल से सेल के सभी कार्यों को पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा। चक्का जाम कर खदान संचालन को रोकने की रणनीति तैयार कर ली गई है।

मानकी सुरेश चाम्पिया के नेतृत्व में संघर्ष तेज

इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व सारंडा पीढ़ के मानकी सुरेश चाम्पिया कर रहे हैं। उनके साथ मुंडा सींगा सुरीन, मुंडा बिरसा सुरीन, मंगता सुरीन, लालू चाम्पिया, गोमाई चाम्पिया, सोमा चाम्पिया, जेना बाड़ींग, लांगो चाम्पिया, ननिका सुरीन, मसूरी सुरीन और सोमवारी सुरीन सहित कई स्थानीय प्रतिनिधि सक्रिय रूप से मोर्चा संभाले हुए हैं।

संदेश साफ: “हक नहीं तो खदान बंद”

गुवा में चल रही यह भूख हड़ताल अब सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर उन्हें रोजगार, सम्मान और सुरक्षित पर्यावरण नहीं मिलेगा, तो खदान का संचालन भी नहीं होने देंगे।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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