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सारंडा के जोजोगुटू में संथाल समाज का बड़ा मंथन, एकता और परंपरा बचाने का लिया संकल्प

On: April 15, 2026 3:19 PM
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9 मौजा के ग्रामीणों की विशेष बैठक, धर्मांतरण और सामाजिक बिखराव पर सख्त रुख

परंपरा और अस्तित्व बचाने को जुटे 9 मौजा के ग्रामीण

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

सारंडा के जोजोगुटू गांव में संथाल सरना समाज के 9 मौजा के ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सारंडा पीढ़ परगना रूईदास सोरेन ने की। इस दौरान समाज के विकास, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संरक्षित रखने को लेकर गंभीर मंथन हुआ।

एकता ही ताकत, विकास ही लक्ष्य

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि संथाल सरना समाज के समग्र विकास और उत्थान के लिए सभी लोगों को आपसी एकता के साथ मिलकर काम करना होगा। समाज के हर वर्ग तक विकास की रोशनी पहुंचे, इसके लिए संगठित प्रयासों पर जोर दिया गया।

सरकारी योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे

ग्रामीणों ने यह भी तय किया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता होगी। योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उन्हें धरातल पर उतारने की दिशा में सामूहिक पहल की जाएगी।

धर्मांतरण और सामाजिक विचलन पर कड़ा फैसला

बैठक में एक अहम और सख्त प्रस्ताव पारित करते हुए संथाल सरना धर्म के लोगों को दूसरे धर्म में धर्मांतरण और समाज से बाहर शादी-ब्याह करने से रोकने का निर्णय लिया गया। इसे समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा के संरक्षण के लिए जरूरी बताया गया।

‘सारंडा संथाल जुमीद समिति’ का गठन

नई समिति से सामाजिक मजबूती की उम्मीद
बैठक के दौरान समाज को संगठित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से “सारंडा संथाल जुमीद समिति” का गठन किया गया। इस समिति के जरिए समाज के मुद्दों को संगठित रूप से उठाने और समाधान की दिशा में काम करने की रणनीति बनाई गई।

ये बने समिति के पदाधिकारी

समिति में 9 मौजा के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए पदाधिकारियों की घोषणा की गई—
* परगना बाबा (मनोतन) – रूईदास सोरेन
* सुतरात – सोनाराम माझी
* अध्यक्ष – रमेश हंसदा
* सचिव – कामेश्वर मांझी
* कोषाध्यक्ष – प्रदीप माझी
इसके अलावा कार्यसमिति में सुनील हंसदा, गोपाल टुडू, बामिया माझी समेत कई सक्रिय सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई।

संदेश साफ: अपनी पहचान, अपनी परंपरा

बैठक में लिए गए फैसलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि संथाल सरना समाज अब अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को लेकर पूरी तरह सजग है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि अपनी पहचान और विरासत की रक्षा के लिए अब हर स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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