मैगजीन लेबल क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, लिखित समझौते को पूरी तरह लागू करने की मांग
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
गुवा। सेल की गुवा खदान अंतर्गत रांजाबुरु खदान में स्थानीय रोजगार समेत पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू कराने की मांग को लेकर 10 अगस्त से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन 16 अगस्त को लगातार सातवें दिन भी शांतिपूर्ण रूप से जारी रहा। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले मानकी लागुड़ा देवगम, गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल, झामुमो नेता बृंदावन गोप तथा विभिन्न गांवों के मुंडाओं के नेतृत्व में ग्रामीण और बेरोजगार युवा आंदोलन स्थल पर डटे रहे।
सातवें दिन भी मैगजीन लेबल क्षेत्र में जुटे ग्रामीण
आंदोलनकारी सातवें दिन भी मैगजीन लेबल क्षेत्र में एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करते रहे। ग्रामीणों ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और जब तक पूर्व में हुए लिखित समझौते के बिंदुओं को धरातल पर लागू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

लिखित समझौते के अनुपालन पर जोर
आंदोलनकारियों का कहना है कि पूर्व में स्थानीय रोजगार और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर सेल प्रबंधन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच समझौता हुआ था। समझौते में खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, रैक लोडिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी समेत कई बिंदुओं पर सहमति बनी थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि समझौते के बावजूद इन मांगों का पूरी तरह अनुपालन नहीं हुआ है। इसी वजह से ग्रामीणों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
बाहरी लोगों को रोजगार देने का आरोप
ग्रामीणों ने एक बार फिर आरोप लगाया कि खदान से जुड़े विभिन्न कार्यों में स्थानीय युवाओं की अपेक्षा बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि खदान प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, जबकि उनके क्षेत्र में संचालित खनन गतिविधियों में उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है।
‘मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन’
मुखिया राजू सांडिल सहित अन्य आंदोलनकारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि अब केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। ग्रामीणों को पूर्व में हुए लिखित समझौते के सभी बिंदुओं का वास्तविक रूप से अनुपालन चाहिए।
आंदोलनकारियों ने कहा कि स्थानीय रोजगार, ग्रामीणों के अधिकार और खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सात दिनों से लगातार डटे हैं ग्रामीण
10 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार सात दिनों से ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं की मौजूदगी के बीच आंदोलन शांतिपूर्ण रूप से चल रहा है। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे किसी प्रकार के टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को भी तैयार नहीं हैं।
सारंडा विकास समिति के नेतृत्व में जारी इस आंदोलन को विभिन्न गांवों के मुंडाओं और ग्रामीणों का समर्थन मिल रहा है। आंदोलनकारियों ने एक बार फिर सेल प्रबंधन से पूर्व समझौते को पूरी तरह लागू करते हुए स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की है।





















