सारंडा विकास समिति ने मंटू मिश्रा, सुपरवाइजर और हाईवा चालकों की भूमिका की जांच की मांग की; पूर्व समझौते के बावजूद आंदोलन खत्म कराने की कथित साजिश का लगाया आरोप
रिपोर्ट : शैलेश सिंह | गुवा
सेल गुवा की रांजाबुरू खदान में सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले 10 अगस्त से चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान आंदोलन स्थल पर हाईवा वाहन घुसाने और आदिवासी महिला आंदोलनकारियों को कुचलने के प्रयास का आरोप सामने आया है। इस संबंध में सारंडा विकास समिति के अध्यक्ष सुखराम सांडिल उर्फ राजू सांडिल ने गुवा थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
आवेदन में समिति ने आरोप लगाया है कि सेल गुवा खदान से प्रभावित विभिन्न गांवों के सैकड़ों आदिवासी महिला-पुरुष अपनी लंबित मांगों को लेकर शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। समिति का कहना है कि यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं किया गया है, बल्कि पूर्व में भी इन्हीं मांगों को लेकर आंदोलन हो चुका है।

पूर्व समझौते का पालन नहीं होने का आरोप
समिति के अनुसार पूर्व आंदोलन के दौरान तत्कालीन मंत्री दीपक बिरुवा, जगन्नाथपुर के अनुमंडल पदाधिकारी, नोवामुंडी के प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा सेल गुवा खदान के सीजीएम की मौजूदगी में संबंधित पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि समझौते में तय कई बिंदुओं का अब तक पूर्ण पालन नहीं किया गया। इसी वजह से ग्रामीणों को दोबारा आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा।
‘रोकने के बावजूद हाईवा आगे बढ़ाया’
थाना में दिए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि आंदोलन शुरू होने के कुछ घंटे बाद मां सरला ठेका कंपनी, जिसके मालिक के रूप में मंटू मिश्रा का नाम आवेदन में दिया गया है, के सुपरवाइजर के निर्देश पर 5-6 हाईवा चालक वाहन लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंचे।
समिति का आरोप है कि आंदोलनकारियों द्वारा वाहनों को रोकने के बावजूद उन्हें आगे बढ़ाने की बात कही गई। इसी दौरान महिलाओं द्वारा रास्ता रोकने पर एक हाईवा चालक ने कथित तौर पर महिलाओं की ओर वाहन बढ़ा दिया। समिति ने इसे महिलाओं को कुचलने का प्रयास बताया है।
आवेदन में आगे आरोप लगाया गया है कि इसके बाद हाईवा चालक द्वारा महिला एवं पुरुष आंदोलनकारियों के साथ गाली-गलौज की गई तथा कुछ महिला आंदोलनकारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और अनुचित शारीरिक स्पर्श किया गया।
आंदोलन को उग्र कराने की कथित साजिश का आरोप
सारंडा विकास समिति ने इस घटना को महज संयोग मानने के बजाय इसके पीछे आंदोलन को दबाने या उग्र कराने की कथित साजिश की आशंका जताई है। आवेदन में मंटू मिश्रा एवं संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की मांग करते हुए कहा गया है कि यदि शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच भारी वाहनों को जानबूझकर भेजा गया था, तो इससे गंभीर हादसा हो सकता था और किसी की जान भी जा सकती थी।
समिति ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि हाईवा को आंदोलन स्थल तक किसके निर्देश पर भेजा गया और वहां मौजूद चालकों तथा सुपरवाइजर की वास्तविक भूमिका क्या थी।
महिला पुलिस पदाधिकारी की मौजूदगी में बयान दर्ज करने की मांग
आवेदन में महिला आंदोलनकारियों के बयान महिला पुलिस पदाधिकारी की मौजूदगी में दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही घटनास्थल के वीडियो और फोटो, सीसीटीवी फुटेज, हाईवा के नंबर, चालकों की पहचान तथा मोबाइल फोन सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आग्रह किया गया है।
समिति ने पुलिस से मंटू मिश्रा, संबंधित सुपरवाइजर और हाईवा चालकों की भूमिका की जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। आवेदन में जांच के दौरान अपराध के तत्व पाए जाने पर बीएनएस की धारा 74, 109 समेत अन्य लागू धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

पूर्व समझौते और वर्तमान घटना की भी जांच की मांग
सारंडा विकास समिति ने पुलिस से यह भी मांग की है कि पूर्व में हुए लिखित समझौते और वर्तमान आंदोलन के दौरान सामने आई घटना के बीच किसी प्रकार के संबंध की भी निष्पक्ष जांच की जाए। समिति अध्यक्ष सुखराम सांडिल उर्फ राजू सांडिल ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और किसी भी प्रकार की हिंसा या टकराव आंदोलनकारियों के हित में नहीं है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आंदोलनकारियों, विशेषकर महिला आंदोलनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।














