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बुंडू में एसडीएम कोर्ट के आदेश की खुलेआम अनदेखी? विधवा महिला ने उठाए प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल

On: August 7, 2026 3:36 PM
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एसडीएम का आदेश है, फिर भी कब्जा बरकरार’—पीड़िता ने मुख्यमंत्री से लेकर प्रशासन तक लगाई न्याय की गुहार

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

रांची जिले के बुंडू में एक विधवा महिला द्वारा एसडीएम कोर्ट के आदेश के बावजूद अपनी संपत्ति का कब्जा नहीं मिलने का मामला अब सुर्खियों में आ गया है। स्वयं को स्वतंत्रता सेनानी परिवार की बहू बताने वाली मीना देवी ने सार्वजनिक रूप से प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से सवाल करते हुए न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एसडीएम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद आज तक कार्रवाई नहीं होने से कानून के शासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

पति की मौत के बाद शुरू हुआ संघर्ष

मीना देवी का कहना है कि उनके पति स्वर्गीय प्रेम कुमार भगत के निधन के बाद बुंडू मेन रोड स्थित उनकी दुकान को किरायेदार ने खाली करने से इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि जब उन्होंने दुकान खाली कराने की मांग की तो उन्हें और उनके परिवार की महिलाओं को सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया तथा प्रभावशाली लोगों का नाम लेकर डराने-धमकाने का प्रयास भी किया गया।

उन्होंने कहा कि तमाम दबावों के बावजूद उन्होंने कानून पर भरोसा रखा और बुंडू एसडीएम कोर्ट की शरण ली।

’11 मई को एसडीएम का आदेश, फिर भी कब्जा नहीं’

पीड़िता द्वारा किए गए दावे के अनुसार, दोनों पक्षों की सुनवाई और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद 11 मई 2026 को एसडीएम ने किरायेदार की बेदखली का आदेश पारित किया। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि निर्धारित अवधि में दुकान खाली नहीं होती है तो संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) और थाना प्रभारी की सहायता से कब्जा दिलाया जाए।

मीना देवी का दावा है कि उन्होंने 15 जून 2026 को आदेश की प्रति के साथ सीओ और थाना प्रभारी को आवेदन दिया तथा 1 जुलाई 2026 को रांची ग्रामीण एसपी के जनता दरबार में भी शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला।

‘आदेश है, कार्रवाई क्यों नहीं?’

पीड़िता ने कई सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एसडीएम कोर्ट के आदेश के अनुपालन पर कोई रोक नहीं है तो फिर स्थानीय प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रभावशाली लोगों के नाम के कारण एसडीएम के आदेश का पालन नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि कई महीने बीत जाने के बावजूद कथित किरायेदार दुकान पर कब्जा बनाए हुए है, जिससे उन्हें आर्थिक, मानसिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

मीना देवी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें केवल अपनी वैधानिक संपत्ति का कब्जा चाहिए और कानून के अनुरूप न्याय मिलना चाहिए।

पीड़िता

प्रशासन और दूसरे पक्ष का इंतजार

यह मामला अब आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। यदि पीड़िता द्वारा किए गए दावे सही हैं तो यह एसडीएम के आदेश के अनुपालन से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक मामला हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन, पुलिस अथवा किरायेदार पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

कानून के सम्मान का सवाल

यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायालय के आदेशों के प्रभावी अनुपालन और कानून के शासन पर भी सवाल खड़ा करता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़िता को एसडीएम के आदेश के अनुरूप राहत कब तक मिल पाती है।

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