आंध्र प्रदेश के औद्योगिक विस्फोट में झारखंड के ओयबोन कोड़ाह की मौत, दो साल बीतने को, फिर भी नहीं मिला मुआवजा
रिपोर्ट शैलेश सिंह
आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले स्थित Synergene Active Ingredients Pvt. Ltd. में 23 अगस्त 2024 की मध्यरात्रि हुए भीषण औद्योगिक विस्फोट ने झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के तीन परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी। इस दर्दनाक हादसे में गोइलकेरा प्रखण्ड के दो श्रमिकों के साथ गंगदा पंचायत के चलपागड़ा गांव निवासी ओयबोन कोड़ाह भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इलाज के दौरान 5 सितंबर 2024 को ओयबोन कोड़ाह ने भी दम तोड़ दिया।

दो परिवारों को मिला करोड़ों का मुआवजा, तीसरा परिवार अब भी खाली हाथ
हैरानी की बात यह है कि इसी हादसे में मृतक लाल सिंह पूर्ति और रोया अंगरिया के आश्रितों को संबंधित कंपनी ने एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दे दिया। लेकिन उसी हादसे में जान गंवाने वाले ओयबोन कोड़ाह के परिवार को आज तक एक रुपये का भी मुआवजा नहीं मिला है।


न्याय की तलाश में आंध्र प्रदेश के चक्कर काट रहा परिवार
मृतक के परिजन कई बार झारखंड से आंध्र प्रदेश जाकर कंपनी और संबंधित सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा चुके हैं। बावजूद इसके न तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब मिला और न ही मुआवजा। आर्थिक तंगी और मानसिक पीड़ा के बीच परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।
मुखिया सुखराम सांडिल ने उपायुक्त से लगाई गुहार
गंगदा पंचायत के मुखिया सुखराम उर्फ राजू सांडिल ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी परिवार के साथ हो रहे इस भेदभाव को अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
प्रशासन से चार प्रमुख मांगें
ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि—
* पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
* आंध्र प्रदेश प्रशासन और कंपनी से समन्वय स्थापित कर लंबित मुआवजा जल्द दिलाया जाए।
* राज्य सरकार और संबंधित विभागों के माध्यम से पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप किया जाए।
* यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर विलंब किया गया है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सबसे बड़ा सवाल
जब एक ही हादसे में मारे गए दो श्रमिकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिल सकता है, तो आखिर ओयबोन कोड़ाह के परिवार के साथ यह भेदभाव क्यों?

मानवीय पहलू
नौजवान बेटा को खो चुके इस आदिवासी परिवार के सामने आज रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। मृतक की एक छोटी बेटी है, पत्नी पहले ही घर छोड़ भाग चुकी है। मृतक की बेटी का परवरिश उसकी माता शुरू कुई, पिता गुरुचरण कोड़ाह कर रहे हैं, जो अत्यंत गरीब हैं। न्याय और मुआवजे की उम्मीद में वे लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। अब निगाहें पश्चिमी सिंहभूम प्रशासन और झारखंड सरकार के हस्तक्षेप पर टिकी हैं कि आखिर इस पीड़ित परिवार को उसका हक कब मिलेगा।














