रोजगार समेत चार सूत्री मांगों पर अड़े ग्रामीण, उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई लगातार ठप
13वें दिन भी आंदोलन में नहीं आई नरमी
रिपोर्ट शैलेश सिंह
ग्रामसभा दुबिल के बैनर तले चल रहा “हातु-आबुआ राज, ग्राम स्वराज अभियान” के तहत जनआंदोलन बुधवार को 13वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। सेल की मनोहरपुर ओर माइंस (चिड़िया-दुबिल माइंस) के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन का अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है। जंगल के बीच कठिन परिस्थितियों में डटे आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं।
उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई पूरी तरह ठप
आंदोलन का सीधा असर चिड़िया-दुबिल माइंस के उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई पर पड़ा है। लगातार 13वें दिन भी खदान का उत्पादन और आयरन ओर की ढुलाई पूरी तरह ठप रही, जिससे सेल प्रबंधन की चिंता बढ़ती जा रही है।

सेल प्रबंधन से वार्ता रही बेनतीजा
बुधवार को मनोहरपुर साइडिंग में सेल गुवा/चिड़िया के सीजीएम सी. वी. कुमार, सेल बोकारो के सीजीएम राजीव तिवारी तथा सीजीएम सुधीर शर्मा के साथ आंदोलनकारियों की अहम बैठक हुई। हालांकि ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच कोई सम्मानजनक सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया।
रोजगार के मुद्दे पर नहीं बनी बात
वार्ता में शामिल आंदोलनकारी दुलाल आइंद ने बताया कि रोजगार से जुड़े मुद्दे पर प्रबंधन की ओर से कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि इसी कारण बातचीत विफल रही और आंदोलन यथावत जारी है।
’50 युवाओं को नौकरी’ के आश्वासन पर उठाए सवाल
दुलाल आइंद ने बताया कि कुछ दिन पहले विधायक जगत माझी के साथ चिड़िया खदान की ठेका कंपनी के एक अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। उस समय विधायक की मौजूदगी में 50 स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों ने इसे लिखित रूप में देने की मांग की, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बाद में गुवा जनरल ऑफिस में हुई बैठक में उसी अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि विधायक को नाराज नहीं करने के कारण उन्होंने ऐसा कहा था। दुलाल आइंद ने कहा कि कंपनी की कथनी और करनी में अंतर है, इसलिए ग्रामीण अब केवल लिखित आश्वासन पर ही भरोसा करेंगे।
ग्रामसभा की चार सूत्री मांगें
* दुबिल गांव के 200 बेरोजगार युवाओं को खतियान आधारित प्राथमिकता के साथ रोजगार दिया जाए।
* लाल पानी से बंजर हुई जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए तथा प्रभावित परिवारों को नौकरी दी जाए।
* सरना स्थल, कब्रिस्तान और रैयती जमीन पर लगाए गए कथित अवैध पिलरों को हटाया जाए।
* गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए चार नए चापाकल और आठ जलमीनार लगाए जाएं।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन रहेगा जारी
ग्रामसभा के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी चार सूत्री मांगों पर ठोस और सम्मानजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।












