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दुबिल माइंस आंदोलन 12वें दिन भी जारी, सांसद जोबा माझी व विधायक जगत माझी दूसरी बार पहुंचे आंदोलन स्थल

On: July 7, 2026 8:06 PM
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चार सूत्री मांगों पर अड़े ग्रामीण, उत्पादन और लौह अयस्क ढुलाई अब भी ठप

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

ग्राम सभा दुबिल के बैनर तले चल रहे “हातु-आबुआ राज, ग्राम स्वराज अभियान” के तहत सेल की मनोहरपुर ओर माइंस (चिड़िया-दुबिल माइंस) के खिलाफ आंदोलन मंगलवार को 12वें दिन भी जारी रहा। लगातार बारिश, कठिन परिस्थितियों और जंगल के बीच डटे ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग हैं।

12 दिन से उत्पादन और ढुलाई बंद

आंदोलन का सीधा असर खदान के उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई पर पड़ा है। पिछले 12 दिनों से उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप है, जिससे सेल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। हालांकि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।

सांसद और विधायक पहुंचे, नहीं बनी बात

मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे सांसद जोबा माझी और विधायक जगत माझी आंदोलनकारियों से वार्ता करने आंदोलन स्थल पहुंचे। इससे पहले दोनों जनप्रतिनिधियों ने चिड़िया कार्यालय में सेल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी।

प्रबंधन की ओर से आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए कार्यालय बुलाया गया, लेकिन ग्रामीणों ने यह कहते हुए जाने से इनकार कर दिया कि जहां पहले उन्हें अपमानित कर लौटाया गया था, वहां वे दोबारा वार्ता नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत आंदोलन स्थल या सेल गुवा के जनरल ऑफिस में ही होगी।

इसके बाद सांसद और विधायक अकेले आंदोलन स्थल पहुंचे। उनके साथ सेल या ठेका कंपनी का कोई अधिकारी नहीं था, जिससे आंदोलनकारियों में नाराजगी देखी गई।

‘रोजगार बिना समझौता नहीं’

आंदोलनकारी दुलाल आइंद ने कहा कि सांसद और विधायक रोजगार के मुद्दे पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि चार सूत्री मांगों में रोजगार सबसे महत्वपूर्ण है और इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक हमारे जनप्रतिनिधि हैं, लेकिन रोजगार देने का निर्णय सेल प्रबंधन और ठेका कंपनी को लेना है। जब दोनों के सक्षम अधिकारी ही वार्ता में मौजूद नहीं थे, तो बातचीत का कोई औचित्य नहीं रह गया।

‘अब लड़ाई अस्तित्व की है’

ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन केवल नौकरी का नहीं, बल्कि जमीन, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का संघर्ष है। वर्षों से आश्वासन मिलने और रोजगार मांगने पर मुकदमे झेलने के बाद अब गांव ने तय कर लिया है कि अधिकार मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

महिलाएं और युवा भी मोर्चे पर

आंदोलन में गांव के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिल रही है। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा लगातार आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं। बारिश के बीच अस्थायी तंबुओं में रहकर और जंगल में भोजन बनाकर भी उनका हौसला कम नहीं हुआ है।

चार मांगों पर अडिग ग्रामसभा

ग्रामसभा ने अपनी चार सूत्री मांगों को दोहराते हुए कहा है कि—

  • खतियान आधारित प्राथमिकता के साथ दुबिल गांव के 200 बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाए।
  • लाल पानी से प्रभावित बंजर जमीन का उचित मुआवजा तथा प्रभावित परिवारों को नौकरी दी जाए।
  • सरना स्थल, कब्रिस्तान और रैयती भूमि पर लगाए गए कथित अवैध पिलरों को हटाया जाए।
  • गांव में चार नए चापाकल और आठ जलमीनार स्थापित कर पेयजल संकट दूर किया जाए।

‘हातु-आबुआ राज’ के नारों से गूंज रहा इलाका

आंदोलन स्थल पर लगातार “हातु-आबुआ राज, हमारा गांव हमारा राज” के नारे गूंज रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल नारा नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन और स्वशासन के अधिकार की आवाज है।

प्रबंधन और प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

लगातार 12 दिनों से उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई बंद रहने से सेल प्रबंधन पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। वहीं आंदोलन को मिल रहे जनसमर्थन ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।

ग्रामीणों का साफ कहना है— “हक लिए बिना नहीं हटेंगे।”

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