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दुबिल माइंस आंदोलन 10वें दिन भी अडिग: सांसद जोबा माझी पहुंचीं धरना स्थल, 8 जुलाई को त्रिपक्षीय वार्ता की उम्मीद

On: July 5, 2026 8:42 PM
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चार सूत्री मांगों पर अड़े ग्रामीण, उत्पादन और लौह अयस्क ढुलाई लगातार 10वें दिन ठप; “हक लिए बिना नहीं हटेंगे”

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

पश्चिमी सिंहभूम जिले के दुबिल गांव में ग्राम सभा दुबिल के बैनर तले चल रहा “हातु-आबुआ राज, ग्राम स्वराज अभियान” अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। सेल की मनोहरपुर ओर माइंस (चिड़िया-दुबिल माइंस) के खिलाफ शुरू हुआ ग्रामीणों का आंदोलन रविवार को लगातार 10वें दिन भी पूरे जोश और एकजुटता के साथ जारी रहा। लगातार बारिश, दुर्गम जंगल और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आंदोलनकारी अपने मोर्चे पर डटे हुए हैं और साफ शब्दों में कह रहे हैं कि “हक लिए बिना अब आंदोलन समाप्त नहीं होगा।”

उत्पादन और लौह अयस्क ढुलाई लगातार 10वें दिन ठप

ग्रामीणों के आंदोलन का सीधा असर खदान संचालन पर दिखाई दे रहा है। चिड़िया-दुबिल माइंस में लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन लगातार 10वें दिन भी पूरी तरह ठप रहा। इससे सेल प्रबंधन पर आर्थिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ता जा रहा है। हालांकि अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ सका है।

आंदोलन स्थल पहुंचीं सांसद जोबा माझी

रविवार को सिंहभूम की सांसद जोबा माझी आंदोलन स्थल पहुंचीं और ग्रामीणों के साथ विस्तृत बातचीत की। इस दौरान ग्राम सभा के प्रतिनिधियों ने उन्हें अपना चार सूत्री मांग पत्र सौंपते हुए मांगों के समाधान की दिशा में पहल करने का आग्रह किया।
ग्राम मुंडा रामलाल चांपिया ने बताया कि सांसद ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया है कि वह 8 जुलाई को पुनः आंदोलन स्थल आएंगी तथा सेल प्रबंधन, ठेका कंपनी और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित कर समाधान निकालने का प्रयास करेंगी।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर कुछ स्थानीय बेरोजगार युवाओं को ठेका कंपनी के माध्यम से रोजगार देने का संकेत मिला है, लेकिन ग्रामसभा की मांग इससे आगे की है। ग्रामीण चाहते हैं कि ठेका कार्यों के साथ-साथ लौह अयस्क खदान में बतौर सप्लाई मजदूर भी स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिले।
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें 8 जुलाई को प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता पर टिकी हुई हैं।

“यह सिर्फ नौकरी नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है”

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल, जंगल, जमीन, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उन्हें केवल आश्वासन मिलता रहा, लेकिन उनकी मूल समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। अब ग्रामसभा ने स्पष्ट निर्णय लिया है कि अधिकार मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
एक आंदोलनकारी ने कहा—
“अब भरोसे की राजनीति नहीं चलेगी। हमें हमारा अधिकार चाहिए और जब तक अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”

महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की मजबूत भागीदारी

दुबिल आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता गांव के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी है। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में धरना स्थल पर मौजूद हैं।
लगातार बारिश के बीच प्लास्टिक के अस्थायी तंबुओं में रहना, जंगल में चूल्हा जलाकर भोजन बनाना और खुले आसमान के नीचे रात बिताने जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद आंदोलनकारियों का मनोबल कमजोर नहीं पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि संघर्ष लंबा चले तो भी वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

चार सूत्री मांगों पर कायम है ग्रामसभा

ग्रामसभा ने एक बार फिर अपनी चार प्रमुख मांगों को दोहराया है—
* दुबिल गांव के लगभग 200 बेरोजगार युवाओं को खतियान आधारित प्राथमिकता के साथ रोजगार दिया जाए।
* लाल पानी, लौह चूर्ण से बंजर कृषि भूमि का उचित मुआवजा तथा प्रभावित परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
* सरना स्थल, कब्रिस्तान और रैयती जमीन पर लगाए गए कथित अवैध पिलरों को हटाया जाए।
* गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए चार नए चापाकल और आठ जलमीनार स्थापित किए जाएं।

“हातु-आबुआ राज” के नारों से गूंज रहा आंदोलन स्थल

धरना स्थल पर लगातार “हातु-आबुआ राज, हमारा गांव हमारा राज” के नारे गूंज रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि ग्राम स्वराज, स्थानीय अधिकार और स्वशासन की भावना का प्रतीक है।

प्रबंधन और प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

लगातार 10 दिनों से उत्पादन और लौह अयस्क ढुलाई बंद रहने से सेल प्रबंधन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। वहीं आंदोलन को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन प्रशासन के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।
अब सबकी निगाहें 8 जुलाई को प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता पर टिकी हैं। यदि वार्ता सकारात्मक रही तो गतिरोध समाप्त होने की संभावना बनेगी, लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
फिलहाल दुबिल की धरती से एक ही संदेश गूंज रहा है—
“हक लिए बिना नहीं हटेंगे, जल-जंगल-जमीन और सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी।”

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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