राधे सुम्ब्रुई एवं पूर्णचंद्र बिरुआ मेमोरियल जिला स्तरीय आर्चरी प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ, उत्कृष्ट खिलाड़ियों को एकलव्य आर्चरी अकादमी में मिलेगा सीधा प्रवेश
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
सेल, किरीबुरू के सीएसआर विभाग के प्रयोजन एवं पश्चिम सिंहभूम जिला आर्चरी एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में स्वर्गीय राधे सुम्ब्रुई एवं स्वर्गीय पूर्णचंद्र बिरुआ मेमोरियल जिला स्तरीय आर्चरी प्रतियोगिता 2026-27 का भव्य शुभारंभ बुधवार को एकलव्य आर्चरी अकादमी मैदान, किरीबुरू में हुआ। प्रतियोगिता का उद्देश्य जिले की ग्रामीण एवं आदिवासी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर उपलब्ध कराना है।

माल्यार्पण एवं लक्ष्य भेदन के साथ हुआ उद्घाटन
प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य अतिथि सेल, किरीबुरू के सहायक महाप्रबंधक (एचआर, एल एंड ई) सह प्रभारी सीएसआर सी. के. बिस्वाल ने स्वर्गीय राधे सुम्ब्रुई एवं स्वर्गीय पूर्णचंद्र बिरुआ के चित्र पर माल्यार्पण कर तथा लक्ष्य भेदन कर किया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि बी. बासा, गोपी लागुरी, संदीप तीयू, माधव चंद्र कोड़ा एवं बलभद्र बिरूली उपस्थित रहे। आयोजन समिति की ओर से जिला आर्चरी एसोसिएशन के अध्यक्ष सिद्धार्थ पाड़ेया, सचिव महर्षि महेंद्र सिंकू, कोषाध्यक्ष सुमित बालमुचू, उपाध्यक्ष तूरी सुंडी, संयुक्त सचिव सुभाष जोंको एवं सहायक कोषाध्यक्ष बीर सिंह पूर्ति ने अतिथियों का स्वागत किया।

महान हस्तियों के सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प
मुख्य अतिथि सी. के. बिस्वाल ने कहा कि स्वर्गीय राधे सुम्ब्रुई और स्वर्गीय पूर्णचंद्र बिरुआ ने पश्चिम सिंहभूम में खेल और शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। आज उनके नाम पर आयोजित यह प्रतियोगिता उनके सपनों को साकार करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को प्रेरणा देने के साथ-साथ खेल संस्कृति को भी मजबूत करते हैं।

16 वर्षों से प्रतिभाओं को तराश रहा है सेल, किरीबुरू
सी. के. बिस्वाल ने बताया कि सेल, किरीबुरू प्रबंधन पिछले लगभग 16 वर्षों से सीएसआर के तहत एकलव्य आर्चरी अकादमी का संचालन कर रहा है। यहां आधुनिक प्रशिक्षण के माध्यम से झारखंड के अनेक खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सेल की सामाजिक जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आठ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मिलेगा सीधा प्रवेश
उन्होंने घोषणा की कि इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एवं इच्छुक 5 महिला तथा 3 पुरुष तीरंदाजों को सीधे एकलव्य आर्चरी अकादमी में प्रवेश दिया जाएगा। इससे उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

जिले भर से पहुंचे 150 से अधिक तीरंदाज
प्रतियोगिता में पश्चिम सिंहभूम जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 150 युवा तीरंदाज भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में अभिभावक, खेल प्रेमी और स्थानीय लोग भी प्रतियोगिता का आनंद लेने पहुंचे।

20 से 70 मीटर की दूरी से साध रहे लक्ष्य
प्रतियोगिता में आयु वर्ग के अनुसार दूरी निर्धारित की गई है। अंडर-10 वर्ग के खिलाड़ी 20 मीटर, अंडर-13 वर्ग के 30 मीटर, अंडर-15 वर्ग के 40 मीटर, सब जूनियर वर्ग के 60 मीटर तथा जूनियर एवं सीनियर वर्ग के खिलाड़ी 70 मीटर की दूरी से निशाना साध रहे हैं। प्रत्येक प्रतिभागी निर्धारित समय में 36 तीर चलाएगा तथा अधिकतम 360 अंक निर्धारित किए गए हैं।
संगठनों का मिल रहा भरपूर सहयोग
प्रतियोगिता के सफल आयोजन में आदिवासी कल्याण केंद्र, किरीबुरू, आदिवासी कल्याण केंद्र, प्रॉस्पेक्टिंग, आदिवासी कल्याण केंद्र, मेघाहातुबुरू तथा आदिवासी हो समाज युवा महासभा, किरीबुरू के पदाधिकारी एवं सदस्यों का सराहनीय योगदान मिल रहा है।

तकनीकी टीम और प्रशिक्षकों की अहम भूमिका
प्रतियोगिता के सफल संचालन में तकनीकी सदस्य शैलेंद्र सवैया, सुमित सिंकू, जानो पूर्ति, सुकेन हेस्सा, कन्हैया लाल बुडीउली एवं गार्दी कुंटीया अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वहीं एकलव्य आर्चरी अकादमी के प्रशिक्षक ऋतिक कुमार, महिला प्रशिक्षक शिम्पी कुमारी, कमिटी पदाधिकारी सर्गेया अंगारिया, प्रदीप चातर, बीरबल गुड़िया, श्याम बिरुआ एवं आजाद सिंकू आदि खिलाड़ियों को तकनीकी मार्गदर्शन और तमाम प्रकार का सहयोग दे रहे हैं।
युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायी पहल
सेल, किरीबुरू और पश्चिम सिंहभूम जिला आर्चरी एसोसिएशन का यह संयुक्त प्रयास जिले की युवा प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का बेहतर मंच प्रदान करते हैं और भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।













