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कोल्हान में माओवाद को सबसे बड़ा झटका: 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम ने किया सरेंडर

On: August 7, 2026 7:11 PM
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कोल्हान में माओवाद को सबसे बड़ा झटका: 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम ने किया सरेंडर
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दो महिला नक्सलियों ने भी छोड़ी बंदूक, पुलिस बोली—सुरक्षा बलों के लगातार अभियान से टूट रहा माओवादी नेटवर्क

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

पश्चिम सिंहभूम के सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ चल रहे लगातार सुरक्षा अभियान के बीच झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमेटी सदस्य सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ मरु उर्फ डांगिल उर्फ विक्रम उर्फ तुबई उर्फ जयराम ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उसके साथ संगठन की दो सक्रिय महिला नक्सलियों पिंकी और एक लाख रुपये की इनामी कोदोमुनी कोड़ा उर्फ पद्मनी ने भी हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने तीनों के आत्मसमर्पण की पुष्टि की है।

कोल्हान में माओवाद को सबसे बड़ा झटका: 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम ने किया सरेंडर

लगातार दबाव से बिखर गया माओवादी नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों के अनुसार सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ तथा अन्य सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। लगातार घेराबंदी, सुरक्षित ठिकानों की कमी और संगठन के कमजोर पड़ते नेटवर्क के कारण अब सक्रिय माओवादी भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसी दबाव के बीच सालुका कायम ने अपने दो महिला साथियों के साथ हथियार डाल दिए।

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद बढ़ गया था दबाव

पुलिस के मुताबिक शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद से ही सालुका कायम लगातार तनाव में था। सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती कार्रवाई और संगठन के कमजोर होते ढांचे ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया।

96 संगीन मामलों का आरोपी, 10 लाख का था इनाम

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सालुका कायम के खिलाफ 96 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर झारखंड सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह लंबे समय से भाकपा (माओवादी) के लिए सक्रिय था और सुरक्षा बलों पर आईईडी विस्फोट, पुलिस एवं सीआरपीएफ पर हमले, हत्या, लेवी वसूली, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने, हथियारबंद मुठभेड़ों और विस्फोटक लगाने जैसी कई बड़ी घटनाओं में वांछित था।

सुरक्षाबलों पर कई बड़े हमलों में रहा शामिल

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 1 मार्च 2026 को मनोहरपुर क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सालुका की सक्रिय भूमिका रही थी। इस मुठभेड़ में कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे तथा घटनास्थल से भारी मात्रा में कारतूस और अन्य सामग्री बरामद की गई थी।
इसके अलावा अप्रैल 2025, अगस्त 2025, जनवरी 2023 तथा वर्ष 2021 से 2023 के बीच पश्चिमी सिंहभूम के विभिन्न इलाकों में हुए कई आईईडी विस्फोटों और नक्सली हमलों में भी उसका नाम सामने आया। इन घटनाओं में सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और कोबरा बटालियन के कई जवान घायल हुए थे, जबकि कुछ जवानों ने सर्वोच्च बलिदान भी दिया था।

ग्रामीणों की हत्या और लेवी वसूली के भी गंभीर आरोप

सालुका कायम पर पुलिस मुखबिरी के शक में ग्रामीणों की हत्या, रेलवे ट्रैक उड़ाने, सड़क निर्माण में लगी मशीनों को आग लगाने, ठेकेदारों से लेवी वसूली और सरकारी विकास कार्यों को बाधित करने जैसे गंभीर आरोप भी दर्ज हैं। उसके खिलाफ सोनुवा, गोईलकेरा, टोंटो, टोकलो, कराईकेला, टेबो, जेटेया, मुफस्सिल सहित कई थाना क्षेत्रों में यूएपीए, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, सीएलए एक्ट तथा भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह सोनुवा थाना क्षेत्र के कुदाबुरू गांव का निवासी है।

एक लाख की इनामी कोदोमुनी ने भी छोड़ी बंदूक

आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली कोदोमुनी कोड़ा उर्फ पद्मनी उर्फ गुरला कोड़ा भाकपा (माओवादी) की दस्ता सदस्य थी। उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ टोंटो थाना में हत्या के प्रयास, अवैध हथियार रखने, विस्फोटक अधिनियम, यूएपीए और सीएलए एक्ट सहित पांच मामले दर्ज हैं।

पिंकी के खिलाफ भी आठ नक्सली मामले दर्ज

गोईलकेरा थाना क्षेत्र के ईचागोड़ा गांव की रहने वाली पिंकी भी प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की सक्रिय दस्ता सदस्य रही है। उसके खिलाफ कुल आठ मामले दर्ज हैं। वर्ष 2019 में गोईलकेरा थाना क्षेत्र में वन विभाग के नवनिर्मित विश्रामगृह को विस्फोट से उड़ाने की घटना में उसकी संलिप्तता दर्ज है। उसके खिलाफ भी यूएपीए, सीएलए एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे चल रहे हैं।

मिसिर बेसरा का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सालुका कायम भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। वह लंबे समय तक उसके निर्देश पर कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों का संचालन करता रहा। हथियारबंद दस्तों का नेतृत्व करने के साथ-साथ नए कैडरों की भर्ती, लेवी वसूली, सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था तथा संगठन के संदेशों को विभिन्न इलाकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी के कंधों पर थी।

पुलिस के लिए बड़ी सफलता, माओवाद के खिलाफ अभियान को मिलेगी नई मजबूती

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सालुका कायम जैसे बड़े इनामी कमांडर का आत्मसमर्पण पश्चिमी सिंहभूम और सारंडा क्षेत्र में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता है। इससे माओवादी संगठन के नेटवर्क को गहरा झटका लगा है और आने वाले दिनों में अन्य सक्रिय नक्सलियों के भी मुख्यधारा में लौटने की संभावना मजबूत हुई है। पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण नीति के तहत भटके युवाओं का पुनर्वास किया जाएगा, जबकि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों के खिलाफ अभियान पहले की तरह जारी रहेगा।

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