उपायुक्त के आदेश के बावजूद कार्यपालक अभियंता राजू मरांडी को अब तक नहीं मिला प्रभार ?
सूत्र: नियमों में बदलाव के बाद भी पुराने प्रभार को बचाने की कोशिश तेज
सूत्र: बैक डेट में निविदा निष्पादन और विपत्र पारित करने की भी चर्चाएं, प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर
रिपोर्ट शैलेश सिंह
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला परिषद में जिला अभियंता के प्रभार को लेकर इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के अनुसार, झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना तथा उपायुक्त मनीष कुमार के आदेश के बावजूद जिला परिषद के वर्तमान प्रभारी जिला अभियंता धीरेन्द्र कुमार अब तक कार्यपालक अभियंता राजू मरांडी को प्रभार सौंपने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभागीय अधिकारियों और अभियंताओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

वित्त विभाग के निर्देश के बाद बदली व्यवस्था
जानकारी के अनुसार, झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने अपने पत्रांक-1630, दिनांक 19 मई 2026 के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिया था कि उच्च वेतनमान वाले पद का प्रभार निम्न वेतनमान वाले अधिकारी को नहीं दिया जाएगा। इसी निर्देश के आलोक में पंचायती राज विभाग ने अधिसूचना संख्या-2292, दिनांक 31 जुलाई 2026 जारी कर राज्य के सभी उपायुक्तों को आदेश दिया कि जहां-जहां निम्नतर वेतनमान वाले सहायक अभियंता जिला अभियंता का प्रभार संभाल रहे हैं, वहां उन्हें हटाकर उच्च वेतनमान वाले कार्यपालक अभियंता को प्रभार सौंपा जाए।
इसी क्रम में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, चाईबासा के कार्यपालक अभियंता राजू मरांडी को जिला अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया।
सूत्र: प्रभार हस्तांतरण की संचिका ही रोक दी गई
जिला परिषद से जुड़े सूत्रों का दावा है कि आदेश जारी होने के बाद भी प्रभार हस्तांतरण की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। चर्चा है कि संबंधित संचिका (फाइल) को आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा है, जिसके कारण राजू मरांडी अब तक विधिवत प्रभार ग्रहण नहीं कर पाए हैं।
हालांकि इस संबंध में किसी भी अधिकारी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्र: सचिव के आदेश को रुकवाने की कोशिश
प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि राज्य के कई जिलों में वर्तमान में जिला अभियंता का प्रभार संभाल रहे सहायक अभियंता पंचायती राज विभाग की अधिसूचना पर रोक लगाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि कुछ अधिकारी विभागीय आदेश के विरुद्ध राहत पाने के उद्देश्य से उच्च स्तर पर संपर्क साध रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जूनियर को सीनियर का प्रभार देने पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
जानकार बताते हैं कि जिला परिषद में जिला अभियंता का पद लंबे समय तक कार्यपालक अभियंता स्तर के अधिकारियों के पास रहता था। बाद के वर्षों में कई जिलों में सहायक अभियंताओं को यह प्रभार दिए जाने पर सवाल उठे। मामला न्यायालय तक पहुंचा, जिसके बाद वित्त विभाग और पंचायती राज विभाग को व्यवस्था में सुधार करना पड़ा।
बताया जाता है कि नई अधिसूचना उसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत अब उच्च वेतनमान वाले अधिकारियों को ही जिला अभियंता का प्रभार सौंपने का निर्णय लिया गया है।
सूत्र: बैक डेट में फाइल निपटाने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार जिला परिषद में कुछ लंबित निविदाओं और विपत्रों को लेकर भी हलचल है। चर्चा है कि कुछ मामलों में बैक डेट में निविदा निष्पादन अथवा विपत्र पारित करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि ऐसा कोई प्रयास होता है तो उसकी जांच आवश्यक होगी, क्योंकि इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।

नजरें अब उपायुक्त के अगले कदम पर
पूरे मामले में अब सभी की नजर उपायुक्त मनीष कुमार पर टिकी है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि उपायुक्त ने पिछले कुछ महीनों में नियम आधारित प्रशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विभागीय आदेश के अनुपालन को लेकर जिला प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
यदि सरकार की अधिसूचना और उपायुक्त के आदेश का समयबद्ध पालन होता है तो इसे प्रशासनिक व्यवस्था में नियमों की पुनर्स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। वहीं यदि प्रभार हस्तांतरण में और विलंब होता है तो यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।














