लघु सिंचाई प्रमंडल ने खुद विभाग से मांगी पूर्व अनुमति, जिला से मिली योजनाओं के कार्यदायित्व पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
चाईबासा। जिला स्तर पर संचालित योजनाओं, खासकर DMFT फंड से कराई जाने वाली योजनाओं, को लेकर अब जल संसाधन विभाग के एक सख्त निर्देश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उसके अभियंता अपने विभागीय कार्यों के अतिरिक्त जिला स्तर के दूसरे विभागों की योजनाओं का कार्य बिना विभागीय अनुमति के नहीं करेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि लघु सिंचाई प्रमंडल को जिला प्रशासन से स्वीकृत योजनाओं का कार्य दायित्व सौंपने से पहले क्या जल संसाधन विभाग से विधिवत सहमति ली गई थी?

लघु सिंचाई प्रमंडल ने ही मांगी पूर्व अनुमति
जल संसाधन विभाग के 15 जुलाई 2026 के पत्र में विभागीय अभियंताओं द्वारा अन्य विभागों के कार्य बिना विभागीय अनुमति के किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि इससे विभागीय निर्देशों का उल्लंघन होता है और क्षेत्रीय पदाधिकारियों को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
इसी पृष्ठभूमि में जिला स्तर की योजनाओं, विशेष रूप से DMFT फंड से संचालित योजनाओं को लघु सिंचाई प्रमंडल द्वारा क्रियान्वित कराने से पहले विभागीय पूर्व अनुमति लिए जाने की आवश्यकता अब महत्वपूर्ण हो गई है।
क्या जिला प्रशासन ने ली थी विभाग की सहमति?
जल संसाधन विभाग के निर्देश के बाद अब सीधे तौर पर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर जिला स्तर से लघु सिंचाई प्रमंडल को योजनाएं सौंपे जाने से पहले क्या विभाग के मुख्यालय से अनुमति या सहमति ली गई थी?
यदि अनुमति नहीं ली गई थी, तो विभागीय अभियंताओं को जिला योजनाओं का कार्यदायित्व किस आधार पर दिया गया?
DMFT योजनाओं पर भी उठ रहे सवाल
DMFT फंड से संचालित योजनाएं जिला स्तर पर तैयार एवं स्वीकृत होती हैं। ऐसी योजनाओं का तकनीकी एवं क्रियान्वयन दायित्व लघु सिंचाई प्रमंडल को दिए जाने के मामले में अब विभागीय अनुमति की स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
जानकारों के अनुसार, यदि जल संसाधन विभाग की पूर्व सहमति के बिना इन योजनाओं का कार्यदायित्व दिया गया है तो यह स्वयं विभाग द्वारा जारी निर्देशों की कसौटी पर जांच का विषय बन सकता है।
एक साल से करीब आठ योजनाओं की निविदा अटकी?
सूत्रों की मानें तो लघु सिंचाई प्रमंडल में पिछले करीब एक वर्ष से लगभग आठ योजनाओं की निविदा का निष्पादन नहीं हो सका है। सूत्र इसके पीछे निविदाओं को कथित रूप से ‘मैनेज’ करने की कोशिशों की चर्चा कर रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि यह शिकायत सही है तो यह जांच का गंभीर विषय है कि योजनाओं की निविदा प्रक्रिया आखिर इतने लंबे समय से लंबित क्यों है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
DMFT के प्राक्कलन में भी गड़बड़ी का आरोप
सूत्रों के अनुसार जिला स्तर से लघु सिंचाई प्रमंडल को भेजे गए DMFT फंड से संबंधित कुछ प्राक्कलनों में भारी गड़बड़ी की बात भी सामने आ रही है। सवाल यह है कि इन प्राक्कलनों की तकनीकी जांच किस स्तर पर हुई और स्वीकृति से पहले इनके मानकों की पड़ताल किस अधिकारी ने की?
यदि प्राक्कलन में अनियमितता है तो इसकी तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी होगा।
निविदा से पहले ही ‘पसंदीदा’ संवेदकों को योजना बांटने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह सामने आ रहा है कि योजना मिलने से पहले ही लघु सिंचाई प्रमंडल के कुछ सहायक अभियंता कथित तौर पर मझगांव, मनोहरपुर और झींकपानी क्षेत्र की योजनाओं को अपने पसंदीदा संवेदकों के बीच बांटने की तैयारी कर रहे हैं।
सूत्रों का आरोप है कि निविदा आमंत्रित होने से पहले ही योजनाओं के संभावित संवेदकों को लेकर अंदरखाने निर्णय किए जाने की चर्चा है। यदि ऐसा है तो यह पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
‘टेंडर से पहले ठेका तय’ तो फिर निविदा क्यों?
निविदा प्रक्रिया का मूल उद्देश्य सभी पात्र संवेदकों को समान अवसर देना और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से योग्य एजेंसी का चयन करना है। ऐसे में यदि निविदा जारी होने से पहले ही किसी संवेदक के पक्ष में योजना तय होने की बात सही साबित होती है तो निष्पक्ष निविदा प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा होगा।
विभागीय आदेश के अनुपालन की अग्निपरीक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जल संसाधन विभाग द्वारा जारी स्पष्ट निर्देश का जिला प्रशासन और लघु सिंचाई प्रमंडल कितना अनुपालन करते हैं?
* क्या DMFT समेत जिला स्तर की योजनाओं का कार्यदायित्व देने से पहले जल संसाधन विभाग की पूर्व सहमति ली जाएगी?
* क्या पहले से आवंटित योजनाओं की भी विभागीय स्तर पर समीक्षा होगी?
क्या करीब आठ लंबित निविदाओं की जांच होगी?
* क्या DMFT प्राक्कलनों की तकनीकी जांच कराई जाएगी?
* और क्या निविदा से पहले पसंदीदा संवेदकों को योजना बांटने के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
इन सवालों का जवाब अब जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग, दोनों को देना होगा। आरोपों की स्वतंत्र जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे मामले में सिर्फ प्रक्रियागत चूक हुई है या फिर योजनाओं के क्रियान्वयन और निविदा प्रक्रिया में कोई गंभीर अनियमितता हुई है।













