एकरारनामा में तय समय बीतने के बाद भी काम अधूरा रखने वालों की मांगी गई सूची, पुराने काम पूरे होने तक नई योजनाओं के आवंटन पर रोक का प्रावधान
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में सरकारी योजनाओं को वर्षों तक लंबित रखने वाले संवेदकों पर अब प्रशासन शिकंजा कसने की तैयारी में है। ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा के कार्यपालक अभियंता ने जिले के विभिन्न कार्यपालक अभियंताओं को पत्र जारी कर उनके प्रमंडल में कार्यरत ऐसे संवेदकों की सूची तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, जिन्होंने एकरारनामा में निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद योजनाओं का कार्य पूरा नहीं किया है।

छह प्रमुख विभागों से मांगी गई लंबित योजनाओं की सूची
ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा 6 अक्टूबर 2026 को जारी पत्रांक 1847 में लघु सिंचाई प्रमंडल, राष्ट्रीय ग्रामीण नियोजन कार्यक्रम, भवन प्रमंडल, ग्रामीण कार्य विभाग चाईबासा, ग्रामीण कार्य विभाग चक्रधरपुर तथा जिला परिषद चाईबासा के जिला अभियंता से उनके अधीन लंबित योजनाओं और संबंधित संवेदकों की सूची मांगी गई है।
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसी योजनाओं का विवरण उपलब्ध कराया जाए, जिनकी निर्धारित पूर्णता तिथि बीत चुकी है, लेकिन संवेदकों द्वारा अभी तक कार्य पूरा नहीं किया गया है।
चार साल पुराने प्रशासनिक आदेश की फिर याद
इस कार्रवाई का आधार 23 दिसंबर 2022 को जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम द्वारा जारी ज्ञापांक 1679 तथा 20 दिसंबर 2022 की DMFT समीक्षा बैठक की कार्यवाही को बनाया गया है।
करीब चार वर्ष पहले हुई उस बैठक में भी प्रशासन ने लंबित योजनाओं को लेकर संवेदकों पर कड़ा रुख अपनाया था। अब एक बार फिर उसी निर्णय को अमल में लाने की दिशा में विभागीय स्तर पर सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पुराना काम अधूरा तो नई योजना नहीं!
20 दिसंबर 2022 की DMFT समीक्षा बैठक में उपायुक्त की अध्यक्षता में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि जिन संवेदकों ने एकरारनामा में निर्धारित समय सीमा तक अपना कार्य पूरा नहीं किया है, उन्हें तब तक जिले की किसी भी योजना में नया कार्य आवंटित नहीं किया जाएगा, जब तक वे अपना पूर्व का लंबित कार्य पूरा नहीं कर लेते।
इस निर्णय का उद्देश्य उन संवेदकों पर अंकुश लगाना था, जो एक तरफ पुरानी योजनाओं को अधूरा छोड़ देते हैं और दूसरी तरफ लगातार नई योजनाओं का ठेका हासिल करते रहते हैं।

सभी लाइन विभागों से मांगी जानी थी रिपोर्ट
बैठक में सभी कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया था कि जिले में कार्यरत अन्य लाइन विभागों से संबंधित संवेदकों की लंबित योजनाओं की सूची प्राप्त की जाए।
इसके अलावा निविदा में भाग लेने वाले संवेदकों से इस आशय का प्रमाण-पत्र भी लेने का निर्णय लिया गया था कि उनके जिम्मे पूर्व की कोई लंबित योजना नहीं है।
योजनाओं की रफ्तार पर पड़ता है सीधा असर
समीक्षा के दौरान प्रशासन के सामने यह बात आई थी कि कई संवेदक लंबे समय से अपनी योजनाओं को लंबित रखे हुए हैं और इसके बावजूद नई योजनाओं का कार्य भी अपने हाथ में ले रहे हैं।
प्रशासन का मानना था कि ऐसी स्थिति में सरकारी योजनाओं की प्रगति प्रभावित होती है और जनता को योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता। इसी कारण समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा कराने के लिए लंबित योजनाओं वाले संवेदकों पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था।

स्कूल मरम्मति योजनाओं में भी मिली थी बड़ी खामी
20 दिसंबर 2022 की बैठक में DMFT मद से संचालित विद्यालय मरम्मति एवं भवन निर्माण योजनाओं की भी समीक्षा की गई थी।
बैठक में पाया गया था कि कई विद्यालय अत्यधिक जर्जर स्थिति में हैं और उनकी केवल मरम्मति कराना संभव नहीं है। ऐसे 38 विद्यालयों के स्थान पर नए विद्यालय भवन निर्माण के लिए प्राक्कलन मांगा गया था।
10 विद्यालयों का प्राक्कलन भी था लंबित
भवन प्रमंडल चाईबासा द्वारा 10 विद्यालयों की मरम्मति से संबंधित प्राक्कलन उपलब्ध नहीं कराने का मामला भी बैठक में सामने आया था। इसे एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।
वहीं अत्यधिक जर्जर 38 विद्यालयों के लिए नए भवन निर्माण का प्रस्ताव भी 31 दिसंबर 2022 तक DMFT कोषांग में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।
पूल-पुलिया और PCC योजनाओं की निविदा में तेजी का आदेश
बैठक में DMFT मद से स्वीकृत पूल-पुलिया, PCC सहित अन्य योजनाओं की निविदा प्रक्रिया में भी तेजी लाने का निर्देश दिया गया था। संबंधित योजनाओं का निविदा निष्पादन उसी माह सुनिश्चित करने को कहा गया था।

निविदा प्रक्रिया को लेकर भी जताई गई थी नाराजगी
बैठक में समाहरणालय के प्रथम तल पर उपायुक्त कार्यालय के सामने बरामदे में निविदा प्रक्रिया संचालित किए जाने पर उपायुक्त ने नाराजगी जताई थी।
इसके बाद निविदा निष्पादन के लिए सदर अनुमंडल कार्यालय के कंट्रोल रूम का उपयोग करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि जिन विभागों में पहले से उनके अपने कार्यालय में निविदा निष्पादन की व्यवस्था थी, उसे यथावत रखने पर सहमति बनी थी।
निविदा में व्यवधान पैदा करने वालों पर भी नजर
बैठक में संवेदकों के बीच निविदा के दौरान होने वाली झड़प और विवाद का मुद्दा भी उठा था। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई थी कि कुछ संवेदक जानबूझकर कई निविदाओं में अपना टेंडर डालते हैं और कथित तौर पर दूसरे निविदादाताओं के लिए व्यवधान उत्पन्न करते हैं।
इसे रोकने के लिए भविष्य में एक NIT में दो से अधिक योजनाओं का निविदा पत्र निर्गत नहीं करने का निर्णय लिया गया था।
काम की गुणवत्ता पर भी सख्त निर्देश
उपायुक्त ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को उच्च गुणवत्ता के साथ योजनाओं का कार्य संपादित कराने का निर्देश दिया था।
विद्यालय मरम्मति के दौरान छत पर शेड के साथ PCC का प्रावधान किए जाने की सूचना पर भी आपत्ति जताई गई थी और छत पर PCC कार्य नहीं कराने का निर्देश दिया गया था।
पहले छत, फिर बाकी मरम्मति
समीक्षा में यह भी सामने आया था कि कई संवेदकों ने स्कूल भवन मरम्मति की निविदा बेहद कम दर पर हासिल की है। इसके बावजूद कार्य की गुणवत्ता से समझौता नहीं करने का निर्देश दिया गया।
जर्जर विद्यालयों के जीर्णोद्धार में सबसे पहले छत का कार्य कराने का निर्णय लिया गया था, ताकि भवन की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद अन्य मरम्मति कार्य आगे बढ़ाया जा सके।

अब देखना होगा—कितने संवेदकों पर गिरेगी गाज?
6 अक्टूबर 2026 को जारी ताजा पत्र के बाद अब जिले के विभिन्न विभागों से लंबित योजनाओं और संबंधित संवेदकों की सूची मांगी गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि पश्चिमी सिंहभूम में निर्धारित समय सीमा के बाद भी सरकारी योजनाओं को लंबित रखने वाले कितने संवेदक प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में आते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वर्षों से लंबित योजनाओं को लेकर अब वास्तव में कार्रवाई होगी और पुराने काम अधूरे छोड़कर नई योजनाएं लेने की प्रवृत्ति पर पूर्ण विराम लगेगा?









