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रांजाबुरु खदान में दूसरे दिन भी जारी रहा आंदोलन, मैगजीन लेबल क्षेत्र में ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

On: August 11, 2026 6:18 PM
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मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान, उत्पादन-ढुलाई पर पड़ा असर

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

गुवा। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले सेल की गुवा खदान अंतर्गत रांजाबुरु खदान में स्थानीय रोजगार समेत विभिन्न मांगों को लेकर 10 अगस्त से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी शांतिपूर्ण रूप से जारी रहा। मानकी लागुड़ा देवगम और गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल के नेतृत्व में सारंडा के विभिन्न गांवों के मुंडा, ग्रामीण और बेरोजगार युवा आंदोलन में शामिल हुए।

दूसरे दिन बदला आंदोलन स्थल

आंदोलन के दूसरे दिन ग्रामीणों ने अपना स्थान बदलकर रांजाबुरु खदान के मैगजीन लेबल क्षेत्र में सुबह से शाम करीब पांच बजे तक प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी के कारण खदान क्षेत्र में गतिविधियां प्रभावित रहीं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूर्व में हुए लिखित समझौते की मांगों को पूरी तरह लागू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।

पहले दिन स्क्रीनिंग मशीन और ढुलाई कराई थी बाधित

गौरतलब है कि 10 अगस्त की सुबह ग्रामीणों ने रांजाबुरु खदान क्षेत्र में पहुंचकर स्क्रीनिंग मशीन समेत अन्य खनन गतिविधियों को बाधित कर दिया था। इससे रांजाबुरु खदान से उत्पादन, लौह अयस्क डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग पर असर पड़ा था। ग्रामीणों ने इसे अनिश्चितकालीन आंदोलन बताते हुए प्रबंधन को मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

‘अब समझौता नहीं, मांगें पूरी होने तक आंदोलन’

मुखिया राजू सांडिल ने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों के धैर्य की सीमा अब समाप्त हो चुकी है। पूर्व में दो बार आंदोलन और खदान बंदी के बाद मंत्री, प्रशासन, सेल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच वार्ता के माध्यम से लिखित समझौता हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि समझौते में तय बिंदुओं को आज तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग खदानों से होने वाले धूल-प्रदूषण, पर्यावरणीय नुकसान और अन्य समस्याओं को झेलते हैं, लेकिन रोजगार के अवसरों में उन्हें प्राथमिकता नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीणों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

18 गांवों के युवाओं को रोजगार की मांग

ग्रामीणों के अनुसार पूर्व समझौते में खदान से प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, स्थानीय स्तर पर 75 प्रतिशत रोजगार, प्रत्येक प्रभावित गांव के बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार की पहल, जल छिड़काव समेत अन्य कार्यों में स्थानीय संस्था को प्राथमिकता, रैक लोडिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी तथा प्रदूषण नियंत्रण और कारो नदी की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की बातें शामिल थीं।

ग्रामीणों का आरोप है कि इन बिंदुओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

ठेका कंपनी पर बाहरी लोगों को रोजगार देने का आरोप

आंदोलनकारियों ने मां सरला ठेका कंपनी पर भी स्थानीय युवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि ड्राइवर, खलासी, झंडा दिखाने वाले कर्मियों समेत अन्य कार्यों में बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है, जबकि खदान प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर ठेका कंपनी और प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है।

दीपक बिरुवा की मौजूदगी में हुआ था समझौता

ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व आंदोलन के दौरान तत्कालीन मंत्री दीपक बिरुवा आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। उनकी मौजूदगी में सेल के मुख्य महाप्रबंधक, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार उस दौरान स्थानीय रोजगार और विकास से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनी थी। अब आंदोलनकारी उसी लिखित समझौते को लागू कराने की मांग कर रहे हैं।

मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

आंदोलनकारियों ने कहा कि दूसरे दिन प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और आगे भी मांगों को लेकर इसी तरह आंदोलन जारी रखा जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस और लिखित समाधान होने तक रांजाबुरु खदान से संबंधित गतिविधियों को सामान्य रूप से चलने नहीं दिया जाएगा।

आंदोलन में मानकी लागुड़ा देवगम, मुखिया राजू सांडिल, मुंडा बुधराम सिद्धू, मुंडा जामदेव चांपिया, मुंडा राजेश टोपनो, मुंडा जानुम सिंह चेरोवा, झामुमो नेता बृंदावन गोप, प्रीतम गोच्छाईत, राजू गोप, श्रीधर गोप सहित विभिन्न गांवों के मुंडा, ग्रामीण और बेरोजगार युवा शामिल रहे।

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