दो घायल चालक गुवा सेल अस्पताल में भर्ती, आंदोलनकारी मुखिया ने आरोपों को बताया गलत
बंदी के बावजूद हाईवा चलने को लेकर आमने-सामने आए चालक और आंदोलनकारी
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
गुवा। स्थानीय रोजगार और पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू कराने की मांग को लेकर रांजाबुरु खदान में सोमवार सुबह से शुरू हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन के बीच विवाद गहरा गया है। आंदोलन के दौरान रांजाबुरु खदान में संचालित एक निजी हाईवा के चालक रविंद्र पासवान और सिद्धांतों जेना ने आंदोलनकारियों पर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। घायल अवस्था में चालक को इलाज के लिए सेल गुवा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल ने चालक के आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा है कि आंदोलनकारी किसी चालक के साथ मारपीट नहीं किए हैं।

“डंडे और पत्थर लेकर पहुंचे और मारपीट करने लगे”
घायल हाईवा चालक रविंद्र पासवान और सिद्धांतों जेना ने बताया कि उसे आज खदान बंदी की जानकारी मिली थी। इसके बावजूद मां सरला कंपनी के सुपरवाइजर ने चालकों को माइंस भेजकर हाईवा चलाने का आदेश दिया।
चालक के अनुसार वह अन्य चालकों के साथ हाईवा से लौह अयस्क की ढुलाई कर रहा था। इसी दौरान बड़ी संख्या में महिला और पुरुष आंदोलनकारी वहां पहुंचे।

दोनों चालकों का आरोप है कि आंदोलनकारियों के हाथों में डंडे और पत्थर थे और उन्होंने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। उसने दावा किया कि कुछ अन्य हाईवा चालकों के साथ भी मारपीट की गई, जबकि कुछ चालकों को मारने के लिए दौड़ाया गया। जान बचाने के लिए वे अपने वाहन से कूदकर झाड़ियों और दूसरी जगहों की ओर भाग गए।
घायल चालक अस्पताल में भर्ती
मारपीट के आरोप के बाद घायल रविंद्र पासवान, सिद्धांतों जेना को इलाज के लिए सेल गुवा अस्पताल लाया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। घटना के बाद खदान क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। गुवा थाना पुलिस घायल चालक का बयान दर्ज किया है।

मुखिया राजू सांडिल ने आरोपों को बताया गलत
इधर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मुखिया राजू सांडिल ने चालक द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
उन्होंने कहा कि रांजाबुरु खदान में अनिश्चितकालीन बंदी का स्पष्ट ऐलान पहले ही कर दिया गया था। इसके बावजूद कुछ हाईवा से लौह अयस्क की ढुलाई किए जाने की जानकारी मिली थी।
राजू सांडिल के अनुसार, “हम लोग केवल बंदी के दौरान हाईवा का परिवहन बंद कराने के लिए वहां गए थे। आंदोलनकारियों को देखकर चालक अपने-अपने वाहन से कूदकर झाड़ी और खाई की ओर भागने लगे। इस दौरान किसी को चोट लगी होगी तो उसके बारे में हम नहीं कह सकते, लेकिन किसी भी आंदोलनकारी ने किसी चालक के साथ मारपीट नहीं की है।”

एक ही घटना पर दो अलग-अलग दावे
घटना को लेकर दोनों पक्षों के बयान पूरी तरह अलग हैं। घायल चालक जहां डंडे और पत्थरों से हमला किए जाने का आरोप लगा रहा है, वहीं आंदोलनकारी नेतृत्व का कहना है कि उन्होंने किसी चालक के साथ मारपीट नहीं की और केवल बंदी के बावजूद चल रहे वाहनों को रोकने पहुंचे थे।
अब पूरे मामले में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बंदी के बावजूद हाईवा चलाने पर भी सवाल
इस घटना के बाद एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आंदोलनकारियों ने पहले ही रांजाबुरु खदान में अनिश्चितकालीन बंदी और चक्का जाम का ऐलान कर दिया था, तो इसके बावजूद हाईवा से लौह अयस्क की ढुलाई किसके निर्देश पर कराई जा रही थी।
चालक रविंद्र पासवान ने इसके लिए कंपनी के सुपरवाइजर के निर्देश का हवाला दिया है। ऐसे में कंपनी प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
रांजाबुरु में पहले से जारी है तनाव
स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर शुरू हुआ आंदोलन अब विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गया है। ग्रामीण पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू कराने, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार सुनिश्चित करने तथा खदान प्रभावित गांवों के युवाओं को रोजगार देने की मांग पर अड़े हैं।
वहीं, हाईवा चालक के साथ कथित मारपीट की घटना ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन और पुलिस मामले में क्या कार्रवाई करती है और खदान संचालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता निकलता है या नहीं।













