चाईबासा कोर्ट का कड़ा फैसला, पोक्सो मामले में आरोपी को जुर्माना भी
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को सख्त सजा सुनाई है। मुफ्फसिल थाना कांड संख्या-172/2022 में आरोपी सुमन गोप को दोषी करार देते हुए 15 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।

क्या है पूरा मामला
यह मामला 19 नवंबर 2022 को दर्ज किया गया था। आरोपी सुमन गोप, पिता स्व. नंदलाल गोप, निवासी बड़ा टोन्टो (गोपबस्ती), थाना मुफ्फसिल, जिला पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा के खिलाफ नाबालिग बच्ची को डरा-धमका कर दुष्कर्म करने का आरोप लगा था।
इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3), 506 और पोक्सो एक्ट 2012 की धारा 4/6 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पुलिस की कार्रवाई: गिरफ्तारी से लेकर चार्जशीट तक
घटना की गंभीरता को देखते हुए चाईबासा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अनुसंधान के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र किए और मजबूत केस तैयार करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया।
कोर्ट का फैसला: 15 साल की कठोर सजा
मामले की सुनवाई पोक्सो केस संख्या-02/2023 के तहत अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा की अदालत में चली।
30 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के तहत 15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
कड़ा संदेश: ऐसे अपराधों पर बख्शिश नहीं
न्यायालय के इस फैसले को समाज में एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि नाबालिगों के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।












