11 मई से गुवा सेल खदान में अनिश्चितकालीन चक्का जाम का ऐलान, 18 गांवों में आपसी एकता तार-तार
रिपोर्ट: शैलेश सिंह/संदीप गुप्ता
पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा स्थित सेल खदान में रोजगार को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। 5 मई को गुवा सेल के जनरल ऑफिस में आयोजित त्रिपक्षीय वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अब ग्रामीणों के एक गुट ने 11 मई से खदान में अनिश्चितकालीन चक्का जाम का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से आने वाले दिनों में सेल प्रबंधन की परेशानी बढ़ने वाली है, वहीं 18 गांवों के बीच आपसी एकता भी तार-तार होती नजर आ रही है।

500 बनाम 25: यहीं फंस गया पूरा मामला
स्थानीय रोजगार की बड़ी मांग, प्रबंधन का सीमित प्रस्ताव
बैठक में 18 गांवों के मुंडा-मानकी, मुखिया, जनप्रतिनिधि और पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा शामिल हुए। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से गुवा सेल परियोजना में कम से कम 500 स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग रखी।
लेकिन प्रबंधन की ओर से केवल 25 लोगों को रोजगार देने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे असंतोष और गहरा गया। इस प्रस्ताव को ग्रामीणों ने पूरी तरह खारिज करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने भी इसे स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
दो गुटों में बंटे ग्रामीण, एकता पर सवाल
आंदोलन के बीच 18 गांवों की एकजुटता हुई कमजोर
गुवा खदान से प्रभावित 18 गांवों के ग्रामीण पहले से ही दो गुटों में बंटे हुए हैं, और अब यह विभाजन और स्पष्ट हो गया है। आपसी एकता तार-तार हो चुकी है, जिससे आंदोलन की दिशा भी अलग-अलग नजर आने लगी है।
पहला गुट: मानकी सुरेश चांपिया और मंगता सुरीन के नेतृत्व में, जिसे मधु कोड़ा का समर्थन प्राप्त है।
👉 इस गुट ने 11 मई से अनिश्चितकालीन खदान बंद करने का ऐलान किया है।
दूसरा गुट: मानकी लागुड़ा देवगम और मुखिया राजू शांडिल के नेतृत्व में।
👉 इस गुट ने इस आंदोलन से दूरी बनाते हुए अलग रणनीति के तहत आंदोलन करने की बात कही है।

महिला विवाद के बाद बढ़ी दूरियां
राजू शांडिल के साथ कथित अभद्र व्यवहार बना वजह
सूत्रों के अनुसार, बैठक समाप्त होने के बाद बाहर मुखिया राजू शांडिल के साथ कुछ महिलाओं द्वारा कथित अशोभनीय व्यवहार किया गया। इस घटना के बाद उनका गुट आंदोलन से अलग हो गया।
इस घटनाक्रम ने पहले से मौजूद मतभेदों को और गहरा कर दिया है, जिससे 18 गांवों की सामूहिक ताकत कमजोर पड़ती दिख रही है।
लगातार आंदोलनों से पहले ही प्रभावित है खदान
अलग-अलग गुटों ने पहले भी बंद कराया था उत्पादन
गौरतलब है कि इससे पहले भी दोनों गुट अलग-अलग समय पर खदान को बंद करा चुके हैं।
लागुड़ा देवगम और राजू शांडिल गुट का आंदोलन मंत्री दीपक बिरुवा की पहल पर समाप्त हुआ था।
इसके बाद सुरेश चांपिया और मंगता सुरीन गुट ने खदान बंद कराया, जिसे मधु कोड़ा का समर्थन मिला था।
लगातार हो रहे इन आंदोलनों से खदान का उत्पादन पहले से ही प्रभावित हो रहा है।
सेल प्रबंधन और ठेका कंपनी पर दबाव
मां सरला कंपनी के सामने भी बढ़ेगी मुश्किल
11 मई से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन चक्का जाम का सीधा असर सेल गुवा प्रबंधन और खदान में कार्यरत ठेका कंपनी “मां सरला” पर पड़ेगा। उत्पादन ठप होने की स्थिति में प्रबंधन की परेशानी बढ़ने वाली है।
इसका असर न केवल कंपनी के कामकाज पर पड़ेगा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिलेगा।

बिखरती एकता और बढ़ती परेशानी
गुवा सेल खदान का यह विवाद अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह 18 गांवों के बीच बिखरती एकता और नेतृत्व के मतभेदों का प्रतीक बनता जा रहा है। एक तरफ स्थानीय रोजगार की मांग तेज है, तो दूसरी तरफ आपसी विभाजन इस लड़ाई को कमजोर कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि समाधान की कोई नई राह निकलती है या प्रबंधन की परेशानी और बढ़ती जाती है।














